बंगाल से उठा एस आई आर का तूफान सुप्रीम कोर्ट में भी दस्तक दे चुका है. आज सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी द्वारा एक वकील के रूप में दलील रखने का उन्हें कानूनी रूप से फायदा मिले या ना मिले, परंतु अपने इस अंदाज और वकालत के जरिए उन्होंने बंगाल के लोगों के बीच एक मजबूत छवि जरूर बना ली है कि उनकी मुख्यमंत्री जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में भी पैरवी कर सकती हैं. कम से कम यह मैसेज तो वह देने में कामयाबी रही ही है.
ममता बनर्जी जो शुरू से ही इस मामले का विरोध करती रही है, आज बंगाल की पीड़ित जनता की वकील बनकर सुप्रीम कोर्ट में बहस करने पहुंच गई. एक दिन पहले वह पीड़ितों के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त के दफ्तर गयी थीं. लेकिन वहां उन्हें निराशा हाथ लगी. आज निर्धारित प्रोग्राम के अनुसार सुप्रीम कोर्ट पहुंची और उन्होंने अपनी बात रखी. सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी को इसकी अनुमति भी दे दी. क्योंकि उनके पास वकालत की डिग्री भी है.
SIR के खिलाफ ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई शुरू होते ही मुख्यमंत्री ने जजों का अभिवादन किया और कहा कि हमें इंसाफ नहीं मिल रहा है. मैं अपनी पार्टी के लिए लड़ रही हूं. मैं SIR पर अपनी दलील रखना चाहती हूं. लेकिन सीजेआई ने कहा कि इस मामले पर पश्चिम बंगाल सरकार केस लड़ रही है और सरकार के पास बहस करने के लिए काबिल वकील भी हैं. ममता बनर्जी ने कहा कि जब वकील शुरू से लड़ रहे हो, रिकॉर्ड पर बार-बार बातें रखी जा रही हैं, छह बार चुनाव आयोग को पत्र लिखा गया हो पर एक भी जवाब ना मिले तो लोग न्याय के लिए कहां जाएंगे! मुझे 5 मिनट दीजिए! इस पर सीजेआई ने कहा कि हम आपको 15 मिनट देंगे. लेकिन पहले हमारी बात सुनिए.
CjI ने कहा कि प्रत्येक समस्या का समाधान होता है. आपकी सरकार यहां मौजूद है. आपकी पार्टी भी यहां है. आपके पास देश के अच्छे-अच्छे वकील मौजूद हैं.हमने आपकी समस्या को स्वीकार भी किया है और उस पर कार्रवाई भी चल रही है. ममता बनर्जी ने कहा कि पहले मुझे बोलने और बात खत्म करने की इजाजत दीजिए. मैं कुछ तस्वीरें दिखाना चाहती हूं. फिर उन्होंने कहा कि जब बेटियों की शादी हो जाती है तो ससुराल चली जाती हैं. लेकिन उनके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए हैं. चुनाव आयोग आपके आदेशों का उल्लंघन कर रहा है. कई बीएलओ की मौत हो चुकी है. बंगाल को टारगेट किया जा रहा है. लेकिन असम को क्यों नहीं?
ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग व्हाट्सएप कमीशन है. चुनाव आयोग के वकील ने इसका विरोध किया. इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी. ममता बनर्जी ने कोर्ट में बंगाल में रखे गए माइक्रोआबजर के औचित्य पर भी सवाल किया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बंगाल को बुलडोज करने की कोशिश की जा रही है. इस मामले पर सोमवार को सुनवाई होगी. ममता बनर्जी की ओर से श्याम दीवान बहस कर रहे थे. ममता बनर्जी वकीलों की पंक्ति में सबसे आगे खड़ी थी.
श्याम दीवान ने कोर्ट में मांग की कि चुनाव आयोग को लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट में शामिल हर मतदाता का नाम सार्वजनिक करना चाहिए. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद कई मामलों में केवल नाम, उम्र और लिंग दर्ज हैं. लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि मतदाता का नाम सूची से क्यों हटाया गया. लोगों को यह जानने का अधिकार है. सुनवाई के अंत में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत समय बढ़ाने का निर्देश दे सकती है. उन्होंने ममता बनर्जी से कहा कि अदालत को उनके वकील श्याम दीवान की काबलियत पर पूरा भरोसा है और उन्होंने अपने लिए श्रेष्ठ वकील चुने हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने आज उठाए गए मुद्दों पर निर्देश लेकर चुनाव आयोग से सोमवार को आने के लिए कहा है. सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि चुनाव आयोग की ओर से अधिकारियों के प्रति होस्टलिटी को लेकर लिखित आशंका जताई गई है…सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी का यह रूप बंगाल की जनता को कितना पसंद आता है, यह तो चुनाव में ही पता चलेगा. परंतु उससे पहले बंगाल में एस आई आर का उठा तूफान सुप्रीम कोर्ट को भी भूकंपित करने में पीछे नहीं रहा. अगली सुनवाई सोमवार को होगी. उसी दिन पता चलेगा कि यह मामला किस करवट लेता है.
