सिलीगुड़ी समेत पूरे बंगाल में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है. सिलीगुड़ी में अलग-अलग ट्रैफिक गार्ड के द्वारा सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है. जलपाई मोड, भक्ति नगर, हिल कार्ट रोड, सिलीगुड़ी जंक्शन इलाके, चंपासारी और शहर के सभी भागों में ट्रैफिक पुलिस के विभिन्न गार्डों के द्वारा सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है. इसके जरिए ट्रैफिक पुलिस की ओर से रोड सेफ्टी, सुरक्षित वाहन चालन और ट्रैफिक नियमों के पालन पर जोर दिया जा रहा है.
यह कैसी विडंबना है कि एक तरफ सिलीगुड़ी समेत पूरे बंगाल में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ आज ही फूलबारी में सड़क दुर्घटना हो गई, जिसमें चार कारों की आपस में टक्कर हो गयी. हादसे में चार लोग घायल हुए हैं. गनीमत है कि किसी की जान नहीं गयी है. घटना के बारे में बताया जाता है कि एक कार को बचाने के चक्कर में घटना घटी. खैर, मूल बातों पर लौटते हैं.
आपको याद होगा कि कुछ दिन पहले पर्यटन मंत्री और सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष ने सिलीगुड़ी में सड़क सुरक्षा सप्ताह का उद्घाटन करते हुए कहा था कि नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति नहीं होगी. एक मंत्री के नाते शंकर घोष का यह बयान जरूरी था. परंतु इसका सच क्या है? सिलीगुड़ी के लोगों से छिपा नहीं है. क्या नाबालिग बच्चे स्कूटी, स्कूटर या बाइक नहीं चला रहे हैं?
ऐसे बच्चे न केवल टू व्हीलर चला रहे हैं बल्कि बाइक या स्कूटर पर उनका स्टंट भी देख सकते हैं.सिलीगुड़ी के जलपाई मोड इलाके में बर्दवान रोड पर रात्रि 10 बजे के बाद बाइक पर नाबालिग बच्चों का स्टंट देखकर आप दंग रह जाएंगे. 9:00 के बाद ट्रैफिक पुलिस अपनी ड्यूटी करके चली जाती है. उसके बाद सड़कों पर या तो यमराज या फिर ऐसे शरारती बच्चों का राज रहता है.वे बाइक पर स्टंट करते देखे जा सकते हैं.
दिन में भी स्कूल- कॉलेज के समय तो इन बच्चों को बाइक चलाते पुलिस भी देखती है. लेकिन ट्रैफिक पुलिस जैसे अपनी आंख मूंद लेती है. स्कूल के आसपास सड़क पर दिन में ही कुछ बच्चों को स्कूटी पर खड़े होकर तो कभी हैंडल से हाथ हटाकर पूरी स्पीड में गाड़ी चलाते देख सकते हैं. उनके साथ कभी भी दुर्घटना हो सकती है. बच्चे ही क्यों, कुछ बड़े भी ट्रैफिक नियमों का ठीक तरह से पालन नहीं कर पाते. यह देखना हो तो रात के समय सिलीगुड़ी की सड़कों पर जब ट्रैफिक पुलिस नहीं होती, देख सकते हैं कि वे किस तरह से ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं.
ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने में सबसे ज्यादा बदनाम ट्रक वाले, टाटा 407 या माल ढुलाई करने वाले मझौले वाहन, टोटो वाले, रिक्शे चालक आदि हैं. आम आदमी भी कुछ कम नहीं है जो यह समझता है कि उस पर कोई भी ट्रैफिक नियम लागू नहीं होता है. यह सच भी है. लेकिन उससे भी बड़ा सच यह है कि उसकी जान को हमेशा खतरा रहता है. कई बार लोग शराब पीकर वाहन चलाते हैं कई बार स्कूली वाहन चालक भी शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए पकड़े भी गए हैं भी चर्चा पालनपुर सड़क सुरक्षा सप्ताह का संदेश इन बच्चों के लिए भी होना चाहिए, जो अपनी जान जोखिम में डालकर गाड़ी चलाते हैं.
सिलीगुड़ी में सड़क दुर्घटनाएं अक्सर देखी जाती हैं. ऐसे मामलों में पुलिस कागजी कार्रवाई करती है. थाना, कोर्ट और जेल के बाद सब कुछ पहले की तरह ही हो जाता है. पिछले 1 साल में सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों की तादाद दर्जनों में है. ऐसे बच्चों तथा बड़ों को ट्रैफिक नियमों या रोड सेफ्टी का संदेश महज कागजी नहीं होना चाहिए. ना ही यह खानापूरी के लिए होना चाहिए.
प्रत्येक साल सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता है. रोड सेफ्टी नियमों के पालन का संदेश दिया जाता है और इसके बाद सब कुछ पहले की तरह ही चलने लगता है.अगर ट्रैफिक नियमों तथा रोड सेफ्टी के संदेश को व्यावहारिक रूप से देने की जरूरत महसूस की गयी होती, तो आज सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में सड़क दुर्घटनाओं की इतनी बड़ी तादाद नहीं दिखाई देती. अगर सड़क सुरक्षा सप्ताह को मनाना है या जनता को संदेश देना है, तो उसे व्यावहारिक रूप में ही दिया जाना चाहिए. जैसे कि इन दिनों वर्धमान जिले मे॔ ट्रैफिक पुलिस की ओर से दिया जा रहा है.
वर्धमान जिले में खासकर पूर्वी वर्धमान जिले में पुलिस ने सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए एक अनोखी पहल की है. यमराज बनकर कलाकारों और पुलिस ने नुक्कड़ नाटक तथा जनता जागरुकता रैली के माध्यम से लोगों को यातायात नियमों के प्रति सचेत किया है. वहां के कई थाना क्षेत्रों में स्पीड थ्रिल्स बट kills.
अर्थात रफ्तार रोमांच देती है लेकिन जान भी लेती है. इस दौरान कलाकार यमराज और चित्रगुप्त की वेशभूषा में नजर आए और संवादों के माध्यम से तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाने तथा यातायात नियमों की अनदेखी के गंभीर परिणामों को दर्शाया.
क्या सिलीगुड़ी में इस तरह की पहल नहीं की जा सकती है? यह तरीका व्यावहारिक भी है और वाहन चालकों को सतर्क भी करता है. एक संदेश देता है और यह संदेश उनके जेहन में उतर जाता है. अगर प्रशासन चाहता है कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी आए तो सिलीगुड़ी में भी कुछ इसी तरह की व्यावहारिकता के फार्मूले पर प्रशासन को विचार करना चाहिए.
