ममता बनर्जी की राजनीति और रणनीति दोनों ही बेमिसाल है. चुनाव जीतने के लिए वह सभी तरह के अस्त्रों का इस्तेमाल करना बखूबी जानती है. जनता की नब्ज को भी पहचानने में माहिर मुख्यमंत्री को पता होता है कि जनता क्या चाहती है और जनता को कैसे प्रभावित किया जा सकता है. जानकार इसे ममता बनर्जी का खेला होबे मानते हैं. प्राय: हर चुनाव में ममता बनर्जी खेल होबे की रणनीति बनाती है और इसमें वह सफल भी रहती है.
विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल की जनता को भावनात्मक रूप से अपने पक्ष में करने की उनकी रणनीति काफी हद तक सफल रही है. लेकिन उनका यह अस्त्र तब काम आता है जब उनके पहले का अस्त्र बेकार जाता है. यानी चुनाव जीतने के सारे विकल्प बंद हो जाते हैं तब उनका यह अंतिम अस्त्र ब्रह्मास्त्र सिद्ध होता है. पिछले चुनाव में लोगों ने देखा भी है कि किस तरह से उन्होंने बंगाल की जनता को भावनात्मक रूप से अपने पक्ष में मोडा था. उन्होंने एक टांग पर चुनाव प्रचार करते हुए राज्य की महिलाओं को प्रभावित किया था.
इस बार ममता बनर्जी को बैठे बिठाये एक और मुद्दा मिल गया है जो बंगाल की खान-पान और संस्कृति से जुड़ा हुआ है. इस समय बिहार सरकार के द्वारा मीट मछली की बिक्री को लेकर जो घोषणा और गाइडलाइंस जारी किया गया है, उसे उन्होंने लपक लिया है और इसके जरिए वह बंगाल की जनता को आइना दिखा रही है कि अगर बीजेपी की सरकार यहां आई तो बंगाल के लोगों का खानपान बंद करा देगी.
इससे पहला राज्य में बेरोजगारी और शिक्षा को लेकर बीजेपी ने मुख्यमंत्री पर हमला किया था. बीजेपी और टीएमसी में जुबानी जंग जारी है. मार्च के पहले सप्ताह में चुनाव आयोग चुनाव की घोषणा कर सकता है. उससे पहले टीएमसी और बीजेपी के बीच एक दूसरे को पछाड़ने की रणनीति चल रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बीजेपी के उन मुद्दों को उछाल रही है, जो बंगाल की संस्कृति के अनुरूप नहीं है. ऐसे मुद्दों के जरिए ममता बनर्जी बंगाल की जनता में यह संदेश देना चाहती है कि अगर यहां भाजपा आ गई तो वह क्या-क्या कर सकती है.
इस समय बिहार का मुद्दा सुर्खियों में है. बिहार में खुले में मीट मछली बेचने वालों पर शामत आई है. बिहार सरकार ने फैसला किया है कि केवल लाइसेंस धारी दुकानदार ही मीट मछली बेच सकते हैं. मुख्यमंत्री इसको इस रूप में बंगाल की जनता के समक्ष पेश कर रही हैं कि बीजेपी ने मीट और मछली खाने पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. अगर बंगाल में उनकी सरकार आ गई तो यहां मीट मछली की दुकान बंद हो जाएगी.
ममता बनर्जी बंगाल की संस्कृति और खान-पान के जरिए भाजपा पर हमला कर रही है. वास्तव में बंगाल का परंपरागत खानपान मछली और भात है. अगर बीजेपी ने मछली की दुकान बंद करा दी तो लोग कैसे मछली खाएंगे. इसका यह अर्थ है कि बीजेपी बंगाल की संस्कृति और खानपान को नष्ट करना चाहती है. ममता बनर्जी कहती है कि क्या ऐसा बंगाल चाहिए, जहां लोग अपना परंपरागत खान-पान बंद कर दें! मीट मछली की दुकान बंद हो जाएगी तो क्या बंगाल की संस्कृति और परंपरा पर कुठाराघात नहीं होगा!
ममता बनर्जी चुनाव आयोग पर तो पहले से ही हमलावर हैं. चुनाव आयोग को वह बिन तुगलक मानती है. इसके जरिए वह भाजपा के शीर्ष नेताओं को भी भला बुरा कहने से बाज नहीं आती है. वह पूरे आत्मविश्वास के साथ कहती है कि 2026 में भाजपा की केंद्र से विदाई हो जाएगी!
