बंगाल की विपक्षी पार्टी भाजपा द्वारा टीएमसी और टीएमसी की मुखिया ममता बनर्जी पर चौतरफा हमला और चुनाव आयोग द्वारा राज्य में एस आई आर को लेकर चुनाव आयोग और टीएमसी की छिड़ी जंग के बीच 5 जनवरी को राज्य में राज्य सरकार के द्वारा वह किया जाने वाला है, जिसका इंतजार राज्य के नागरिकों, सरकारी कर्मचारियों और महिलाओं को है.
क्या ममता बनर्जी की सरकार महिलाओं की उम्मीदों को पूरा करेगी? क्या ममता बनर्जी की सरकार राज्य के सरकारी कर्मचारियों की अपेक्षाओं को पूरा करेगी और क्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य के लोगों के कल्याण की दिशा में कुछ बडी घोषणाएं करेंगी, यह सब आपको 5 जनवरी को ही पता चलने वाला है. क्योंकि उस दिन बंगाल सरकार का अंतरिम बजट पेश किया जाना है.
5 फरवरी को राज्यपाल का अभिभाषण होगा. उसके बाद वित्त मंत्री अंतरिम बजट पेश करेंगी. विशेषज्ञों के अनुसार यह चुनावी बजट है इसलिए राज्य सरकार बजट का पिटारा खोल देगी और ऐसी लोक लुभावन घोषणाएं कर सकती हैं जिससे आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री की जीत आसान हो सके. यह बजट राज्य सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण है. इस बजट के जरिए ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी जीत की बुनियाद रख सकती हैं.
राज्य में सरकारी कर्मचारी केंद्र के कर्मचारियों के समान ही डीए भत्ते की मांग कर रहे हैं. समय-समय पर राज्य सरकार के कर्मचारियों का आंदोलन सिर उठाता रहा है. राज्य सरकार यह अच्छी तरह जानती है कि कर्मचारियों को खुश किये बगैर सत्ता की चाबी नहीं मिल सकती है. इसलिए उम्मीद की जा रही है कि राज्य सरकार उनकी महंगाई भत्ते में वृद्धि कर सकती है.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जीत की गारंटी मानी जाने वाली लोकप्रिय योजना महिला सम्मान निधि योजना है जिसे लखी भंडार नाम दिया गया है. इस योजना के तहत राज्य की महिलाओं को हर महीने ₹1000 से लेकर ₹1200 तक मिलता है. काफी समय से यह चर्चा चल रही है कि लखी भंडार की सहायता राशि में वृद्धि की जाएगी. उम्मीद की जा रही है कि राज्य सरकार लक्ष्मी भंडार की सहायता राशि में वृद्धि कर सकती है. इसकी संभावना प्रबल है.
इसके अलावा कृषि क्षेत्र में कृषक बंधु योजना और ग्रामीण सड़कों तथा आवास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त आवंटन भी बजट में देखा जा सकता है. जानकार और विशेषज्ञ मानते हैं कि अंतरिम बजट में मुख्यमंत्री रोजगार सृजन के लिए सूक्ष्म एवं लघु उद्योग, नए औद्योगिक पार्क, शिक्षा और कौशल विकास योजना पर जोर रहेगा.
जहां एक तरफ महंगाई भत्ते में वृद्धि और कल्याणकारी योजनाएं सरकार के लिए राजनीतिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण है तो वहीं बढ़ते कर्ज और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. बहर हाल 5 फरवरी को पेश होने वाला अंतरिम बजट यह तय करेगा कि सरकार किस तरह से वित्तीय संतुलन बनाए रखते हुए राज्य की जनता और कर्मचारियों की उम्मीद पर खरा उतरती है.
