February 7, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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सिलीगुड़ी का सनसनीखेज कांड! जब नशा सर चढ़कर बोलने लगे…!

किसी भी चीज का नशा जब सर चढ़कर बोलता है तो अप्रत्याशित घटनाएं घटने लगती हैं. अगर नशा सीमित दायरे में रहे तब तक तो ठीक है, लेकिन जैसे ही यह हद पार करता है तो समाज और परिवार में असंतुलन, असंतोष और अविवेक हावी होने लगता है. और जब बात शराब के नशे की करें तो एक नशेड़ी आरंभ में शौक के लिए नशा करता है, लेकिन बाद में उसका वही शौक नशे की लत के रूप में सामने आता है. जब नशा एक लत के रूप में हावी हो जाता है तो उसे संभालना बड़ा मुश्किल होता है. नशे की लत अक्सर घर परिवार में तबाही लाती है.

यह घटना, जिसकी यहां चर्चा की जा रही है, कुछ ऐसी ही है. सिलीगुड़ी के नरेश मोड इलाके की यह घटना सुर्खियों में है. बेटे की नशे की लत ने पिता को इस मोड़ पर ला दिया, जहां उसने ना चाहते हुए भी उसे मौत के घाट उतार दिया. पिता ने पुत्र को अपनी गोद में खिलाया होगा, पढाया और उसके भविष्य को संवारने के लिए क्या-क्या उपाय नहीं किया होगा! लेकिन आज उसके हाथ अपने ही बेटे के खून से लाल हो चुके हैं!

नशे की लत व्यक्ति को अंधा बना देती है. उसका विवेक और आत्मा दोनों ही मर जाते हैं. रिश्ते नाते सब खत्म हो जाते हैं. उसे सिर्फ और सिर्फ नशे से प्यार हो जाता है और इसके लिए वह कुछ भी करने के लिए तैयार रहता है. हालांकि नशे की आदत छुडाने के लिए कहने को तो बहुत से सरकारी और गैर सरकारी नशा मुक्ति केंद्र हैं, पर यह सिर्फ दिखावे के होते हैं. नशेड़ी को इसका फायदा बहुत कम मिलता है. एक नशेड़ी व्यक्ति जिस तरह की एक पर एक हरकतें करता जाता है, वहां पिता को ना चाहते हुए भी कुछ सख्त कदम उठाना मजबूरी बन जाता है.

पुलिस और स्थानीय लोगों से जो जानकारी मिल रही है, उसके अनुसार नरेश मोड इलाके के रहने वाले नीलकंठ पाल का एक पुत्र निमाई पाल नशेड़ी था. वह पिता के चोरी चुपके नशा करने लगा था. जब नशा उसकी कमजोरी बन गया तो बाहर में चोरी छिपे किया गया नशा घर में भी कहर मचाने लगा और पारिवारिक कलह का कारण बन गया. निमाई पाल नशे का आदी बन चुका था. वह अकसर नशे में ही घर लौटता था और घर वालों से झगड़ा करता रहता था.

आरंभ में नीलकंठ पाल ने बेटे को सुधारने की भरसक चेष्टा की. इसके साथ ही उसके नशे की लत को भी छुड़ाने की उन्होंने कोशिश की. लेकिन बेटे पर उसका उल्टा ही असर पड़ा. निमाई पाल पिता को अपना दुश्मन समझने लगा. वह पिता से ही झगड़ा करने लगा. देर रात को घर में नशा करके आता और पिता से झगड़ता रहता था. पिता पुत्र के झगड़े के बीच में जो कोई भी जाता था, उससे भी उसका झगड़ा हो जाता था. धीरे-धीरे उसकी हरकत हिंसक होती चली गई. उसने अपने मां-बाप पर हाथ उठाना शुरू कर दिया. घर की इज्जत बाहर न उछले, यह सोचकर नीलकंठ पाल और उनके घर वालों ने मामले को बाहर नहीं जाने दिया.

लेकिन जब रोज-रोज घर में झगड़ा होने लगे तो पड़ोसियों को पता चल ही जाता है. गुरुवार को निमाई पाल ने नशे के लिए घर वालों से पैसे मांगे तो नीलकंठ पाल और उनकी पत्नी ने उसे पैसे देने से मना कर दिया. इस पर निमाई पाल उनसे झगड़ने लगा. दोनों पिता पुत्र के बीच झगड़ा कुछ इस कदर बढ़ गया कि दोनों ही आपस में मरने मारने पर उतारू हो गए. इसी बीच नशेडी लड़के ने अपने माता-पिता पर हमला कर दिया. अपना बचाव करते हुए पिता ने उसे जोर का धक्का देकर उसे गिरा दिया.

नीचे गिरते ही निमाई पाल के सिर में गंभीर चोट लगी. आनन फानन में उसे इलाज के लिए अस्पताल में जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव बरामद कर सिलीगुड़ी जिला अस्पताल भिजवा दिया, जहां से उसका शव पोस्टमार्टम के लिए उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया. इस बीच पुलिस ने पुत्र की हत्या के आरोप में पिता नीलकंठ पाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. पुलिस ने पूरे मामले की छानबीन शुरू कर दी है.

यह कहानी सिलीगुड़ी के उन परिवारों को नसीहत देती है जिनके घर में नशा हावी होने लगता है. अगर आपके घर में पिता या पुत्र या कोई भी व्यक्ति नशे का शिकार हो जाए तो नशे की आदत लगने से पहले ही उसे संभाल लेना जरूरी है. अन्यथा ऐसी वीभत्स घटनाओं को रोकना आसान नहीं होगा.

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