इसमें कोई शक नहीं है कि जिस विश्वास और महत्वाकांक्षा को परवान चढ़ाने के लिए विमल गुरुंग ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, उसी सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जोर का झटका दिया है. विमल गुरुंग पहाड़ की राजनीति में एक कद्दावर नेता की तरह ही है. पहाड़ में लोग उन्हें सुनना पसंद करते हैं. पहाड़ और Dooars में उनका ऐसा क्रेज है कि जिस उम्मीदवार की वे पीठ थपथपा देते हैं, वह उम्मीदवार आसानी से चुनाव जीत जाता है. हाल ही में विमल गुरुंग को त्रिपक्षीय वार्ता में भाग लेने के लिए नई दिल्ली बुलाया गया था.
कदाचित विमल गुरुंग ने सोचा भी नहीं होगा कि सुप्रीम कोर्ट उन्हें इस कदर जोर का झटका देगा, जिससे उनके सारे अरमान बिखर जाएंगे. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले विमल गुरुंग को मिला यह झटका, उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े करता है. सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अखिल भारतीय गोरखा लीग के अध्यक्ष मदन तमांग हत्याकांड में आया है, जहां कोलकाता हाई कोर्ट ने इस मामले में उन्हें भी एक पक्ष बनाया था, जिसे विमल गुरुंग ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
पूरा मामला क्या है, यह जानना जरूरी है. 21 मई 2010 को मदन तमांग की दिन दहाड़े हत्या कर दी गई थी. मदन तमांग अखिल भारतीय गोरखा लीग के अध्यक्ष थे. वह पहाड़ के मजबूत और दबंग नेताओं में से जाने जाते थे. उस दिन दार्जिलिंग के क्लब साइट रोड पर कुछ लोगों ने उनका गला रेत कर हत्या कर दी थी. इस हत्याकांड में मदन तमांग की पत्नी भारती तमांग ने विमल गुरुंग और अन्य 29 लोगों के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. बाद में इस मामले की जांच सीआईडी को सौंप दिया गया था.
राज्य सीआईडी ने इस हत्याकांड में विमल गुरुंग तथा अन्य 29 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करके मामले की जांच शुरू की थी. सीआईडी अधिकारियों ने मामले की जांच करते हुए 22 आरोपियों को भगोड़ा घोषित कर दिया था. इसमें विमल गुरुंग भी शामिल थे. सीआईडी ने अंतत: निचली अदालत में विमल गुरुंग और बाकियों के खिलाफ चार्ज शीट पेश कर दी थी. हालांकि जब यह मामला तूल पकड़ने लगा, तो सीबीआई को जांच सौंप दी गई.
सीबीआई ने मामले की जांच करते हुए मदन तमांग हत्याकांड में विमल गुरुंग को मुख्य आरोपी बनाया था. कोलकाता सिटी के सेशन कोर्ट में यह मामला चल रहा था. 17 अक्टूबर 2016 को कोलकाता सेशन कोर्ट ने सबूत के अभाव में विमल गुरुंग को इस मामले से बरी कर दिया और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामले को चलाने का आदेश दिया था. निचली अदालत के इस फैसले को मदन तमांग की पत्नी भारती तमांग और सीबीआई ने कोलकाता हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.
यह मामला कोलकाता हाई कोर्ट में चला. कई सुनवाईयों के बाद कोलकाता हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए विमल गुरुंग के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश जारी किया और सीबीआई को विमल गुरुंग के खिलाफ चार्ज शीट पेश करने का आदेश दिया. जून 2024 में हाई कोर्ट के न्यायाधीश शुभेंदु सामंत ने विमल गुरुंग को मदन तमांग हत्याकांड से बरी करने की बात को भूल बताया था. कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया कि गोरखा जन मुक्ति मोर्चा के प्रमुख विमल गुरुंग के खिलाफ जांच में तेजी लाई जाए. और उनके खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत किया जाए.
गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के नेता विमल गुरुंग ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को बहाल रखने का आदेश दिया है. ऐसे में विमल गुरुंग के लिए यह मुश्किल भरा समय है. क्योंकि ऐसी स्थिति में विमल गुरुंग की गिरफ्तारी भी हो सकती है. बहर हाल यह देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विमल गुरुंग की अगली रणनीति क्या होती है? क्या वे सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका देंगे या फिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सामान करेंगे? हालांकि यह सब भविष्य के गर्भ में है. हमारी नजर विमल गुरुंग द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदमो पर टिकी रहेगी. जो भी हो, इसमें कोई शक नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से विमल गुरुंग की मुश्किलें बढ गई हैं.