संकोष और घोलानी नदियों के दूषित जल ने महानंदा नदी के जल की स्वच्छता पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है. क्या संकोष और घोलानी जैसी नदियों का जल महानंदा तथा दूसरी सहायक नदियों के जल से संपर्क नहीं किया होगा? जब ये दोनों नदियों का पानी खतरनाक हो चुका है तो ऐसे में महानंदा, पंचनई आदि नदियों का पानी भला कैसे स्वच्छ रह सकता है! हर साल इन नदियों के घाट पर भारी संख्या में छठ पूजा का आयोजन होता है.
भूटान से आए जहरीले पानी ने अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार जिले की कुछ नदियों के जल को प्रदूषित किया है. अलीपुरद्वार जिले में बहने वाली संकोश और घोलानी नदियों का पानी विषाक्त हो चुका है. इन नदियों में बड़े पैमाने पर मछलियों की मौत हुई है. इस घटना के 7 दिन से ज्यादा हो गए, लेकिन आज भी इन नदियों का जल काला और जहरीला बना हुआ है.
ऐसे में सवाल है कि विषाक्त जल में छठ पूजा कैसे होगी! क्योंकि छठ पूजा के लिए स्वच्छ जल की आवश्यकता होती है. आमतौर पर छठ पूजा नदी के तट पर की जाती है, जहां नदी का पानी बहता हुआ स्वच्छ व निर्मल हो. संकोष और घोलानी नदियों में हर साल भारी संख्या में छठ व्रतधारी छठ व्रत करते हैं. वे नदी के पानी में उतरकर अर्घ्य देते हैं. तो क्या इस बार जहरीले पानी से ही अर्घ्य दिया जाएगा की प्रक्रिया
