खाड़ी युद्ध से अब क्या-क्या दिन देखने को मिलेंगे! डीजल और पेट्रोल अभी तक तो मिल रहा है, लेकिन एलपीजी का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है. ऊपर से पेट्रोलियम मंत्रालय ने अचानक वितरकों को जो नया निर्देश जारी किया है, उसने तो इस संकट को और बढ़ा दिया है. नॉर्थ बंगाल और सिक्किम के एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के सचिव कौशिक सरकार भी मानते हैं कि सरकार का नया निर्देश व्यापारियों और उपभोक्ताओं की मुसीबत और बढ़ाने वाला है.
दरअसल पेट्रोलियम मंत्रालय के नए निर्देश में कहा गया है कि गैस वितरक एजेंसियां व्यावसायिक उपयोग के लिए गैस सिलेंडर की आपूर्ति नहीं कर सकती. यानी दूसरे शब्दों में कहे तो व्यावसायिक उपयोग के लिए गैस सिलेंडर की आपूर्ति अब वितरक के माध्यम से नहीं होने वाली है. इसका मतलब यह है कि होटल और रेस्टोरेंट उद्योग में ताला लग सकता है. सरकार का यह फैसला गैस वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावित करने वाली है. समय पर सिलेंडर का वितरण कठिन हो जाएगा.
सिलीगुड़ी से लेकर पहाड़ तक धीरे-धीरे गैस संकट सुरसा के मुख की तरह बढ़ता जा रहा है. मोबाइल पर गैस की बुकिंग और अगले दिन डिलीवरी मैन आपके द्वार पर सिलेंडर लेकर पहुंच जाता था. वर्तमान में तो बुकिंग भी नहीं हो रही है. गैस सिलेंडर की तो बात ही मत करिए. सिलीगुड़ी से लेकर पहाड़ तक गैस एजेंसियों के गोदाम के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी लाइनें यह इशारा कर रही है कि आने वाले समय में संकट का तूफान दस्तक देने वाला है.
दार्जिलिंग होटलियर एसो. के सचिव R. लामा ने बताया कि दार्जिलिंग इलाके में एलपीजी का संकट पर्यटन उद्योग को तबाह कर रहा है. उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम मंत्रालय का नया निर्देश ऐसा है कि होटल और रेस्टोरेंट का शटर डाउन करने के अलावा अन्य कोई रास्ता नहीं बचा है. उन्होंने बताया कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के लिए कोई भी नया आवेदन स्वीकार नहीं हो रहा है. जब पहाड़ पर्यटकों को सुबह का नाश्ता भी नहीं दे सके तो ऐसे में आप स्थिति की गंभीरता को आसानी से समझ सकते हैं.
हालत लगातार खराब होती जा रही है. होटल, रेस्टोरेंट चलाने वाले व्यापारी की तो चिंता अपनी जगह है ही. सबसे बड़ी चिंता आपकी रसोई घर की है. गैस खत्म होने पर क्या फिर से लकड़ी का चूल्हा जलाना होगा? जैसे लोग एक दूसरे से सवाल कर रहे हैं. लेकिन जवाब तो केंद्र सरकार के पास भी नहीं है. खाड़ी युद्ध कब खत्म होगा, किसी को पता नहीं है. केंद्र सरकार ने एलपीजी को लेकर आवश्यक वस्तु अधिनियम जरूर लागू कर दिया है. लेकिन गैस आपूर्ति श्रृंखला ही टूट जाए तो आप क्या कहेंगे! जब गैस गोदाम में आएगी तभी तो आपको मिलेगी!
सिलीगुड़ी से लेकर कोलकाता और दार्जिलिंग से लेकर सिक्किम तक छोटे,मंझोले होटल और रेस्टोरेंट तक गैस संकट साफ दिख रहा है. नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया की कोलकाता शाखा के प्रमुख पियूष कांकरिया के अनुसार इस समय कोलकाता महानगर में लगभग 5000 रेस्टोरेंट हैं. इनमें लगभग 40% यानी लगभग 2000 रेस्टोरेंट ने साफ संकेत दिया है कि कभी भी यहां ताला लग सकता है. जबकि 30 से 40% रेस्टोरेंट ने कहा है कि वे कुछ और दिनों तक परिचालन की स्थिति में है. इ
इस बीच कोलकाता में तेल और सीएनजी भरवाने के लिए पेट्रोल पंप पर गाड़ियों की लंबी-लंबी लाइनें लगी है. यहां अचानक ही ₹5 प्रति लीटर पेट्रोल महंगा हो गया है. अधिकारी भी यही मान रहे हैं कि कुछ ही समय पहले पुराने दाम पर ही पेट्रोल मिल रहा था.लेकिन जब नया सर्कुलर जारी हुआ तो अचानक ही दाम बढ़ा दिए गए. इसका मतलब यह है कि पेट्रोल की आपूर्ति कम होती जा रही है.
सिलीगुड़ी और पहाड़ में भी बुरा हाल है. स्टॉल और ढाबा चलाने वाले सबसे ज्यादा परेशान हैं. एक तो एलपीजी की कीमत बढ़ गयी है, ऊपर से गैस की भी आपूर्ति नहीं हो रही है. एक स्टॉल चलाने वाले दुकानदार ने बताया कि मजबूरन उन्हें दुकान बंद करनी पड़ सकती है. सिक्किम और दार्जिलिंग में पर्यटन भी प्रभावित हुआ है. पर्यटकों के लिए खाना और आतिथ्य सत्कार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. अनिश्चितता की स्थिति में विदेशी पर्यटकों की बुकिंग रद्द हो रही है. इन पहाड़ी इलाकों में खाद्य कीमतों की महंगाई भी एक ज्वलंत सवाल है.
पर्यटन उद्योग के सूत्रों के अनुसार हर साल यूरोप के विभिन्न देशों से लगभग 50000 विदेशी पर्यटक दार्जिलिंग और सिक्किम घूमने आते हैं. कई पर्यटक सिक्किम और दार्जिलिंग घूमने के बाद नेपाल भी जाते हैं. इन पर्यटकों का आगमन आमतौर पर दुबई या सिंगापुर के रास्ते भारत होता है. मध्य पूर्व में युद्ध ने पूरी तस्वीर बदल दी है. फ्रांस, इंग्लैंड, जर्मनी आदि देशों से कुछ पर्यटक रवाना तो हुए लेकिन दुबई में फंस गए.
उन्होंने अब बुकिंग ही रद्द करा दी है और घर लौटने की कोशिश कर रहे हैं. पर्यटन उद्योग और हेल्प टूरिज्म के प्रमुख राज बसु के अनुसार फ्रांस से 17 सदस्यों का एक दल दुबई पहुंचा था. लेकिन वह रास्ते में ही फंस गए. सिक्किम और दार्जिलिंग में उन्होंने कई होटल बुक कराए थे. वे सब रद्द करने पड़े. हिमालयन हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म डेवलपमेंट नेटवर्क के अध्यक्ष सम्राट सान्याल के अनुसार अगर एलपीजी और पेट्रोलियम पदार्थो की कीमत में बढ़ोतरी होती है तो परिवहन खर्च बढ़ेगा, जिसका असर पूरे पर्यटन पैकेज पर होगा. यानी आप कह सकते हैं कि खाड़ी युद्ध से दार्जिलिंग और सिक्किम का पर्यटन भी तबाह होने वाला है.
इसी तेल संकट के बीच भारत ने बांग्लादेश को 5000 टन डीजल भेजा है, जो लोगों के गले नहीं उतर रहा है. हालांकि भारत का यह कदम भारत बांग्लादेश पाइपलाइन समझौते के अनुसार है. अब लोग तो यही सवाल करेंगे कि जब देश में पेट्रोलियम पदार्थों का इतना बड़ा संकट चल रहा हो, ऐसे में उस पड़ोसी देश की मदद करना जो हमेशा ही भारत को आंख दिखाता आ रहा है, कितना जायज है! इस समझौते को कुछ समय के लिए टाला भी जा सकता था या भारत सरकार तकनीकी कारण से इसे रोक भी सकती थी. जो भी हो, खाडी क्षेत्र से उठा तूफान भारत में पहुंचकर जनजीवन को अस्त-व्यस्त करने वाला है.
