बंगाल की भाजपा सरकार ने बंगाल में नए पांच जिलों की घोषणा कर दी है. लेकिन उनमें सिलीगुड़ी का कोई स्थान नहीं है. जबकि उम्मीद की जा रही थी कि पश्चिम बंगाल सरकार सिलीगुड़ी को लेकर एक बड़ी घोषणा कर सकती है. पर सिलीगुड़ी वासियों को जरूर निराश होना पड़ा है.
सिलीगुड़ी को जिला बनाने की मांग कोई नई नहीं है. काफी समय से यह मांग उठाई जा रही है. जब राज्य में टीएमसी की सरकार थी, तब भी यह मांग उठाई गई थी. बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आश्वासन भी दिया था. जब राज्य में भाजपा की सरकार बनी तब यहां के लोगों की उम्मीद बढ़ गई. खुद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी कहा था कि दार्जिलिंग जिला और सिलीगुड़ी के लोगों ने भाजपा का वर्षों से साथ दिया है.
उनके संकेत से लगा कि सिलीगुड़ी को बजट में कोई बड़ा उपहार मिल सकता है. जब राज्य सरकार ने पश्चिम बंगाल में 5 नए जिले बनाने की घोषणा की, तो इसी के साथ लोगों की उत्सुकता भी बढ़ गई कि क्या उन पांच जिलों में सिलीगुड़ी भी एक जिला होगा? राज्य सरकार ने कोलकाता, बशीरहाट, सुंदरबन, जंगीपुर तथा आरामबाग को राज्य के नए जिले के रूप में स्थान दिया है.जबकि कांथी में एक नया पुलिस जिला बनाने की घोषणा की है.
उपरोक्त नए जिलों की पृष्ठभूमि का अध्ययन करें तो जिन पांच नए जिलों को घोषित किया गया है, वहां काफी समय से यह मांग की जा रही थी. इसके अलावा इन सभी इलाकों के लोग विकास और सरकारी सुविधाओं से वंचित थे. जानकर भी मानते है कि इन नए जिलों की जनसंख्या से लेकर क्षेत्रफल और मुख्यालय सभी मानदंडों पर ये नए जिले की क्षमता रखते हैं. यही कारण है कि सरकार ने उन्हें जिला बनाया है.
जबकि दूसरी ओर सिलीगुड़ी को जिला का स्वरूप लेने के लिए कुछ नए तकनीकी मानदंडो को पूरे करने होंगे. इस पर अभी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है या फिर इस पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. लेकिन अगर व्यावहारिक रूप से देखा जाए तो सिलीगुड़ी को जिला बनाना वक्त की जरूरत है. सिलीगुड़ी की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है. आबादी बढ़ने के साथ ही भवनों का विस्तार हो रहा है.
सिलीगुड़ी के अंदर जलपाईगुड़ी जिले के कई इलाके ऐसे हैं जो सिलीगुड़ी नगर निगम के अंतर्गत आते हैं. लेकिन कानूनी अथवा प्रशासनिक कार्यों के लिए इन इलाकों के लोगों को जलपाईगुड़ी जाना पड़ता है, जो समय और पैसे के हिसाब से काफी महंगा पड़ता है. लोग सवाल भी करते हैं कि रहते तो वे सिलीगुड़ी में, फिर प्रशासनिक कार्यों के लिए जलपाईगुड़ी क्यों जाएं? आम जनता को काफी असुविधा होती है. इससे प्रशासनिक व्यय भी बढ़ जाता है.
अगर सिलीगुड़ी को जिला बनाया जाता है,तो सिलीगुड़ी के अंदर जलपाईगुड़ी के रहने वाले लोगों को सिलीगुड़ी में ही प्रशासनिक मुख्यालय से लेकर कानूनी मामलों को निपटाने के लिए कोर्ट कचहरी और सिलीगुड़ी महकमा दफ्तर भी उपलब्ध हो जाता. इससे यहां के लोगों को अनावश्यक रूप से सिलीगुड़ी से जलपाईगुड़ी आने जाने में होने वाली भाग दौड़ से निजात मिल जाती. इससे समय और पैसा दोनों की भी बचत होती.
उम्मीद की जानी चाहिए कि बंगाल सरकार यहां के लोगों की परेशानियों पर विचार करेगी और अगली सूची में सिलीगुड़ी को शामिल करेगी. सुवेंद अधिकारी की सरकार ने राज्य में कुछ नई नगर पालिकाओं के लिए भी हरी झंडी दे दी है. कुछ नए उपमंडल और प्रशासनिक केंद्र भी बनेंगे, जो प्रशासनिक कार्यों में लोगों को सहायता देंगे. वित्त मंत्री स्वप्न दास गुप्ता के बजट में प्रशासन के विकेंद्रीकरण के उद्देश्य से कई नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन की घोषणा की गई है, जो स्वागत योग्य है. सिलीगुड़ी के निकट शिव मंदिर और जलपाईगुड़ी में गाजोल की तकदीर के बंद दरवाजे खुल गए हैं.
