February 19, 2026
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SIR सुनवाई के बाद बंगाल में बढ़ सकती है केंद्रीय बलों की तैनाती, चुनाव से पहले सख्ती के संकेत

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हलचल तेज हो गई है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की सुनवाई के बाद राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती बढ़ाए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग कानून-व्यवस्था की स्थिति की बारीकी से समीक्षा कर रहा है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की जरूरत पर विचार किया जा रहा है।

राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान कई इलाकों से शिकायतें और आपत्तियां सामने आई हैं। चुनाव आयोग का मानना है कि मतदाता सूची को अंतिम रूप देने के बाद यदि किसी प्रकार का तनाव या विवाद उत्पन्न होता है, तो उसे नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम पहले से होना जरूरी है। इसी कारण आयोग ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की संभावित तैनाती की रणनीति तैयार करने का संकेत दिया है।

सूत्र बताते हैं कि आयोग मार्च के पहले सप्ताह तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर सकता है। इसके तुरंत बाद चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होने की संभावना है। ऐसे में आयोग नहीं चाहता कि किसी भी प्रकार की हिंसा, दबाव या अव्यवस्था चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करे। पिछले चुनावों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

राज्य के कई जिलों को पहले ही संवेदनशील और अति-संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इन क्षेत्रों में मतदान के दौरान केंद्रीय बलों की मौजूदगी को आवश्यक माना जा रहा है। आयोग का कहना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर विस्तृत सुरक्षा योजना तैयार की जा रही है।

राजनीतिक दलों ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी-अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि निष्पक्ष चुनाव के लिए केंद्रीय बलों की पर्याप्त तैनाती जरूरी है, जबकि सत्तारूढ़ दल का कहना है कि राज्य पुलिस स्थिति संभालने में सक्षम है। हालांकि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग को ही लेना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एसआईआर की प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर कुछ इलाकों में असंतोष की स्थिति बन सकती है। ऐसे में केंद्रीय बलों की तैनाती एक एहतियाती कदम के रूप में देखी जा रही है। आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि मतदान शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो और मतदाता बिना किसी भय के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच सुरक्षा तैयारियों को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। अब सबकी नजरें चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा और केंद्रीय बलों की तैनाती पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

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