हर साल की भांति इस साल भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट से पहले सदन में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया है. जिसमें यह दावा किया गया है कि 7.4% की रफ्तार से देश की इकोनामी बढ़ेगी. अगर ऐसा होता है तो यह भारत और भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक शुभ संकेत है. जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतिक्रिया दी है कि भारत सुधार और विकास के पथ पर कदम रख रख चुका है और वह पीछे मुड़कर देखने वाला नहीं है, इससे भी यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 1 फरवरी को पेश किया जाने वाला बजट सुधारों का बजट होगा.
आर्थिक सर्वेक्षण 2025 26 में कई प्रमुख बातों और विशेषताओं का उल्लेख किया गया है. चालू वित्त वर्ष में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.4% जबकि अगले वित्त वर्ष में यह 6.8 से 7.2% के बीच रह सकती है .आर्थिक सर्वेक्षण की सबसे बड़ी विशेषता जनता पर दबाव कम करने के लिए महंगाई नियंत्रण और निवेश बढ़ाने पर फोकस किया गया है.
दुनिया भर में अफरा तफरी, अस्थिरता और उथल-पुथल के बीच भारत का रिपोर्ट कार्ड निश्चित रूप से राहत देता है. जिस तरह से दुनिया भर में अमेरिकी टैरिफ के फल स्वरुप राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है, उस स्थिति में भी भारत अपने भविष्य को संवारने में जुटा हुआ है. हालांकि सही तस्वीर तो 1 फरवरी को लोकसभा में पेश होने वाले बजट के बाद ही सामने आएगी.
बजट के जानकार और विश्लेषक मानते हैं कि आर्थिक सर्वेक्षण बजट का ट्रेलर होता है. भारत का बजट कैसा होगा, उसे आर्थिक सर्वेक्षण को देखकर जाना जा सकता है. पर्दे के पीछे जिस व्यक्ति ने यह रिपोर्ट कार्ड तैयार किया है, उनका नाम वी अनंत नागेश्वरन है जो मुख्य आर्थिक सलाहकार हैं. वह काफी अनुभवी हैं. इस आर्थिक सर्वेक्षण से पता चलता है कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है. भारत की तरक्की का इसमें फार्मूला भी है.
लोकसभा में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में यूरोप के साथ होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का भी जिक्र किया गया है. रिपोर्ट में कहां गया है कि इस व्यापार समझौते से भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी. इस ट्रेड एग्रीमेंट से भारत का निर्यात सेक्टर भी मजबूत होगा. भारतीय चीजों की पहचान दुनिया के देशों में बढ़ेगी.
हालांकि इस आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी उम्मीद लगाई गई है कि अमेरिका के साथ जो ट्रेड डील चल रही है, वह जल्द ही पूरी हो जाएगी. अगर ऐसा होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रही अनिश्चितता भी खत्म हो जाएगी या इसमें काफी कमी आएगी. जो भी हो, पूरे देश की नजर 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट पर टिकी है.
