नेपाल में राजा और रंक के बच्चे एक ही स्कूल में पढेंगे? उनके बीच कोई भेदभाव नहीं होगा? उन्हें इसके लिए कोई फीस नहीं देनी होगी? अमीर गरीब सभी बच्चे सामान्य रूप से शिक्षा प्राप्त करेंगे? किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा? ये शब्द या वाक्य किताबों अथवा लेख में या फिर सिनेमा के पर्दों पर डायलॉग के रूप में सुनने में अच्छे लगते हैं. पर क्या वास्तव में भी इस तिलिस्म को हकीकत का जामा पहनाया जा सकता है?
अगर वायरल खबर में सच्चाई है, तो यह अनोखा अजीबोगरीब कारनामा कर दिखाया है नेपाल ने, जिसको लेकर दावा किया जा रहा है कि यह शिक्षा व्यवस्था में एक नई क्रांति लाएगा. सत्ता में आते ही बालेन शाह की सरकार ने इस तरह के कई चौंकाने वाले फैसले किए हैं. इससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी है.
शायद नेपाल दुनिया का पहला राष्ट्र होगा, जहां देश में एक भी निजी स्कूल नहीं होगा. आज के जमाने में भारत समेत दुनिया के छोटे बड़े देशों में सरकारी कम और गैर सरकारी संस्थान ज्यादा चल रहे हैं और उन पर लोगों का भरोसा बढा है, वहीं नेपाल में बालेन शाह सरकार ने अपने फैसले के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि नेपाल में सरकारी संस्थान गरीब अमीर दोनों वर्ग के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण होंगे.
खासकर शिक्षा सुधार के मामले में नेपाल की नई सरकार ने विशेष ध्यान दिया है. सोशल मीडिया पर कथित रूप से बालेन शाह का यह नया फैसला तेजी से वायरल हो रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट के अनुसार नेपाल की बालेन शाह की सरकार ने देश में चल रहे सभी निजी स्कूलों को पूरी तरह से बंद करने का फैसला किया है.
दावा किया जा रहा है कि अब नेपाल के सभी बच्चों को सरकारी स्कूल में ही पढ़ना होगा. आलीशान भवन में रहने वाला एक अमीर वर्ग का बच्चा और झोपड़ी में रहने वाला एक गरीब बच्चा समान सरकारी स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे. सभी बच्चों को सरकारी स्कूलों में जाना होगा. इस तरह की कई बातें सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रही है. हालांकि इन खबरों में सच्चाई क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है और ना ही नेपाल सरकार के किसी अधिकारी का कोई बयान सामने आया है.
सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही इस पोस्ट पर लोगों का भरोसा इसलिए बढा है कि पूर्व में नेपाल की बालेन शाह सरकार ने ऐसे कई फैसले लागू किए हैं जो अब तक नेपाल में किसी भी सरकार ने यह साहस नहीं कर दिखाया. जैसे नेपाल की सत्ता में आते ही बालेन शाह ने नेपाल में छात्र राजनीति पर प्रतिबंध लगा दिया.
उन्होंने पांचवी कक्षा तक की परीक्षाओं को समाप्त कर दिया. इसके साथ ही देश में कोचिंग सेंटर को बंद करवा दिया. यह सब इसलिए किए गए कि नेपाल में शिक्षा में व्यापक सुधार हो और खासकर सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में आशा जनक सुधार बढ़े.
सोशल मीडिया में फैलाई जा रही इस खबर को आधार मानकर खबर समय ने भी यह खबर आप तक पहुंचाई है. इस खबर की सच्चाई की हम पुष्टि नहीं करते हैं. लेकिन अगर ऐसा है तो निश्चित रूप से नेपाल की सरकार और प्रधानमंत्री बालेन शाह का यह फैसला ऐतिहासिक और नेपाल के छात्रों के हित में होगा.
इस खबर को लेकर कुछ लोगों का दावा है कि यह खबर पूरी तरह से सच नहीं है कि नेपाल में सभी निजी स्कूलों पर ताला लगेगा. पर यह सच है कि नेपाल सरकार सरकारी शिक्षा में व्यापक सुधार लाना चाहती है.
