जनवरी में देशव्यापी एक दिन की बैंक हड़ताल के बाद अब फरवरी महीने में भारत बंद को सफल बनाने की तैयारी चल रही है. लेकिन यह तैयारी बैंक वालों की ओर से नहीं बल्कि श्रमिक संगठनों की ओर से की जा रही है. सिलीगुड़ी से लेकर पूरे उत्तर बंगाल में विभिन्न श्रमिक संगठनों की ओर से रोज ही रैलियां निकाली जा रही हैं. जिनमें श्रमिकों और आम लोगों से अपील की जा रही है कि 12 फरवरी को भारत बंद कराने में उनका सहयोग करें.
श्रमिक संगठनों की ओर से पहले ही 12 फरवरी को भारत बंद की घोषणा कर दी गई थी. श्रमिक संगठन भारत सरकार के श्रम संबंधित ताजा कानून को लेकर विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि केंद्र सरकार के नए श्रम कानून में उनका कोई हित नहीं छुपा है. इससे उनका और शोषण होगा. यही कारण है कि इंटक, सीटू, ए ए आई टी यू सी, यू टी यू सी और विभिन्न श्रमिक संगठन, उनके नेता और कार्यकर्ता एक स्वर से श्रम कानून का विरोध करते हुए देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने की तैयारी कर रहे हैं.
सिलीगुड़ी, तराई, Dooars आदि इलाकों में विभिन्न श्रमिक संगठनों की ओर से रैलियां निकाली जा रही है. दार्जिलिंग जिले के विभिन्न श्रमिक संगठनों ने पिछले दिनों रैली निकाली. यह रैली उत्तर बंगाल के कोने-कोने में निकाली जा रही है. यहां श्रमिक संगठनों की तादाद ज्यादा है. कल बाघाजतिन पार्क में भी श्रमिक संगठनों की ओर से रैली निकाली गई और शहर का भ्रमण किया गया. श्रमिक संगठनों की यह सबसे बड़ी रैली थी, जिसमें इंटक, सीटू, एटक और यू टी यू सी और विभिन्न छोटे बड़े श्रमिक संगठनों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए थे.
मिली जानकारी के अनुसार संगठनों के नेता अपने स्तर पर 12 फरवरी को बंद सफल करने के लिए सभी तरह के कदम उठा रहे हैं. दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूच बिहार ,मालदा आदि विभिन्न जिलों में बंद को सफल बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर श्रमिक संगठनों के द्वारा प्रचार किया जा रहा है.राज्य में माध्यमिक परीक्षा चल रही है. ऐसे में श्रमिक संगठनों के नेताओं ने कहा है कि उनके द्वारा आहूत बंद के दौरान परीक्षार्थियों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए.
श्रमिक संगठनों की ओर से घोषणा की गई है कि 12 फरवरी को बुलाए गए बंद में शिक्षण संस्थान और परिवहन को छूट दी जाएगी. यानी बंद समर्थक सड़कों पर उतरकर बस, टैक्सी, टोटो, परिवहन और शैक्षणिक संस्थानों को कोई डिस्टर्ब नहीं करेंगे. ताकि परीक्षार्थियों तथा उनके अभिभावकों को परीक्षा स्थल पर जाने में कोई परेशानी या असुविधा ना हो सके.
सूत्र बता रहे हैं कि यह बंद पूरे भारत में सफल हो या ना हो, लेकिन पहाड़, तराई, Dooars आदि इलाकों में बंद के सफल होने की संभावना देखी जा रही है. क्योंकि इन इलाकों में अधिकांश चाय बागान हैं और चाय बागान के श्रमिक बंद का समर्थन कर रहे हैं. ऐसे में 12 फरवरी को चाय बागान, उद्योग और कारखानों में बंद का असर देखा जा सकता है. श्रमिक संगठनों की ओर से केंद्र सरकार पर नए श्रम कानून को वापस लेने का दबाव दिया जा रहा है.
