भारत सरकार से लेकर राज्य सरकारों ने भी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दीघा में जगन्नाथ मंदिर तो सिलीगुड़ी में महाकाल महातीर्थ मंदिर बनाने का फैसला किया है. इसी की तर्ज पर अब गोवा सरकार ने भी राज्य में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया है.
आधुनिक दौर में धार्मिक पर्यटन न केवल सरकार की आय का प्रमुख स्रोत बन रहा है बल्कि इससे लोगों की धार्मिक भावना और दिव्यता की संपुष्टि के साथ ही शांति और समृद्धि को भी बढ़ावा मिलता है.धर्म स्थलों का निर्माण न केवल आस्था को समृद्ध करने का एक इकाई है, बल्कि वर्तमान में यह राजस्व और आय का प्रमुख स्रोत बनता जा रहा है.
यही कारण है कि पहाड़ी राज्यों में धार्मिक संस्कृति और धर्म स्थलों के जरिए एक ओर जहां लोगों की आस्था को बनाए रखा जाता है तो दूसरी तरफ यहां आने वाले पर्यटक और तीर्थ यात्री राज्य के खजाने को समृद्ध करने का भी काम करते हैं. उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर जैसे राज्य पहले से ही धार्मिक पर्यटन को अपने विकास का अंग बना चुके हैं.
अब यह क्रांति दक्षिण भारतीय राज्यों में भी प्रवेश कर रही है. केरल महाराष्ट्र और अब गोवा धार्मिक पर्यटन के महत्व को समझने वाला एक ऐसा राज्य बन गया है जो धार्मिक पर्यटन के विकास पर निवेश कर रहा है. गोवा में मांडवी नदी पर घाट आरती सुविधा विकसित की जा रही है. इस पर गोवा सरकार का 10.85 करोड रुपए खर्च हो रहा है. इसका निर्माण इसी साल 29 मई तक पूरा कर लेने की बात है.
आने वाले वक्त में पश्चिम बंगाल में धार्मिक पर्यटन को एक नई रफ्तार मिलने वाली है. माटीगाड़ा में बनने वाले महाकाल महातीर्थ की संस्कृति अगर विकसित होकर सफल होती है तो सरकार इस फार्मूले का इस्तेमाल उत्तर बंगाल के अन्य जिलों में करना चाहेगी. खासकर उन इलाकों में जो बॉर्डर इलाके से सटे हुए हैं.
