चुनाव का समय है. ऐसे में सत्ता पक्ष और विपक्ष अपनी राजनीति और रणनीति दोनों का हिसाब किताब ना रखें, ऐसा भला कैसे हो सकता है! डाबग्राम फुलवारी विधानसभा सीट से संन्यास लेने के बाद गौतम देव ने अब खुलकर सिलीगुड़ी की राजनीति शुरू कर दी है तो दूसरी तरफ विपक्ष भी उनके ही अंदाज में जवाब देने के लिए तैयार है.
गौतम देव कहते हैं कि सिलीगुड़ी का विकास केवल राज्य सरकार ने किया है. जबकि भाजपा का कहना है कि केंद्र सरकार ने ही सिलीगुड़ी का विकास किया है. अगर सिलीगुड़ी इतना महत्वपूर्ण नहीं होता तो भाजपा क्या हजारों करोड़ विकास की परियोजनाएं यहां लाती! क्योंकि भाजपा ने सिलीगुड़ी को महत्वपूर्ण माना है, यही कारण है कि केंद्र सरकार ने सिलीगुड़ी के विकास पर इतना खर्च किया है और कर रही है.
उत्तर पूर्व भारत का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला सिलीगुड़ी शहर भारत-नेपाल, भारत-बांग्लादेश और भारत -भूटान की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से घिरा हुआ है. सामरिक दृष्टिकोण से भी सिलीगुड़ी शहर का काफी महत्व है. चिकन नेक सिलीगुड़ी की सबसे बड़ी विशेषता है. चिकन नेक सात राज्यों को जोड़ता है. इस कारण से भी सिलीगुड़ी काफी महत्वपूर्ण शहर है. राज्य और केंद्र दोनों को ही इसके महत्व का पता है.
राज्य के साथ-साथ केंद्र सरकार ने भी सिलीगुड़ी के इंपॉर्टेंस को स्वीकार किया है. सवाल यह है कि अगर सिलीगुड़ी इतना ही महत्वपूर्ण शहर है तो उसे अब तक नेशनल सिटी ऑफ इंपॉर्टेंस का दर्जा क्यों नहीं दिया गया? सिलीगुड़ी को सिटी ऑफ डाइवर्सिटी का दर्जा क्यों नहीं दिया गया? यह सवाल सिलीगुड़ी नगर निगम और तृणमूल शासित बोर्ड ने उठाया है और अपनी पुरानी मांगों को केंद्र के समक्ष दोहराया है.
सिलीगुड़ी शहर को नेशनल सिटी ऑफ इंपॉर्टेंस का दर्जा देने की मांग तृणमूल शासित बोर्ड के द्वारा पिछले बजट के दौरान ही की गई थी. लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. यह आरोप सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर गौतम देव ने लगाया है. तृणमूल शासित बोर्ड का कहना है कि केंद्र सरकार ने नगर निगम द्वारा पारित प्रस्ताव को अब तक हरी झंडी नहीं दी है. इसलिए उन्होंने 2026-27 के बजट में भी यह प्रस्ताव केंद्र के पास भेजा है.
गौतम देव कहते हैं कि जब तक केंद्र द्वारा सिलीगुड़ी को नेशनल सिटी of इंपॉर्टेंस का दर्ज नहीं दे दिया जाता तब तक उनके द्वारा यह मांग उठाई जाती रहेगी. अब कुछ ही दिनों में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा चुनाव आयोग के द्वारा की जाने वाली है और यह लगभग यह तय हो चुका है कि गौतम देव ही सिलीगुड़ी विधानसभा से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार होंगे.
पिछले दिनों गौतम देव ने डाबग्राम फुलवारी विधानसभा सीट से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था. उसके बाद जानकार मानते हैं कि सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से ही वह तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी होंगे. ऐसे में उनके द्वारा सिलीगुड़ी शहर को लेकर उठाई जाने वाली मांग चुनावी रणनीति का एक हिस्सा है. उनकी इस मांग और इस पर की जाने वाली राजनीति को लेकर सिलीगुड़ी नगर निगम में विपक्ष के नेता अमित जैन ने कटाक्ष किया है.
अमित जैन ने कहा है कि गौतम देव किस मुंह से यह बात बोल रहे हैं. केंद्र की भाजपा सरकार ने सिलीगुड़ी के सार्वभौमिक विकास के लिए हजारों करोड़ की परियोजनाएं दी है. इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग, रिंग रोड, एनजेपी रेलवे स्टेशन को विश्व स्तरीय स्टेशन का दर्जा दिया जाना, सिलीगुड़ी बनारस बुलेट ट्रेन परियोजना समेत यहां सड़कों का जाल बिछाया जाना केवल केंद्र के कारण ही संभव हुआ है. क्या गौतम देव को यह नहीं दिखता है!
जो भी हो, सिलीगुड़ी को नेशनल सिटी का इंर्पोटेंस का दर्जा दिए जाने की तृणमूल कांग्रेस शासित बोर्ड की मांग चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का कितना भला कर पाएगी, यह देखना होगा! यह भी फैसला हो जाएगा कि सिलीगुड़ी के विकास और उन्नति के लिए TMC और भाजपा में से किसकी कितनी भूमिका है, सिलीगुड़ी की जनता वोट के जरिए फैसला कर देगी
