February 12, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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सिलीगुड़ी शहर में आखिर ऐसा क्या हो रहा है ? सिलीगुड़ी के सद्भाव को कौन बिगाड़ रहा है? प्रशासन चुप क्यों?

What is happening in Siliguri? Who is ruining the harmony of Siliguri? Why is the administration silent?

सिलीगुड़ी के प्रणामी मंदिर रोड से सामने आए एक वीडियो ने शहर में नई बहस छेड़ दी है। इस घटना के बाद खासकर हिंदी भाषी समुदाय के बीच सवाल उठने लगे हैं—क्या किसी संगठन को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार है?

वायरल वीडियो में कथित तौर पर एक संस्था के कुछ लोग एक युवक पर गाली-गलौज का आरोप लगाते हुए उसे “बाहरी” बता रहे हैं। वीडियो में युवक और उसकी मां से माफी मांगने के लिए दबाव बनाते हुए और उन्हें धमकाते हुए भी देखा जा रहा है।
हालांकि, युवक इन आरोपों से इनकार करता नजर आ रहा है।
अब इस मामले में कौन सही है और कौन गलत—इसका अंतिम फैसला पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।

लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—
अगर विवाद दो पक्षों के बीच था, तो उसे भाषाई या क्षेत्रीय रंग देकर सार्वजनिक रूप से दबाव बनाना कितना उचित है?
और क्या ऐसे मामलों में किसी संगठन को कानून अपने हाथ में लेने की छूट है?
सोशल मीडिया पर भी लोग यही सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रशासन और पुलिस की ओर से ऐसी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

सिलीगुड़ी अपनी विविधता और सामाजिक सद्भाव के लिए जाना जाता है। यहां विभिन्न राज्यों और भाषाओं के लोग वर्षों से साथ रहकर शहर के विकास और उसकी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते आए हैं।
चाहे बिहारी हों, मारवाड़ी, नेपाली या अन्य हिंदी भाषी समुदाय—सभी ने सिलीगुड़ी की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
यह शहर हमेशा से भाईचारे और एकता की मिसाल रहा है, जहां दशहरा, ईद, दीपावली और होली जैसे सभी त्योहार मिलजुलकर मनाए जाते हैं।
लेकिन इस तरह की घटनाएं सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती हैं और लोगों के बीच अविश्वास की स्थिति पैदा कर सकती हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।
लोगों का मानना है कि प्रशासन और पुलिस का दायित्व है कि किसी भी प्रकार की दबंगई या कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति पर सख्ती से रोक लगाए।

इस पूरे मामले पर अधिवक्ता अत्रि शर्मा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि कानून अपने हाथ में लेना दंडनीय अपराध है और किसी भी विवाद का समाधान केवल कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही होना चाहिए।

अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर है।
सवाल सिर्फ एक घटना का नहीं, बल्कि सिलीगुड़ी की उस पहचान का है—जो विविधता, सहअस्तित्व और भाईचारे के लिए जानी जाती है।

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