सिलीगुड़ी में जाम लगना जैसे शहर का एक अंग बन चुका है. सबसे ज्यादा जाम दार्जिलिंग मोड पर लगता है. अगर आप जाम में फंस गए तो पता नहीं कब जाम से फ्री हो सकेंगे. कभी-कभी तो घंटों जाम लग जाता है. स्थिति तब खतरनाक बन जाती है, जब जाम में एंबुलेंस फस जाती है और रोगी की सांस टंग कर रह जाती है. यहां लगने वाले जाम को दूर करने के लिए वाममोर्चा शासन काल से ही शुरू हुआ प्रयास अब तक जारी है.
आज सिलीगुड़ी शहर की आबादी बढ़ने के साथ ही यहां चलने वाले वाहनों की संख्या भी बेतहाशा बढी है. देश के दूसरी बड़े राज्यों से यहां गाडियां आती रहती है. दार्जिलिंग मोड़ से होकर ही पहाड़ व समतल के लिए गाड़ियां होकर जाती हैं. चाहे सिक्किम जाना हो या दार्जिलिंग या फिर शहर में प्रवेश करना हो, दार्जिलिंग मोड होकर ही आप गंतव्य के लिए जा सकते हैं. लेकिन यहां सुदृढ़ निर्माण योजना और ठोस आधार नहीं होने से अब तक जाम को दूर करने के लिए ट्रैफिक पर ही निर्भर रहना पड़ा है.
समस्या के ठोस समाधान के लिए यहां के सांसदों ने केंद्र से गुहार लगाई. इसमें दार्जिलिंग के भाजपा सांसद राजू बिष्ट का सबसे बड़ा योगदान रहा है. इसी का परिणाम है कि अब यहां रेल ओवर ब्रिज का निर्माण समेत सेवक बालासन एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण शुरू हो गया है. यह केंद्र सरकार की योजना है, जिसको 2027 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. जुलाई 2025 में ही लगभग 55% काम पूरा हो चुका था. केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने इसका संकेत भी दिया था. संपूर्ण परियोजना की लागत 1000 करोड़ निर्धारित है.
सिलीगुड़ी का दार्जिलिंग मोड सिलीगुड़ी का प्रवेश द्वार माना जाता है. दार्जिलिंग मोड को सिलीगुड़ी का मस्तक भी कहते हैं. जैसे सर पर ताज होता है तो व्यक्ति में गौरव की अनुभूति होती है, इसी प्रकार से सिलीगुड़ी शहर का ताज दार्जिलिंग मोड है. दार्जिलिंग मोड पर जाम लगने से कहीं ना कहीं सिलीगुड़ी का सौंदर्य और गौरव भी धूमिल होता है. लेकिन अब वह दिन दूर नहीं, जब दार्जिलिंग मोड जाम मुक्त होगा और यहां जो निर्माण कार्य चल रहा है, वह पूरा होता है तो सिलीगुड़ी शहर का न केवल गौरव बढ़ेगा, बल्कि सौंदर्य भी बढ़ेगा.
सेवक बालासन एलिवेटेड कॉरिडोर की आधारशिला 2022 में ही रखी गई थी. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की और इसका कार्य शुरू हुआ और तब से निर्माण कार्य जारी है. दार्जिलिंग मोड पर जिस रेल ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है, उसका पिछले दिनों राजू विष्ट ने निरीक्षण किया था. यहां रेल ओवर ब्रिज के साथ ही एलिवेटेड रोड के पहले स्तर का निर्माण पूरा होने से बाहर से आने वाली गाड़ियों का ट्रैफिक नियंत्रण अपने आप हो जाएगा.
इसके साथ ही जो इसका दूसरा स्तर होगा, यह एलिवेटेड रोड सालूगाड़ा व सिलीगुड़ी की ओर जाने वाली गाड़ियों के परिवहन को सुगम बनाएगा. इस प्रकार से यहां दो स्तरीय एलिवेटेड रोड संरचना विकसित हो रही है. पूरी परियोजना संपन्न होने पर जो तस्वीर यहां होगी, वह दिखने में तो सुंदर होगी ही इसके साथ ही दार्जिलिंग मोड को जाम मुक्त बना देगी.
राजू बिष्ट ने इशारा किया है कि एप्रोच रोड समेत पहले स्तर वाला एलिवेटेड रोड व ब्रिज का निर्माण 45 दिन में हो जाएगा और इस तरह से लक्ष्य के अनुसार काम हुआ तो 2 महीने में ही दार्जिलिंग मोड़ की तस्वीर बदल जाएगी. शनिवार को राजू बिष्ट के दिए गए बयान के बाद सिलीगुड़ी के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि 2-3 महीने में दार्जिलिंग मोड जाम मुक्त हो जाएगा. इसका लाभ शहर में लगने वाले जाम को नियंत्रित करने में भी मिलेगा.
