यह जो वीडियो आप देख रहे हैं, इस वीडियो को भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक x.com पर वायरल किया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि यह शख्स जो बोल रहा है, वह टीएमसी का विधायक मनीरूल इस्लाम है. हालांकि खबर समय इस दावे की पुष्टि नहीं करता. परंतु इस वायरल पोस्ट को लेकर समाचार पत्रों और पोर्टल, न्यूज़ चैनलों पर घमासान मचा हुआ है. ऐसे में हमारा भी दायित्व है कि समाज की इन घटनाओं को आप तक पहुंचाया जाए.
वीडियो में टीएमसी विधायक मनीरूल इस्लाम कहते हैं कि चुनाव आयोग के द्वारा 19 तारीख को फाइनल वोटर लिस्ट जारी किया जाएगा. अगर सब कुछ ठीक-ठाक नहीं रहा तो चारों तरफ आग ही आग नजर आएगी. इसका अर्थ यह है कि अगर उनके हिसाब से वोटर लिस्ट तैयार नहीं हुआ तो इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा. यानी टीएमसी विधायक खुलेआम चुनाव आयोग को धमकी दे रहे हैं.
आपको बता दें कि मनीरूल इस्लाम फरक्का विधानसभा क्षेत्र के तृणमूल कांग्रेस के विधायक हैं. वे विवादित बयान के लिए जाने जाते हैं. पिछले दिनों टीएमसी विधायक को उनके समर्थकों के साथ फरक्का के ई आर ओ के ऑफिस में देखा गया था. आरोप है कि उनके समर्थकों ने मतदाता पंजीकरण अधिकारी के कक्ष में पहुंचकर तोड़फोड़ की थी और मतदाता पंजीकरण अधिकारी के कार्य में बाधा पहुंचाई थी.
समाचार पत्रों के अनुसार पिछले दिनों मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का में वोटर लिस्ट रिवीजन के दौरान भारी हंगामा हुआ था. एक साथ 200 BLO ने तनाव की स्थितियों में कार्य करते हुए सामूहिक इस्तीफा दिया था. यह खबर चर्चा का विषय बना था. टीएमसी के द्वारा पहले से ही चुनाव आयोग को धमकी दी जाती रही है. ऐसी घटनाओं को लेकर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर कहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कानून हाथ में लेने के बयान के बाद इस तरह की घटनाएं बढ़ गई है.
पिछले कुछ दिनों से SIR हियरिंग केंद्रों पर मतदाताओं का हंगामा, मारपीट, हिंसक की घटनाएं, बीडिओ ऑफिस में तोड़फोड़, आगजनी आदि देखी जा रही है. न केवल किसी एक विधानसभा क्षेत्र में बल्कि पश्चिम बंगाल के अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में यही स्थिति है. मतदाताओं के द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि चुनाव आयोग के अधिकारी उन्हें काफी परेशान कर रहे हैं.
फरक्का ई आर ओ में तोड़फोड़ की घटना को लेकर टीएमसी विधायक मनीरूल इस्लाम की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. उन्होंने कहा है कि ई आर ओ ऑफिस में तोड़फोड़ की घटना में पार्टी का कोई हाथ नहीं है. वहां पार्टी कार्यकर्ता नहीं गए थे. बल्कि मतदाताओं ने ही हंगामा किया था. क्योंकि चुनाव आयोग के अधिकारी उनके साथ सहयोग नहीं कर रहे थे.
बहरहाल यह देखना होगा कि वायरल वीडियो को लेकर चुनाव आयोग का अगला कदम क्या होता है. यह भी कि चुनाव आयोग इसे कितनी गंभीरता से लेता है. जांच के बाद वायरल वीडियो की सत्यता की भी पुष्टि हो जाने का अनुमान लगाया जा रहा है.
