अगले विधानसभा चुनाव में किसकी बनेगी सरकार? टीएमसी की दोबारा वापसी होगी या फिर भाजपा बंगाल में बनाएगी सरकार? इस बारे में केवल सोशल मीडिया पर ही सारा खेल चल रहा है. जबकि दोनों ही दलों की ओर से जनता के बीच, जनता की अदालत में अपना-अपना लेखा-जोखा रखा जा रहा है. कौन किस पर भारी पड़ता है, यह राजनीतिक दलों की बनाई रणनीति पर निर्भर करेगा. ममता बनर्जी ने भी भाजपा को सत्ता से रोकने के लिए एक रणनीति बनाई है,पर उनकी रणनीति कितना कामयाब होगी, अभी से इस पर कुछ भी कहना ठीक नहीं है.
आगामी बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा और टीएमसी का संघर्ष जारी है. भारतीय जनता पार्टी राज्य में टीएमसी को सत्ता से उखाड़ फेंकना चाहती है तो दूसरी तरफ टीएमसी भाजपा को राज्य की सत्ता में काबिज होने देना नहीं चाहती है. दोनों ही दलों की ओर से चुनाव प्रचार से लेकर उपलब्धियां गिनाने का काम शुरू हो चुका है. ममता बनर्जी राज्य में बंगाली अस्मिता का कार्ड खेल रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मालदा और सिंगूर का दौरा हो चुका है. वह यहां की जनता से कहते हैं कि आप वादा कीजिए कि 2026 विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के जंगल राज को उखाड़ फेंकेंगे. ममता बनर्जी भाजपा पर अपनी हर सभा में हमले करती रही है. एक तरफ भारतीय जनता पार्टी अगले विधानसभा चुनाव में टीएमसी की घुसपैठ, भ्रष्टाचार और सिंडिकेट को अपना मुद्दा बनाना चाहती है तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी बंगाली अस्मिता को लेकर भाजपा से लड़ रही है.
राज्य में एस आई आर सुनवाई प्रक्रिया चल रही है. इसमें सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को जैसा निर्देश दिया है,उसके बाद टीएमसी की ओर से दावा किया जा रहा है कि चुनाव से पहले ही भाजपा यहां हार चुकी है. अभिषेक बनर्जी ने दावा किया है कि चुनाव में भाजपा को 50 से भी कम सीटें आएंगी.
दूसरी तरफ भाजपा का दावा है कि इस बार टीएमसी का खेल खत्म होने जा रहा है. जहां तक बंगाल की जनता के बीच मुद्दों के प्रभाव की बात है तो यहां के लोगों को बंगाली अस्मिता ज्यादा आकर्षित करती है और घुसपैठ तथा घुसपैठियों की बात दूसरे स्थान पर आती है. भाजपा आमतौर पर चुनाव के दौरान ध्रुवीकरण की रणनीति बनाती है. लेकिन बंगाल में भाजपा की यह रणनीति काम नहीं करती है.
मुख्यमंत्री ने अपनी सभाओं में यह प्रचार करना शुरू कर दिया है कि बंगाल में बाहरी लोगों का कोई दखल नहीं होना चाहिए. बंगाल की सरकार बंगाल की बेटी ही चलाएगी. भाजपा की ओर से भ्रष्टाचार, सिंडिकेट , असुरक्षा की बात उठाई जा रही है और लोगों से कहा जा रहा है कि अगर ममता बनर्जी की सरकार की वापसी होती है तो बंगाल विकास में काफी पिछड़ जाएगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बंगाल के लोगों से वादा करते हैं कि अगर बंगाल में भाजपा की सरकार आती है तो यहां विकास की नई कहानी लिखी जाएगी. दोनों ही पार्टियों की ओर से एक दूसरे की कमजोर नस को ढूंढने और दबाने की कोशिश की जा रही है. जैसे-जैसे चुनाव करीब आता जाएगा, दोनों दल जनता के मूड को भापते हुए अपनी रणनीति में भी बदलाव करते रहेंगे.
अब देखना होगा कि बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने की उनकी रणनीति बंगाली अस्मिता कितना सफल होती है. जबकि भाजपा की राज्य में टीएमसी की भ्रष्टाचार, सिंडिकेट, कानून एवं व्यवस्था की खराब स्थिति का प्रचार उनकी रणनीति पर कितना भारी पड़ती है. जानकार मानते हैं कि दोनों दलों की ओर से जनता के बीच प्रचार के तरीके और कैश करने की रणनीति पर सारा खेल टिका हुआ है.
