प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बंगाल में जहां भी जनसभाएं कर रहे हैं, वहां उन्हें देखने और उनकी बात सुनने के लिए स्त्री, पुरुष और युवाओं की अच्छी खासी भीड़ उमड़ रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिलीगुड़ी के कावाखाली मैदान में चार जनसभाएं कर चुके हैं. रविवार को हुई उनकी जनसभा में भीड़ का आलम यह था कि अब तक की यहां की गई सभी जन सभाओं की भीड़ का रिकॉर्ड टूट गया. जबरदस्त भीड़ से उत्साहित प्रधानमंत्री ने हेलीकॉप्टर से उतरकर स्वयं ही भीड़ का वीडियो बनाया.
यह नजारा केवल सिलीगुड़ी का ही नहीं है, बल्कि पूरे बंगाल में उनके प्रति लोगों की दीवानगी बढी है. प्रधानमंत्री की जनसभा में महिलाएं भी पूरे उत्साह से भाग ले रही हैं. प्रधानमंत्री अपनी जनसभाओं में महिलाओं और नौजवानों को साध रहे हैं. ऐसा तो वोट के लिए सभी नेता करते हैं. प्रधानमंत्री ने सिलीगुड़ी की जनसभा में महिलाओं से कई वायदे किए. उन्होंने सभी क्षेत्र के लोगों को भरोसा देने की कोशिश की.
उन्होंने सिलीगुड़ी में कैंसर हॉस्पिटल से लेकर एम्स स्थापना तथा महिला क्रिकेटर रिचा घोष की तारीफ करते हुए खेल विश्वविद्यालय शुरू करने की भी बात कही. अगर यही बात कोई दूसरा नेता करता है तो लोग उसे चुनावी वायदे कहते हैं. परंतु एक प्रधानमंत्री के मुंह से सुनकर लोग उसे चुनावी वादा नहीं कहते. आखिर प्रधानमंत्री के प्रति लोगों का भरोसा क्यों है?
सवाल है कि प्रधानमंत्री की जनसभा में लोगों की भीड़ इस कदर क्यों उमड़ रही है? क्या सचमुच लोग प्रधानमंत्री को देखने के लिए जाते हैं या फिर उनका भाषण सुनने? नरेंद्र मोदी 2014 से प्रधानमंत्री हैं. उन्होंने बंगाल में कई रैलियां की है. लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में बंगाल का जहां-जहां दौरा कर रहे हैं, उनकी रैली में ऐतिहासिक भीड़ उमड़ रही है. शायद इसीलिए वे अपनी जनसभाओं में लगातार कहते रहे हैं कि 4 मई को राज्य में बीजेपी की सरकार बनेगी!
अध्ययन और विश्लेषणों से पता चलता है कि प्रधानमंत्री के प्रति लोगों की बढ़ती दीवानगी का एक बड़ा कारण उनकी साफ और स्पष्ट छवि है. उनकी नियत पर भी किसी ने आज तक उंगली नहीं उठाई. वे अपनी जनसभा में राष्ट्रवाद की भी बात करते हैं. उनकी जनसभा भारत माता की जय से शुरू होती है और वंदे मातरम पर खत्म होती है. उनके लिए राष्ट्र प्रथम है और राज्य इसके बाद.
नरेंद्र मोदी अपनी जनसभा में जनता के मूड को भांपने में माहिर हैं. वे अपनी जनसभा में शामिल होने आए सभी लोगों की बातें करते हैं. ऐसे में लोगों को लगता है कि उनके ही बीच का कोई नेता उनकी बात कर रहा है और यही नरेंद्र मोदी के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा रहा है. अगर प्रधानमंत्री सिलीगुड़ी की रैली में सिलीगुड़ी में एम्स स्थापना, खेल विश्वविद्यालय खोलने, कैंसर अस्पताल की स्थापना, हर महिला को महीने में ₹3000 की आर्थिक सहायता देने जैसी बातें करते हैं तो लोगों का उनकी बातों पर भरोसा हो जाता है.
ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री को लोगों के मिजाज का पता नहीं है. वे जनता से सीधे कनेक्ट होते हैं और इसीलिए जनता के मिजाज को पढ़कर उनकी समस्याओं के समाधान की बात करने लगते हैं. ऐसे में एक आम व्यक्ति को लगता है कि यह समस्या तो उसकी अपनी है. इससे उनके प्रति लोगों की दीवानगी बढ़ जाती है.
बंगाल की जनसभा में ही उन्होंने 6 गारंटी की बात कही, नाम दिया मोदी की गारंटी. अब तक का चुनाव इतिहास बताता है कि मोदी की गारंटी हो या मोदी का वायदा, लोगों ने उन पर भरोसा किया. तो क्या यह भरोसा वोट बैंक में भी तब्दील हो सकता है? फिलहाल यह कहना मुश्किल है. बंगाल चुनाव में जनता और उनका कनेक्शन कितना मजबूत है, इसका पता तो 4 तारीख को ही लगेगा. लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि बंगाल चुनाव में पार्टी का प्रचार करने आए अब तक के केंद्रीय नेताओं और मंत्रियों में उनका क्रेज सर्वाधिक है.
बहरहाल यह देखना होगा कि लोगों का प्रधानमंत्री पर यह विश्वास किस हद तक कायम रहता है. जिस तरह से रविवार को प्रधानमंत्री का भाषण सुनने के लिए सुबह 8:00 बजे से ही लोगों का कावाखाली मैदान में जमावडा हो गया था और दोपहर 3:00 बजे तक लोग मैदान में जमे रहे, वह भी कम नहीं है. नजारा तो ऐसा था कि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शुरुआती घंटो में ट्रैफिक पुलिस के द्वारा परिवहन संचालन की कोशिश जरूर की गई, लेकिन जैसे जैसे भीड़ बढ़ती गई, नौका घाट से मेडिकल मोड तक पूरा सड़क जाम हो गया.

