सिलीगुड़ी पर केंद्र सरकार मेहरबान है. आने वाले समय में सिलीगुड़ी शहर दिल्ली, मुंबई और कोलकाता की तर्ज पर विकसित होगा. सरकार की कुछ इसी तरह की योजना दिख रही है. रेल बजट में सिलीगुड़ी से लेकर उत्तर पूर्व राज्यों को मुखधारा में लाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी घोषणा कर दी है.
सिक्किम को तो पहले ही सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है. अब उत्तर बंगाल खासकर सिलीगुड़ी को अब तक का सबसे बड़ा अद्वितीय तोहफा मिलने जा रहा है. उत्तर पूर्वी राज्यों में पहली बुलेट ट्रेन बनारस से सिलीगुड़ी तक चलाई जाएगी और बाद में इसका विस्तार गुवाहाटी तक किया जाने वाला है.
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन क्या है. उन्होंने कहा कि वाराणसी से वाया पटना सिलीगुड़ी तक पहली बुलेट ट्रेन चलाई जाएगी. इसका मतलब यह है कि सिलीगुड़ी से बनारस की दूरी मात्र तीन-चार घंटे में ही पूरी की जा सकती है. इसका सबसे बड़ा असर पर्यटन और उद्योग विस्तार पर देखा जा सकता है. बेरोजगारी दूर करने में भी इसका प्रभाव पड़ेगा.
सरकार की योजना के अगले चरण में बनारस से दिल्ली तक बुलेट ट्रेन चलाई जाएगी. इस तरह से दिल्ली से लेकर वाया सिलीगुड़ी गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन चलाने की केंद्र सरकार की योजना है. रेल मंत्री की इस घोषणा का भाजपा सांसद राजू बिष्ट ने स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है.
मिली जानकारी के अनुसार पहले चरण में बनारस से सिलीगुड़ी तक बुलेट ट्रेन चलाई जाएगी. उसके बाद गुवाहाटी तक इसका विस्तार किया जाएगा. यह बुलेट ट्रेन 40 किलोमीटर तक सिलीगुड़ी गलियारा से होकर गुजरेगी. बजट अनुमोदन के बाद सरकार ट्रैक बिछाने के काम में जुट जाएगी. इस तरह का संकेत मिल रहा है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि उत्तर पूर्वी राज्यों में रेलवे का विस्तार किया जा रहा है. कई नई ट्रेनें चलाई जा रही है और इसका एकमात्र उद्देश्य है कि उत्तर पूर्वी राज्यों को भारत के मुख्य शहरों से सीधा जोड़ा जाए.
रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में क्रांति आने से उत्तर पूर्वी राज्यों का भी काफी विकास होगा. नॉर्थ ईस्ट के कई ऐसे राज्य हैं जहां विकास धीमी गति से चल रहा है. रेलवे कनेक्टिविटी भी कम है.अब ऐसे राज्यों पर सरकार का ध्यान गया है. आम बजट के अंतर्गत रेल बजट में भी यह दिख रहा है.
सत्र 2026 27 के बजट में केंद्र सरकार ने रेलवे पर 14205 करोड़ केवल बंगाल के रेल प्रोजेक्ट के लिए प्रस्ताव किया है. रेल मंत्री ने बताया कि कोलकाता मेट्रो और 17 नए प्रोजेक्ट पर भी काम किया जाना है. सरकार ने उत्तर पूर्वी राज्यों में नई लाइन बिछाने की भी स्वीकृति दे दी है. वानरहाट से समतसे और कोकराझार से गेलेफू भूटान तक नई लाइन को हरी झंडी दे दी गई है.
रेल मंत्री ने बताया है कि आने वाले समय में रेलवे की ओर से बंगाल, असम और उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए कई नई रेल परियोजनाएं शुरू की जानी है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन 2047 तक विकसित भारत के स्वप्न के अंतर्गत रेल विकास और यातायात को जोड़ा है.
हालांकि रेल मंत्री की इस घोषणा पर जल्दी यकीन नहीं होता. क्योंकि बुलेट ट्रेन तो अभी वहां भी नहीं चली है, जिसकी रूपरेखा एक दशक पहले ही दक्षिण भारत में तैयार कर ली गई थी. हालांकि वहां काम तेजी से चल रहा है.वहां यह संभव हो सकता है. पर जहां तक उत्तर पूर्वी भारत सिलीगुड़ी, पटना, बनारस और दिल्ली को बुलेट ट्रेन से जोड़ने की बात है तो कई लोगों को यह चुनावी हथकंडा लगता है.
पर कुछ भी हो, धुआं तो यूं ही नहीं उठता है. अगर सरकार ने ऐलान कर दिया है तो देर सवेर यह योजना क्षितिज पर आएगी ही.लेकिन वह समय क्या होगा, यह कोई नहीं जानता है. बहरहाल केंद्र सरकार और रेल मंत्री की घोषणा के बाद सिलीगुड़ी समेत उत्तर बंगाल के लोगों में उम्मीद की खुशी देखी जा रही है.
