यह दावा पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने किया है. सुबेंदु अधिकारी ममता बनर्जी की सरकार द्वारा पेश किए गए अंतरिम बजट पर प्रतिक्रिया दे रहे थे. कल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार ने राज्य विधानसभा में अंतरिम बजट प्रस्तुत किया था.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार द्वारा विधानसभा में पेश किए गए अंतरिम बजट की दो प्रमुख बातों की चर्चा पूरे राज्य में हो रही है. उनमें से एक लक्ष्मी भंडार के तहत महिलाओं को हर महीने दी जाने वाली सहायता राशि में ₹500 की वृद्धि और दूसरी चर्चा का केंद्र बिंदु है बांग्लार युवा साथी, जिसमें राज्य के शिक्षित बेरोजगार नौजवानों को पहली बार बेरोजगारी भत्ता के रूप में हर महीने ₹1500 दिए जाने की बात है. विपक्ष इस पर आक्रामक नजर आ रहा है. विपक्ष सरकार की मंशा पर ही सवाल उठा रहा है.
ममता बनर्जी की सरकार ने राज्य के शिक्षित बेरोजगार नौजवानों को भी बेरोजगारी भत्ता देने का फैसला किया है. विपक्ष ने सवाल उठाया है कि एक तरफ मुख्यमंत्री राज्य में बेरोजगारों को नौकरी देने की बात कहती है तो दूसरी तरफ उनके लिए बेरोजगारी भत्ता का ऐलान का मतलब क्या है. शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि यह योजना उनकी एक पुरानी योजना का नाम बदलकर पेश किया गया है. उन्होंने कहा कि जब तक यह योजना लागू होगी तब तक उनकी सरकार सत्ता में रहेगी ही नहीं.
एक तरफ तृणमूल कांग्रेस ने अंतरिम बजट को जनता का बजट बताया है तो दूसरी तरफ विपक्ष ने इसे चुनावी बजट करार दिया है. दोनों ओर से घमासान जारी है. आपको बता दें कि राज्य सरकार ने राज्य में 21 से 40 साल तक की उम्र के माध्यमिक पास शिक्षित बेरोजगार नौजवानों को हर महीने बेरोजगारी भत्ता के रूप में ₹1500 देने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि 15 अगस्त 2026 से यह योजना लागू हो जाएगी. इसके जवाब में सुबेंदु अधिकारी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि यह ममता बनर्जी सरकार का चुनावी घोषणा पत्र है.
उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा है कि अगर उनकी पार्टी की सरकार सत्ता में आती है तो पहली ही कैबिनेट बैठक में राज्य की महिलाओं को हर महीने ₹3000 देने का प्रस्ताव पास होगा और 1 जून से उनके खाते में सरकार हर महीने ₹3000 ट्रांसफर करेगी. उन्होंने ममता बनर्जी की सरकार से सवाल किया है कि गोवा में तो ₹5000 देने की बात कही गई थी. फिर बंगाल की महिलाओं के साथ यह भेदभाव क्यों?
माकपा के नेता सुजन चक्रवर्ती ने भी यही सवाल उठाया है. उन्होंने ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह बजट चुनावी बजट है और वोट बैंक को बनाए रखने के लिए सरकार ने बजट प्रस्तुत किया है. उन्होंने कहा है कि राज्य की महिलाओं को मासिक भत्ता के रूप में ₹3000 से लेकर ₹4000 तक दिया जाना चाहिए. क्योंकि उनकी तरफ से गोवा में महिलाओं को ₹5000 देने की बात कही गई थी.
विपक्ष की प्रतिक्रिया के जवाब में तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा है कि हर राज्य की जनसंख्या और टैक्स स्ट्रक्चर अलग-अलग होता है. विपक्ष को इसकी कोई समझ ही नहीं है. बजट की सराहना करते हुए टीएमसी की ओर से कहा गया है कि यह जनता का बजट है. जानकार मानते हैं कि पहले टीएमसी की ओर से राज्य की जनता खासकर महिलाओं को लक्ष्मी भंडार के तहत उनकी राशि बढ़ाकर उनका वोट साधने की कोशिश की गई है, तो इसके जवाब में बीजेपी की ओर से महिलाओं को हर महीने सहायता राशि के रूप में दुगनी रकम देने की घोषणा के जरिए उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की गई है.
भाजपा नेता की इस घोषणा का प्रभाव महिलाओं पर कितना पड़ता है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा. परंतु भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की यह घोषणा सुर्खियों में जरूर है. दोनों ही पार्टियों की ओर से महिलाओं को साधने की राजनीति शुरू कर दी गई है. अब देखना होगा कि महिलाएं किस पर ज्यादा भरोसा करती हैं टीएमसी या फिर भाजपा?
