नेपाल और बांग्लादेश से बंगाल में हथियार पहुंचने लगे हैं. सुरक्षा एजेंसियों की नींद हराम हो गई है. भारतीय खुफिया विभाग ने जिस तरह की खबर दी है, उसके बाद सुरक्षा और प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है. चिकन नेक पर खतरा मंडरा रहा है. एजेंसियों से मिली गोपनीय रिपोर्ट के बाद चिकन नेक की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पिछले दिनों भारत नेपाल सीमा पर SSB के जवानों ने एक बांग्लादेशी को गिरफ्तार किया था, जब वह नेपाल से भारत में प्रवेश कर रहा था.
बंगाल चुनाव से ठीक पहले जहां विभिन्न राजनीतिक दलों के द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा कर दी गई है और प्रत्याशी चुनाव प्रचार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नेपाल से लूटे गए हथियार बंगाल के विभिन्न जिलों तक पहुंचने और बांग्लादेश से हथियार ले जाने की आशंका के चलते सुरक्षा एजेंसियों की नींद हराम हो गई है. क्या बंगाल चुनाव में रक्तपात का इतिहास दोहराया जाएगा? आखिर नेपाल और बांग्लादेश से बंगाल में हथियार कैसे लाए जा रहे हैं? उन्हें कौन ले जा रहा है? कौन मंगा रहा है? इसके पीछे उनकी मंशा क्या है? इत्यादि बहुत सी बातों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है. सुरक्षा एजेंसियां पड़ताल करने में जुट गई हैं.
खुफिया रिपोर्ट बताती है कि बिहार, नेपाल और बांग्लादेश से हथियार मंगाए जा रहे हैं. दक्षिण बंगाल के कुछ जिलों में कुछ समय पहले अवैध हथियारों का जखीरा भी पकड़ा गया था. तभी से प्रशासन अलर्ट है. खुफिया सूत्रों ने जानकारी दी है कि बंगाल में 9 एमएम पिस्टल, कारबाईन और ए के 47 जैसे हथियार तस्करी के जरिए बंगाल के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाए जा रहे हैं. यह बंगाल में शांतिपूर्ण चुनाव के लिए खतरा है.
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नेपाल में पिछले साल हिंसक प्रदर्शनों के दौरान कई थानों में लूटपाट और आगजनी हुई थी. इसके बाद यह हथियार बिहार के किशनगंज के तस्करों तक पहुंचे तथा दक्षिण बंगाल के अपराधी नेटवर्क में फैल गए. बीरभूम जिले में अधिक हथियार के पहुंचने की बात कही जा रही है. बंगाल पुलिस और एसटीएफ ने हाल ही में छापेमारी कर कुछ हथियार बरामद किए थे, जिनमें नेपाल के सरकारी शस्त्रागार में बने हथियार शामिल है.
पिछले दिनों पुलिस ने एक महिला और एक दिव्यांग युवक को अवैध तथा खतरनाक हथियारों के साथ गिरफ्तार किया था. उनके पास से कारबाईन और पिस्तौल बरामद हुई थी. यह लोग नेपाल के बताए जा रहे हैं. जांच में सामने आया है कि पिछले 5 वर्षों में मुंगेर और भागलपुर से बने हजारों हथियार राज्य में खपाए जा चुके हैं. बंगाल पुलिस अब तक ढाई से 3000 हथियार जब्त कर चुकी है. और कई तस्करों को गिरफ्तार भी किया गया है.
प्रारंभिक जांच और विभिन्न सूत्रों से पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में बहुत से आपराधिक गिरोह को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है. इसके कारण ही सुरक्षा एजेंसियों और राज्य पुलिस को असली अपराधी तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है. ऊपरी दबाव और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बंगाल पुलिस, एसटीएफ और सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारियों की एक संयुक्त टीम बनाई गई है जो हथियारों की बरामदगी और तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए व्यापक अभियान चला रही है.
यह संयुक्त टीम सड़क, रेल और सीमा से आने वाले नए लोगों पर नजर रख रही है. वाहनों की चेकिंग बढ़ाई गई है. गया और जमालपुर पैसेंजर जैसी रेल गाड़ियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. आमतौर पर इनका उपयोग तस्करी के लिए किया जाता है. रिपोर्ट बताती है कि बंगाल में लगभग 1500 एजेंट इस अवैध कारोबार में सक्रिय हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है.
