दार्जिलिंग पहाड़ में क्यों काटे गए लाखों राशन कार्डधारकों के नाम? जानकर आप हैरान रह जाएंगे!
दार्जिलिंग पहाड़ में वह हुआ जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी.इससे पहले कभी नहीं हुआ. पहाड़ के लोगों का कहना है
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दार्जिलिंग पहाड़ में वह हुआ जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी.इससे पहले कभी नहीं हुआ. पहाड़ के लोगों का कहना है
अब सिलीगुड़ी समेत पूरे बंगाल में 1 सितंबर से सरकारी दफ्तरों में बांला भाषा में कामकाज को प्राथमिकता दी जाएगी. राज्य के मुख्यमंत्री
बहुत जल्द सिलीगुड़ी एक मेगा सिटी के रूप में परिवर्तित होने वाली है. जब से राज्य सरकार ने महानंदा वन्य जीव अभ्यारण्य के
बंगाल के युवा काफी समय से मांग कर रहे हैं कि उन्हें हर महीने बेरोजगारी भत्ता नहीं, बल्कि काम चाहिए. यहां इंडस्ट्री की
भारत सरकार के लिए भारत बांग्लादेश बॉर्डर तथा सिलीगुड़ी चिकन नेक सामरिक रूप से कितना महत्वपूर्ण है, यह इसी बात से पता चल
यह कैसी विडंबना है कि एक तरफ पूरे देश में महत्वपूर्ण नगरों में सिलीगुड़ी शहर शामिल हो गया है तो दूसरी तरफ बॉर्डर
युवा व्यवसायी अनवारुल की शहर के बाजार में स्टील ग्रिल की दुकान थी. वह उस समय अपनी दुकान पर स्टील ग्रील के काम
सिर्फ दो दिनों में ही एक परिवार खत्म गया. 15 जुलाई को पत्नी की हत्या हुई थी. पति ने ही पत्नी को मारकर
यूं तो सिलीगुड़ी, समतल और दार्जिलिंग के पहाड़ी इलाकों में बारिश और भूस्खलन का सिलसिला लगातार जारी है. सिलीगुड़ी में मौसम की धूप
दार्जिलिंग पहाड़ की समस्या हो या समतल की, राजनीतिक संगठनों का मसला हो, या चाय बागान के मजदूरों और श्रमिकों को उनका हक