January 21, 2026
Sevoke Road, Siliguri
Uncategorized

सिलीगुड़ी में घर खरीदना नहीं है आसान!

सिलीगुड़ी नगर निगम के अंतर्गत किराए के एक मकान में रहने वाले रामबाबू ने अपनी पैतृक जमीन बेचकर और इधर-उधर से कुछ पैसे का जुगाड़ करके कावाखाली के पास 2 BH का एक फ्लैट खरीदना चाहा. उन्होंने बताया कि एक साल पहले एजेंट ने उसका जो दाम बताया था, उसके हिसाब से उन्होंने पैसे का प्रबंध किया था. अब फ्लैट की कीमत में लगभग 30% का इजाफा कर दिया गया है. रामबाबू के पास इतना पैसा था नहीं और ना ही उन्हें कहीं से कर्ज मिलने के आसार थे. लिहाजा उन्होंने घर खरीदने का प्रोग्राम कैंसिल कर दिया है.

यह तो लगभग सभी मान चुके हैं कि सिलीगुड़ी अब पहले जैसा शहर नहीं रहा. क्षेत्रफल तो वही है, लेकिन विगत 2 दशकों में आबादी कई गुना बढ़ गई है. तीन देशों नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमा पर स्थित यह शहर पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख द्वार भी माना जाता है. इसलिए सिलीगुड़ी एक महत्वपूर्ण शहर बन गया है.

चाहे सिलीगुड़ी का ही हो या सिलीगुड़ी से बाहर का व्यक्ति, उसका एक ही सपना होता है कि किसी तरह से सिलीगुड़ी में उसका अपना एक घर हो और जब वह घर खरीदने के लिए बिल्डर के पास जाता है तो प्रॉपर्टी का दाम सुनते ही उसे चक्कर आने लगता है. गरीब लोग तो चाह कर भी यहां घर नहीं खरीद सकते. अगर मध्यम वर्ग का व्यक्ति घर का सपना देखता है तो उसका भी सपना शायद ही पूरा हो.

यहां रहने वाले लोगों खासकर मध्यम वर्ग का जीवन आसान नहीं है. महंगाई के इस युग में लोगों की आमदनी तो नहीं बढ़ी है, अपितु जीवन शैली में बदलाव के कारण खर्चे पहले से ज्यादा बढ़ गए हैं. यहां रोजी रोजगार के क्षेत्र में विकास न होने से लोगों को कम पैसे में गुजारा करना पड़ता है. ऐसे में अगर कोई मध्यम वर्ग का व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई का तिनका तिनका जोड़कर और इधर-उधर से पैसे का जुगाड़ करके अपने लिए फ्लैट खरीदना चाहता है, तो घर का दाम सुनते ही उसके पसीने छूटने लगते हैं. घर का उसका सपना बिखर जाता है.

सवाल यह है कि जिस शहर में कल कारखानों के नाम पर चंदेक दुकान और प्रतिष्ठान हो, जहां लोग अब भी दुकानों में 10000 12000 महीने की नौकरी करके अपने परिवार का किसी तरह गुजारा करने के लिए मजबूर हों, वह शहर महंगा क्यों हो गया. यहां प्रॉपर्टी के दाम इतने ज्यादा क्यों बढ़ गए? आखिर सिलीगुड़ी शहर इतना महंगा कैसे हो गया? तो यही कहा जा सकता है कि इस शहर की ओर बाहर के लोगों ने रुख करना शुरू कर दिया है. सूत्र बताते हैं कि सिलीगुड़ी में प्रॉपर्टी में निवेश करने के लिए न केवल पहाड़ बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी लोग आ रहे हैं. क्षेत्रफल तो वही है, पर खरीदार अत्यधिक. यानी एक अनार सौ बीमार की तरह ही यहां की प्रॉपर्टी हो गई है. जाहिर है ऐसे में बिल्डर और डेवलपर तो चांदी काटेंगे ही.

सूत्रों ने बताया कि पिछले एक दशक में सिलीगुड़ी में प्रॉपर्टी का दाम लगभग दुगुना बढ़ गया है और आने वाले समय में बिल्डर और डेवलपर इसमें और भारी इजाफा होने का अनुमान लगा रहे हैं. जिस तरह से यहां बाहर से आए लोगों के द्वारा घर खरीदने का रुझान बढा है, उसे देखते हुए बिल्डरों ने भी प्रॉपर्टी का दाम लगातार बढ़ाना शुरू कर दिया है. शहर में तो जमीन है नहीं, शहर के बाहरी छोड़ जैसे फुलबारी, माटीगाड़ा, कावाखाली, मेडिकल आदि इलाकों में फटाफट आवासीय फ्लैट तैयार किये जा रहे हैं.

इन फ्लैटों की कीमत इतनी ज्यादा है कि किराए पर रहने वाला एक मध्यम वर्गीय व्यक्ति भी चाह कर भी फ्लैट नहीं बुक करा सकता. दूसरी तरफ सिलीगुड़ी की डेमोग्राफी से अनजान बाहरी क्रेताओं को ये बिल्डर Rera की परवाह किए बगैर धड़ाधड़ फ्लैट बेच रहे हैं. वे खरीदारों को प्रोजेक्ट्स की योजना और सुविधाओं को बता कर अपने जाल में फांस लेते हैं और फिर शुरू होता है उनका आर्थिक शोषण.

नियमों के अनुसार प्रत्येक बिल्डर को रेरा के तहत ही प्रॉपर्टी की बिक्री करने का अधिकार है. वास्तव में रेरा घर खरीदने की प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाता है, जिससे खरीदारों को बिल्डरों से धोखा नहीं मिलता है और प्रॉपर्टी में निवेश भी सुरक्षित रहता है. यह कानून रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता, जवाबदेही और घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए है. इसके विभिन्न प्रावधान है. मगर घर खरीदारों को तो सिर्फ यह मतलब रहता है कि किसी तरह से उसका फ्लैट बुक हो जाए. वह सस्ता और महंगा की परवाह नहीं करता.

ऐसे में सिलीगुड़ी के एक मध्यम वर्गीय परिवार का अपना घर हो का सपना बिखर जाता है. यह स्थिति ज्यादा दुखदाई है. बाहरी निवेश से भले ही बिल्डर और डेवलपर मालामाल हो जाए, लेकिन सिलीगुड़ी का सही मायने में विकास तो स्थानीय संसाधनों से ही निखरता है. सरकारी मशीनरी को इस पर जरूर विचार करना चाहिए. इसके साथ ही प्रॉपर्टी के दाम को मनमाने तरीके से बढ़ाने का अधिकार बिल्डर अथवा किसी भी एजेंसी को नहीं दिया जाना चाहिए. सरकारी मशीनरी को एक लचीला और संतुलित रुख अपनाना चाहिए और स्थानीय खरीदारों को प्रमुखता देनी चाहिए. तभी सिलीगुड़ी का सौंदर्य भी बढ़ेगा और उसकी रफ्तार भी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *