भारतीय जनता पार्टी अपने ही गढ़ में ही हार गई है. इससे प्रदेश भाजपा के नेताओं में एक अजीब सी बेचैनी देखी जा रही है. खासकर पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी जरूर चिंतित होंगे. क्योंकि वह हो गया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी. भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली, जबकि टीएमसी ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की है.
ऐसा कैसे हो गया, भाजपा नेता और शुभेंदु अधिकारी जरूर चिंतन कर रहे होंगे. भाजपा के लिए यह शर्मनाक स्थिति है कि अपने ही घर में वह एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी. दरअसल नंदीग्राम में सहकारी चुनाव संपन्न हुआ था. नंदीग्राम शुभेंदु अधिकारी की सीट है. और यह भाजपा का गढ माना जाता है. पूर्वी मेदिनीपुर के नंदीग्राम दो ब्लॉक में हुए सहकारी समिति के चुनाव में टीएमसी के उम्मीदवारों ने भाजपा के सभी उम्मीदवारों को सभी सीटों पर बुरी तरह हराया है.
12 सीटों के चुनाव में भाजपा एक भी सीट जीत नहीं पाई है. जबकि टीएमसी का सभी सीटों पर कब्जा है. एक तरफ इस जीत से टीएमसी के नेता उत्साहित है तो दूसरी तरफ भाजपा खेमे में मायूसी छाई है. इस जीत के बाद टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी की बांछें खिल उठी है. क्योंकि उन्हें ही इस जीत का श्रेय दिया जा रहा है. उनकी रणनीति कामयाब रही है.
वास्तव में अभिषेक बनर्जी पिछले दिनों नंदीग्राम गए थे वहां उन्होंने अपनी रणनीति के तहत सेवाश्रय परियोजना का शुभारंभ किया था. टीएमसी का यह सामाजिक सेवा कार्यक्रम लोगों को काफी पसंद आया है. पूर्वी मेदिनीपुर जिला परिषद के अध्यक्ष और तृणमूल विधायक उत्तम बारिक बताते हैं कि नंदीग्राम सहकारी चुनाव के परिणाम से पता चल जाता है कि अभिषेक बनर्जी की सेवाश्रय स्कीम योजना अपना रंग दिखाना शुरू कर चुकी है. हमें पूरा विश्वास है कि अगले विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट जीतकर मुख्यमंत्री को एक उपहार देंगे.
टीएमसी की इस परियोजना के अंतर्गत ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य जांच, दवा वितरण, प्रशासनिक सेवाएं और विभिन्न सामाजिक सहायता प्रदान की जाती है. हालांकि भारतीय जनता पार्टी के जिला उपाध्यक्ष प्रलय पाल टीएमसी की इस जीत से जरा भी चिंतित नहीं है. उन्होंने अपने बयान में कहा है कि पिछले साल नंदीग्राम विधानसभा में लगभग 70 सहकारी समितियों के चुनाव हुए थे. हम लोगों ने उन सीटों में से लगभग 95% सीटें जीती हैं.
उन्होंने कहा कि अगर सहकारी चुनाव में जीत अभिषेक की सेवाश्रय परियोजना का परिणाम है तो हम तो यही कहेंगे कि अभिषेक अथवा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अगले विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़े. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. जो भी हो, विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी के पक्ष में आया परिणाम टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं के उत्साह को बढ़ाता है. इसका आने वाले विधानसभा चुनाव में असर पड़े या ना पड़े, परंतु टीएमसी के कार्यकर्ता व नेता मानसिक रूप से जरूर उत्साहित हुए हैं.

