सिलीगुड़ी के लोग 16 मार्च 2026 की रात को शायद ही भुला पाएंगे, जब चुपके से काल बनकर आया तूफान घरों, प्रतिष्ठानों, दुकानों और सार्वजनिक स्थानों में घुस गया और मिनट में ही तबाही मचा कर निकल गया. केवल 5 से 7 मिनट में ही सब कुछ खत्म हो गया. किसी के मकान की छत उड़ गई तो किसी की दुकान पेड़ के नीचे दब गई तो कहीं बरगद का विशाल पेड़ उखड़ गया तो कहीं सालों पुराना गाछ गिर गया!
सिलीगुड़ी समेत पूरे उत्तर बंगाल में क्षति इतनी ज्यादा हुई कि प्रशासनिक हड़कंप मच गया. चुनाव का समय है और उम्मीदवार जनसंपर्क में जुटे हुए हैं. जैसे ही काल बैसाखी द्वारा विनाश लीला शुरू हुई, उसके कुछ ही देर बाद टीएमसी उम्मीदवार गौतम देव के साथ ही भाजपा और दूसरे दलों के नेता लोगों का दुख दर्द बांटने पहुंच गए और जितना संभव हो सकता था, उन्होंने उनके लिए किया भी. सिलीगुड़ी में ऐसा कोई मकान या दुकान नहीं जो काल बनकर आए तूफान से प्रभावित न रहा हो!
लोगों के मुंह से स्वत: निकल जाता है कि भगवान ना करे ,अब ऐसी मुसीबत दोबारा आए! परंतु दूसरी तरफ भारतीय मौसम विभाग ने बताया है कि यह मत समझ लीजिए कि खतरा टल गया है या फिर ऐसा खतरा जल्द नहीं लौटेगा. भारतीय मौसम विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अभी यह खतरा टला नहीं है. आगामी 21 मार्च तक सिलीगुड़ी समेत पूरे बंगाल के लोगों को संभलकर रहने की जरूरत है.
यह तूफान बंगाल की खाड़ी से उठा है और इसका असर 21 मार्च तक बंगाल में देखा जा सकता है. हालांकि पिछले दो दिनों से सिलीगुड़ी में अच्छी खासी धूप भी नजर आ रही है. परंतु सिलीगुड़ी का मौसम कब बदल जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है. भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि आगामी 21 मार्च तक हल्की से लेकर मध्यम वर्षा, बिजली चमकने, तेज हवाएं, मेघ गर्जन आदि जारी रह सकते हैं.
भारतीय मौसम विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर चला जाना चाहिए. उन्हें वृक्षों के आसपास नहीं रहना चाहिए. राज्य में खासकर उत्तर बंगाल क्षेत्र में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती है. जबकि पश्चिम वर्धमान, वीरभूम, मुर्शिदाबाद और नदिया जिले में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती है.
भारतीय मौसम विभाग की चेतावनी में कहा गया है कि अचानक मौसम में बदलाव के चलते खेत में खड़ी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए किसानों को अपनी फसल की सुरक्षा के लिए उपाय करना चाहिए. इसके अलावा बिजली पोल का गिरना, पेड़ों का उखड़ना, कमजोर मकान का धराशाई होना, बिजली गिरने, आदि घटनाएं देखी जा सकती हैं. दक्षिण बंगाल से ज्यादा उत्तर बंगाल में यह खतरा मंडरा रहा है. आपको बताते चले कि यह एक अनुमान है, जो भारतीय मौसम विभाग के द्वारा जारी किया गया है.
