जिस तरह से हाल के दिनों मे बंगाल और पूरे भारत से बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजा गया है, उसमें मुखर भूमिका पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुबेंदु अधिकारी की भी है. जिन्होंने बंगाल की सत्ता संभालते ही इस दिशा में शासन अधिकारियों को निर्देश दे दिए और उनके निर्देशों का फौरी तौर पर पालन भी किया जाने लगा.
शुभेंदु अधिकारी इससे पहले भी बांग्लादेश को उसकी औकात दिखा चुके हैं. उन्होंने बांग्लादेश के संदर्भ में पहले भी कई बयान दिए हैं. लेकिन अब उनका बयान और बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजने के लिए किया गया प्रयास बांग्लादेश की चिंता और परेशानी बढ़ा रहा है. बांग्लादेश ने भारत सरकार से मांग की है कि सुवेंदु अधिकारी को स॔यम से बयान देने के लिए कहा जाए.
मजे की बात तो यह है कि बांग्लादेश की संसद में यह मुद्दा उठा है. बांग्लादेश की संसद में 2026 27 वित्तीय वर्ष की बजट चर्चा पर यह बयान बीएनपी के सांसद सिराज का है. उन्होंने संसद की कार्यवाही के दौरान स्पीकर से मांग की है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को बांग्लादेश-भारत की दोस्ती के खिलाफ उकसाने वाले बयानों को रोका जाए. उन्होंने अपने स्पीकर के जरिए भारत सरकार से यह मांग की है.
लेकिन लगे हाथों उन्होंने यह भी कहा है कि अब बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार नहीं है. यानी वह बताना चाहते हैं कि बांग्लादेश अब डरने वाला नहीं है. एक तरह से यह उनकी धमकी भी है. खुद भड़काऊ बयान देकर सुबेंदु अधिकारी को नसीहत देना चाहते हैं कि वह संयम में रहें. पहले नसीहत देने वाले को अपने गिरेबान में झांक लेना चाहिए. एक तरफ तो भारत और बांग्लादेश की राजनीति और दोस्ती की बात की जाती है, तो दूसरी तरफ अपने बयानों से भारत को धमकाना भी चाहते हैं.
वास्तव में बांग्लादेश में बंगाल से घुसपैठियों को वापस भेजने के बाद खलबली मच गई है. बांग्लादेश खुद अपने लोगों को रखना नहीं चाहता है. बांग्लादेश की हालत ऐसी हो गई है कि वह अपने ही लोगों के भरण पोषण और नौकरी रोजगार की जिम्मेदारी उठाने की स्थिति में नहीं है. कई मौकों पर यह संकेत भी सामने आया है. बीएनपी सांसद GM सिराज की जुबान पर यह बात भी आ गई कि भारत बांग्लादेशी घुसपैठियों को जबरन वापस भेज रहा है. हालांकि इसमें कुछ भी सच्चाई नहीं है. बांग्लादेशी घुसपैठिए खुद ही बंगाल छोड़कर अपने वतन लौट रहे हैं.
भारत के पास इसके प्रमाण भी है. अगर घुसपैठिए बांग्लादेश के हैं, तो भारत उन्हें बांग्लादेश भेजकर क्या गलत कर रहा है. ऐसे में बांग्लादेश को भारत का अहसान मानना चाहिए. भारत ने हर बांग्लादेशी को सम्मान के साथ भेजा है. बांग्लादेश को चाहिए कि वह अपने लोगों का स्वागत करे, ना कि इसके बजाय वह भारत पर अपनी भड़ास निकाले. भारत में ऐसे बचकाने बयान की कोई जगह नहीं है.
अगर बांग्लादेश भारत से दोस्ती करना चाहता है तो उसे खुले दिल से भारत की शरण में आना चाहिए. जैसा कि शेख हसीना ने इस विदेश नीति पर काम किया था. GM सिराज को शेख हसीना से कुछ सीखना चाहिए. बताते चलें कि बंगाल समेत देश के सभी हिस्सों से अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ भारत सरकार कार्रवाई कर रही है. उन्हें वापस बांग्लादेश भेजा जा रहा है. इसे लेकर बांग्लादेश काफी परेशान और चिंतित है और शुभेंदु अधिकारी तथा भारत सरकार पर अपनी भड़ास निकाल रहा है.
