April 7, 2026
Sevoke Road, Siliguri
प्रमुख हेडलाइंस और अपडेट्स newsupdate private school siliguri SILIGURI MUNICIPAL CORPORATION

क्या सिलीगुड़ी के निजी स्कूलों की ‘मनमानी’ पर रोक लगेगी?

Will the 'arbitrariness' of private schools in Siliguri be stopped?

दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय का आदेश आज सिलीगुड़ी में भी चर्चा का विषय बन गया है. सिलीगुड़ी के निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों के द्वारा दिल्ली सरकार के इस फैसले की तारीफ की जा रही है. सिलीगुड़ी के अभिभावक भी चाहते हैं कि यहां भी सरकार या संगठनों के जरिए कुछ इसी तरह की पहल की जाए, ताकि अभिभावकों को कुछ राहत मिल सके और उनके चेहरे पर हंसी और मुस्कान खेल सके.

आखिर सिलीगुड़ी के अभिभावक दिल्ली सरकार के किस फैसले की तारीफ कर रहे हैं? यह फैसला क्या है? कदाचित आप भी जानना चाहेंगे.

अप्रैल का महीना चल रहा है. बच्चों के रिजल्ट आ चुके हैं. ऐसे में इस महीने से स्कूलों में उनका नामांकन शुरू हो जाएगा. सिलीगुड़ी में हाल के दिनों में निजी स्कूलों की संख्या काफी बढ़ी है. रोज ही नए-नए स्कूल खुल रहे हैं. इन स्कूलों के द्वारा बच्चों को अलग-अलग सुविधा देने की घोषणा की जा रही है. पर इन सभी स्कूलों में एक सामान्य बात यह है कि बच्चों को स्कूल से ही यूनिफॉर्म, नोटबुक, बेल्ट, बैग, टाई, पुस्तक आदि लेने पड़ते हैं. इसमें अभिभावकों का काफी पैसा खर्च हो जाता है.

बच्चों के दाखिले से लेकर वर्दी, बैग, पुस्तक, कॉपी आदि लेने तक अभिभावकों को एक मुश्त मोटी रकम खर्च करनी पड़ती है. सबसे ज्यादा उन्हें यूनिफॉर्म, नोट्स बुक, पुस्तक, बैग वगैरा पर खर्च करना पड़ता है. सिलीगुड़ी के वार्ड नंबर 4 के रहने वाले राम सिंह ने बताया कि स्कूल की तरफ से जो यूनिफॉर्म, बैग आदि मिलते हैं, उस तरह के यूनिफॉर्म बाजार से लेने पर आधी कीमत से भी कम में मिल जाती है. इसी तरह से बुक्स, नोटबुक, डायरी आदि की कीमत भी स्कूल में दोगुनी से भी ज्यादा महंगी है. लेकिन हम लोग इसे दूसरी जगह से नहीं ले सकते हैं. अगर बच्चे को पढ़ाना है तो स्कूल से ही यह सब कुछ लेना होगा.

यह समस्या केवल सिलीगुड़ी की ही नहीं बल्कि देशभर के निजी स्कूलों की है. वास्तव में इन सभी वस्तुओं की बिक्री पर स्कूल को कंपनियों से मोटा कमीशन मिलता है. पर उनके कमीशन के चक्कर में अभिभावकों की जेब पर काफी भारी पड़ता है. कई बार अभिभावक बच्चों के दाखिले से लेकर उनके यूनिफॉर्म, पुस्तक आदि की खरीद के क्रम में कर्ज लेने पर मजबूर हो जाते हैं. निजी स्कूलों की बढती फीस की तो बात ही छोड़ दीजिए. अभिभावकों की इन ज्वलंत समस्याओं पर विचार करने की जरूरत है. इस संदर्भ में दिल्ली सरकार ने एक बहुत ही अच्छा कदम उठाया है, जिसे अभिभावकों के हित में देखा जा रहा है.

वास्तव में यह समस्या कोई नई नहीं है. काफी समय से अभिभावक तथा कुछ संगठन सरकार से मांग कर रहे थे कि निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाई जाए. उनके अनुसार स्कूल द्वारा दो गुना तीन गुना रेट से भी अधिक रेट पर किताबें, नोटबुक, यूनिफॉर्म ,बेल्ट आदि बेचे जाते हैं. उनकी तरफ से अभिभावकों को मजबूर किया जाता है कि वह स्कूल से ही इन सभी सामानों को खरीदें. अब दिल्ली सरकार ने इस मसले को गंभीरता से लिया है और एक आदेश जारी किया है.

दिल्ली सरकार के आदेश के अनुसार स्कूल किसी भी अभिभावक को बच्चों के लिए ड्रेस ,बुक्स, नोटबुक, टाई, बैग आदि खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं. आदेश में कहा गया है कि अभिभावक बाजार या उन सभी स्थानों से बच्चों के लिए पुस्तक स्टेशनरी, यूनिफॉर्म आदि खरीद सकते हैं, जहां उन्हें सस्ता मिले. स्कूल उन्हें इसके लिए मजबूर नहीं कर सकते. दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय का यह आदेश दिल्ली के सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए है.

दिल्ली सरकार के आदेश की सिलीगुड़ी में भी चर्चा की जा रही है. सिलीगुड़ी के अभिभावक चाहते हैं कि यहां भी कुछ इसी तरह की पहल की जाए ताकि अभिभावकों पर बच्चों की पढ़ाई का आर्थिक बोझ कुछ कम हो सके. कम से कम सरकार या शैक्षिक संगठनों की ओर से यह पहल की जाए. स्कूल माता-पिता को वर्दी, स्टेशनरी, पुस्तक, नोट्स बुक इत्यादि लेने के लिए मजबूर न करें तो अभिभावकों का काफी हद तक भला हो सकता है. उनकी आर्थिक परेशानी भी कम होगी.

शिक्षा निदेशालय के आदेश के अनुसार दिल्ली के मान्यता प्राप्त स्कूल अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर किताबें, यूनिफॉर्म आदि चीजों की रेट लिस्ट प्रकाशित करें, ताकि अभिभावक उनकी कीमत सही तरीके से समझ कर खरीद सकें. क्या इस तरह का आदेश या प्रावधान यहां के निजी स्कूलों के लिए नहीं होना चाहिए?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *