सिलीगुड़ी के नजदीक राजगंज थाना अंतर्गत संन्यासीकाटा ग्राम पंचायत के अंतर्गत बिआरूहाट एक गांव आता है. शाम का समय था. अचानक शरीफुल आलम नामक एक युवा एक घर में घुस गया. वह उस घर में रहने वाली अपनी कथित प्रेमिका को जबरदस्ती बाहर की ओर खींच रहा था. जबकि युवती उसके साथ बाहर जाने के लिए तैयार नहीं हो रही थी.
घर वाले चुपचाप या तमाशा देख रहे थे. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. इसी बीच युवक युवती को लगभग घसीटता हुआ बाहर ले गया और नदी के पास एक सुनसान स्थान में छोड़ दिया. फिर वह बोला, तुम अपना केस वापस लेती हो या नहीं, मैं आखिरी बार तुमसे पूछता हूं… इस पर कथित प्रेमिका ने सीधा जवाब दिया कि वह मरते दम तक अपना केस वापस नहीं लेगी. फिर क्या था! युवक का पारा गर्म हो गया. उसने पेट्रोल निकाला और प्रेमिका के बदन पर डाल दिया. फिर देखते ही देखते उसने आग लगा दी. जब युवती आग की लपटों में घिरकर चीखने लगी तो आरोपी शरीफुल आलम वहां से नौ दो ग्यारह हो गया.
गांव में उस समय हडकंप मच गया जब गांव वालों ने नदी के किनारे युवती को आग में जलते हुए देखा. युवती बचाओ बचाओ की आवाज लगा रही थी. लोग उसके बदन से आग बुझाने का प्रयास कर रहे थे. कुछ देर में राजगंज थाना की पुलिस मौके पर पहुंच गई. गांव वालों की मदद से पुलिस ने युवती को चिकित्सा के लिए उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया, जहां पीड़िता ने पुलिस को अपना बयान दिया. उसके बयान के आधार पर राजगंज थाना में शरीफुल आलम के खिलाफ ब्लैकमेल और हत्या की कोशिशा का मामला दर्ज करके पुलिस ने जांच शुरू कर दी.
पुलिस की प्रारंभिक तफ्तीश, पड़ोसियों के बयान और चश्मदीदों के अनुसार यह घटना पिछले दो वर्षो से चली आ रही प्रेम कहानी, ब्लैकमेल, धोखा की पृष्ठभूमि पर आधारित थी, जिसका यह हश्र सामने आया था. लगभग 24 साल की पीड़ित युवती का शरीफुल आलम नामक युवक से दोस्ती हो गई थी, जो धीरे-धीरे मोहब्बत में तब्दील हो गई. शरीफुल आलम ने इसी मोहब्बत की आड़ में युवती के साथ छल किया और युवती के मना करने के बावजूद उसका यौन शोषण किया.
पीड़ित युवती ने शरीफुल आलम के खिलाफ राजगंज थाना में दुष्कर्म का मामला दर्ज कर दिया था. यह घटना 7 नवंबर 2024 की है. पीड़िता की शिकायत पर राजगंज थाना की पुलिस ने शरीफुल आलम को गिरफ्तार कर लिया और उसे जेल भेज दिया. 52 दिनों तक शरीफुल आलम जेल में रहा. फिर उसे जमानत मिल गई तो वह जेल से बाहर आया. जेल से बाहर आने के बाद उसने पीड़िता को धमकाना शुरू कर दिया. वह उस पर केस वापस लेने का दबाव डाल रहा था.
जब पीड़िता नहीं मानी तो उसने उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया. दरअसल पीड़िता के उसके पास कुछ अश्लील फोटो और वीडियो ग्राफ थे. उसने पीड़िता पर दबाव बनाने के लिए सोशल मीडिया पर उसके वीडियो वायरल करने की धमकी दी. लेकिन उसका यह हथियार भी विफल साबित हुआ. उधर बदले की आग में सुलग रहे आलम ने पीड़िता को ही ऊपर उठा देने का फैसला कर लिया और 21 जनवरी को सारी तैयारी करके वह उसके घर में घुस गया. उसने पीड़िता के साथ मारपीट भी की. फिर उसे घर से घसीटते हुए नदी के किनारे सुनसान जगह पर ले गया और उसके बदन पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी.
उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लगातार 6 दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझ रही पीड़िता ने आखिरकार दम तोड़ दिया. इसके बाद सन्यासी काटा और बिआरूहाट इलाके में लोगों की उत्तेजना चरम पर पहुंच गई. मामला उग्र रूप लेते ही जलपाईगुड़ी पुलिस हरकत में आई और शरीफुल आलम के खिलाफ हत्या की कोशिश की धारा हटाकर उसकी जगह युवती की हत्या का मामला दर्ज कर लिया.
जलपाईगुड़ी के एसपी वाई रघुवंशी ने लोगों को भरोसा दिया है कि आरोपी शरीफुल आलम को कानून के अनुसार सख्त सजा दी जाएगी. यह घटना सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में चर्चा का विषय बनी है. क्योंकि एक लंबे अरसे के बाद कानून को ताक पर रखकर इस तरह के दुस्साहस का मामला सामने आया है. इलाके के लोग शरीफल आलम को फांसी देने की मांग कर रहे हैं. यह घटना उन युवतियों के लिए एक सबक है जो बिना सोचे विचारे किसी युवक पर भरोसा कर लेती है और छली जाती है. जहां उसे अपनी जान देकर गलती की सजा भुगतनी पड़ती है.
