केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा गोसाईपुर के भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन में उत्तर बंगाल में एम्स की स्थापना के बारे में अपने दृष्टिकोण का इजहार करना, केंद्रीय बजट में तीन नए एम्स की स्थापना का प्रस्ताव और आज संसद के शून्य काल के दौरान भाजपा के राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला द्वारा दार्जिलिंग और उत्तर बंगाल में सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या संकट की ओर केंद्र का ध्यान आकर्षित करना और सीजीएचएस विस्तार की मांग; ये कुछ ऐसे बिंदु हैं जो सिलीगुड़ी में एम्स की स्थापना का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं.
अगर पहाड़ और उत्तर बंगाल के सामान्य जनजीवन और सार्वजनिक स्वास्थ्य की बात करें तो पहाड़ से लेकर उत्तर बंगाल में सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या काफी गंभीर है. यहां ले-देकर कुछ सरकारी अस्पताल हैं जो पर्याप्त संसाधनों के अभाव में अपने हाल पर आंसू बहा रहे हैं. यहां इलाज के नाम पर लापरवाही की घटनाएं भी अक्सर सामने आती है. इन सरकारी अस्पतालों में बहुत से जटिल रोगों का इलाज भी नहीं होता, जिसके कारण रोगियों को दक्षिण राज्यों में जाना पड़ता है. गरीब और मध्यमवर्ग के लोगों को काफी परेशानी भी होती है. पैसा तो खत्म होता ही है, रोगी को होने वाली शारीरिक और मानसिक परेशानी अलग है.
सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला ने संसद में दिए अपने बयान में कहा है कि उत्तर बंगाल और सिक्किम में 2 लाख से अधिक केंद्रीय सरकार के कर्मचारी, पेंशन भोगी और उनके आश्रित दार्जिलिंग, मिरिक, कर्सियांग, कालिमपोंग, नक्सलबाड़ी, बागडोगरा आदि क्षेत्रों में निवास करते हैं. लेकिन उनकी स्वास्थ्यगत समस्याओं के निवारण के लिए एकमात्र सिलीगुड़ी में केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना है. ना तो पहाड़ में और ना ही सिक्किम में सीजीएचएस की व्यवस्था है. ऐसे में उन्हें इलाज के लिए सिलीगुड़ी जाना पड़ता है, जो पहाड़ के रोगियों के लिए कष्टदायक होता है.
ऐसे गरीब लोगों को आने जाने में काफी पैसा खर्च होता ही है, इसके साथ ही एकमात्र CGHS वैलनेस सेंटर होने के कारण इस पर दबाव भी बढ़ जाता है. यहां इलाज में देरी होती है. उन्होंने संसद का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि पहाड़ से लेकर उत्तर बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में सीजीएचएस वैलनेस सेंटर का विस्तार किया जाना चाहिए ताकि रोगियों को इलाज में कठिनाई न हो सके. उन्होंने केंद्र सरकार से यह भी मांग की है कि उत्तर बंगाल और पहाड़ के निजी अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटर और नर्सिंग होम को सीजीएचएस नेटवर्क में शामिल किया जाना चाहिए. उन्होंने सिलीगुड़ी में चल रहे सीजीएचएस वैलनेस सेंटर को लेकर कहा है कि इसको बीएसएनल भवन में स्थानांतरित किया जाना चाहिए. साथ ही एक अतिरिक्त कार्यालय भी खोला जाना चाहिए.
हर्षवर्धन श्रृंगला ने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि सिलीगुड़ी में बहुत से ऐसे अस्पताल और नर्सिंग होम हैं जिन्हें CGHS के अंतर्गत लाया जाना चाहिए. इन अस्पतालों में होप एंड हिल, कैंसर अस्पताल और महाराजा अग्रसेन अस्पताल का नाम उन्होंने सुझाया है. उनके इस भाषण से संकेत मिलता है कि उत्तर बंगाल में सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर हैं. यह कोई पहला मौका तो है नहीं. इससे पहले भी दार्जिलिंग समेत उत्तर बंगाल के विभिन्न सांसदों और प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया था और इस तरह से केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है कि यहां जल्द से जल्द एक एम्स की स्थापना हो, ताकि पहाड़ और उत्तर बंगाल के मरीजों को इलाज के लिए यहां से बाहर न जाना पड़े.
आपको याद होगा कि बहुत पहले भाजपा सांसद राजू बिष्ट ने कहा था कि सिलीगुड़ी में केंद्र सरकार एम्स की स्थापना करेगी. उन्होंने खबर समय के कार्यालय में लोकप्रिय कार्यक्रम लेटस टॉक में भी यह बात कही थी. वे सार्वजनिक मंचों पर भी यह बात कहते रहे हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राजू बिष्ट के स्वर में स्वर मिलाया है. यानी सरकार तैयार है. अब सिर्फ जमीन मिलने की देर है,जो सिर्फ राज्य सरकार ही दे सकती है. अब देखना होगा कि राज्य सरकार के पास अगर इस तरह का कोई प्रस्ताव आता है तो उसका क्या जवाब सामने आता है.
