अगर किसी शहर का यातायात, पर्यटन विस्तार के साथ ही शहर में स्वास्थ्य, जल परिसेवा, उद्योग और रोजगार के संसाधन उपलब्ध हो जाएं तो वह शहर स्मार्ट सिटी के रूप में जाना जा सकता है. सिलीगुड़ी में यूं तो विकास हुआ है, लेकिन रोजगार और पर्यटन के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है. यह शहर बिहार, उत्तर प्रदेश, असम व पूर्वोत्तर राज्यों के साथ ही पहाड़ से भी जुड़ा है. इसलिए यह खासा महत्वपूर्ण है.
हालांकि सिलीगुड़ी के विभिन्न क्षेत्रों में कमोबेश सभी तरह के संसाधन उपलब्ध हैं, परंतु परिवहन विस्तार नहीं होने तथा अच्छी सड़कों के अभाव में यहां के लोगों को दूर दराज के शहरों में जाने के लिए रेल मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है. सीमित रेल सेवा और मुसाफिर अनेक हों तो सड़क विकास की कमी खलने लगती है. कोलकाता, बिहार, उत्तर प्रदेश, असम और पूर्वोत्तर राज्यों के अनेक शहरों के लिए परिवहन सेवाएं उपलब्ध तो हैं. लेकिन अच्छी सड़कों के अभाव में परिवहन व्यवस्था चरमराने लगती है. उसे दूर करने की आवश्यकता वर्षों से महसूस की जा रही है.
सिलीगुड़ी नगर निगम के स्तर पर सिलीगुड़ी का विकास तो कुछ ना कुछ हुआ ही है. अब इस शहर को केंद्र की कई परियोजनाएं स्मार्ट सिटी के रूप में तब्दील कर सकती हैं. उदाहरण के लिए सिलीगुड़ी में रिंग रोड बनाए जाने की बात हो रही है. बालासन से सेवक तक उच्च पथ का निर्माण तेजी से चल रहा है. अगर कमी है तो सिलीगुड़ी से दूसरे राज्यों में जाने के लिए एक एक्सप्रेस वे की, जो सिलीगुड़ी गोरखपुर ग्रीन एक्सप्रेसवे के रूप में शीघ्र ही सिलीगुड़ी को मिलने जा रही है.
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के सौजन्य से यह शुभ कार्य किया जा रहा है. सिलीगुड़ी से लेकर गोरखपुर तक कुल 526 किलोमीटर लंबी एक्सप्रेस वे बनने जा रही है.आरंभ में यह फोरलेन में होगा बाद में इसे 6 लेन में विकसित किया जाएगा. केंद्र सरकार एक्सप्रेस वे के निर्माण पर 32000 करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है और जिस तरह की सूचना मिल रही है, उसके अनुसार ईपीसी मॉडल पर यह परियोजना तैयार हो रही है. लक्ष्य है कि 2028 तक इसे पूरा कर लिया जाए.
सिलीगुड़ी गोरखपुर ग्रीन एक्सप्रेसवे के बन जाने से सिलीगुड़ी को ढेर सारे लाभ मिलने वाले हैं. यहां व्यापार, उद्योग, कृषि विपणन, रोजगार, माल वाहन, स्थानीय उत्पादों की बिक्री समेत यात्री सेवाओं में कमी और अनेक अनेक लाभ होने वाले हैं. यहां के लोग दूरस्थ परिवहन के लिए ट्रेन पर निर्भर नहीं रहेंगे.लोग ग्रीन एक्सप्रेसवे से कम समय में लंबी दूरी तय कर सकेंगे. व्यापार और मेडिकल क्षेत्र में तात्कालिक आवश्यकता की पूर्ति के लिए लोगों को रेल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. जानकार मानते हैं कि ग्रीन एक्सप्रेसवे के बन जाने से सिलीगुड़ी से गोरखपुर होते हुए दिल्ली तक महज़ 18 से 20 घंटे में पहुंचा जा सकता है. जबकि सिलीगुड़ी से गोरखपुर यात्री मात्र 8 घंटे में बस से पहुंच सकेंगे.
सिलीगुड़ी एक व्यापारिक केंद्र है. यहां के व्यापारी देश के दूर दराज के भागों से ट्रक के द्वारा माल मंगाते हैं.इसमें कम से कम 5 से 7 दिनों का समय लग जाता है.अगर ग्रीन एक्सप्रेस वे से ट्रक परिवहन होता है तो व्यापारी को बिक्री के लिए एक-दो दिन में ही माल मिल सकता है. इसी तरह से किसी को नौकरी, रोजगार, व्यापार, मेडिकल आदि कार्यों के लिए दिल्ली और आसपास के शहरों में जाना है तो ग्रीन एक्सप्रेस से होकर बस सेवा का लाभ उठाया जा सकता है.
फिलहाल अच्छी सड़क के अभाव में सिलीगुड़ी से दिल्ली, बैंगलोर, मुंबई आदि शहरों के लिए सीधी बस सेवा नहीं है. लेकिन उम्मीद की जा रही है कि जब सिलीगुड़ी गोरखपुर एक्सप्रेसवे बन जाएगा तो सिलीगुड़ी से अंतर राज्यीय बस सेवा भी शुरू हो सकती है. सिलीगुड़ी ग्रीन एक्सप्रेसवे बिहार के 18 जिलों से होकर गोरखपुर तक जाती है. इस पर कार्य तेजी से चल रहा है.यह केंद्र सरकार की बहुआयामी ड्रीम प्रोजेक्ट है. अगर प्रस्तावित समय तक यह सड़क तैयार हो जाती है तो सिलीगुड़ी शहर को स्मार्ट सिटी में तब्दील होते देर नहीं लगेगी. बहरहाल यह देखना होगा कि केंद्र की इस चिर प्रतीक्षित परियोजना कब तक साकार होती है!
