आज महा सप्तमी है. सरकारी और निजी दफ्तरों में छुट्टियां हैं. पूरे सिलीगुड़ी शहर में दिव्य एवं पावन बयार बह रही है. सिलीगुड़ी के कोने-कोने में माइक से एक ही स्वर सुनाई देता है या देवी सर्वभूतेषु सर्वरूपेण संस्थिता: नमस्तसयै नमस्तसयै नमो नमः या फिर या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेन संस्थिता:.. सिलीगुड़ी और आसपास के इलाकों में कम से कम 1000 पूजा पंडालों की रौनक के बीच कुछ पूजा कमेटियों के द्वारा इस बार विशेष थीम आधारित पूजा उत्सव मनाया जा रहा है. इसका दीदार करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही है.
आज से श्रद्धालुओं की पूजा पंडालों में भीड़ उमड़ सकती है. बच्चे बूढ़े नौजवान स्त्री पुरुष सभी यह देखने निकले हैं कि इस बार सिलीगुड़ी की पूजा पिछली बार की पूजा की तुलना से कितना अलग है. सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस ने शहर में शांति, सुरक्षा और उत्सव की खास तैयारी की है. यूं तो सिलीगुड़ी के अलग-अलग पूजा पंडालों में अलग-अलग छवि देखने को मिल रही है. परंतु उनमें एक बात खास है कि अधिकांश पूजा पंडालों में शक्ति रूपेण मां दुर्गा की छवि एक सी है.
पश्चिम बंगाल दुर्गा पूजा के लिए विश्व विख्यात है. यहां की दुर्गा पूजा को विश्व हेरिटेज की सूची में पहले ही रखा जा चुका है. पिछले 15 सालों के तृणमूल शासन के बाद बंगाल में बनी नई भाजपा सरकार की यह पहली दुर्गा पूजा है, जिसकी तैयारी बंगाल की संस्कृति, कला एवं आध्यात्मिकता के अनुसार की गई है. यहां के पूजा पंडालों में आप बंगाल की पहचान की महक प्राप्त कर सकते हैं. आप एक श्रमिक से लेकर कारीगर, कला ,कौशल, अध्यात्म और सबसे बढ़कर यहां की संस्कृति की झलक का दीदार कर सकते हैं.
इस बार सिलीगुड़ी की विभिन्न पूजा कमेटियों की तरफ से पंडाल निर्माण से लेकर लाइटिंग व अन्य सजावट में पश्चिम बंग संस्कृति का सम्मिश्रण देखने को मिल रहा है. यह कला प्रेमियों को प्रभावित कर रहा है. बड़े पूजा पंडालों की तो बात ही अलग है. छोटे-छोटे पंडाल भी दर्शनार्थियों पर अपना प्रभाव डालते हैं. प्रत्येक पूजा कमेटी की तरफ से यह कोशिश की गई है कि पूजा घूमने आए किसी भी श्रद्धालु को नाहक परेशानी या कठिनाई का सामना न करना पड़े.
पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा को देखने के लिए भारत के दूसरे राज्यों से लोग तो आते ही हैं, विदेशों से भी लोग यहां आते हैं और यहां के पूजा पंडालों की सजावट देखकर मंत्र मुग्ध रह जाते हैं. पंडाल, पंडाल की सजावट, लाइटिंग आदि का एक-एक भाग किसी न किसी उद्देश्य को सामने रखता है. यह काफी प्रभावित करता है. जीवन में सफलता के लिए संघर्ष, संयम और अनवरत प्रयास की जरूरत होती है.
आप यहां के पूजा पंडालों में अध्यात्म का भी दर्शन प्राप्त कर सकते हैं. एक कर्म योगी मुश्किल समय में भी खुद को संभाल लेता है. बंगाल के साधु सन्यासियों और तपस्वियों का जीवन, विचार और श्लोक हमारे जीवन को सदमार्ग पर ले जा सकते हैं. आप यहां के पूजा पंडाल में सत्य की तलाश कर सकते हैं. एक तरफ अध्यात्म, संस्कृति, परंपरा और प्राचीनता की झलक मिलती है तो दूसरी तरफ आधुनिकता और समय के बदलते चक्र का भी आप दीदार कर सकते हैं.
अगर आप सिलीगुड़ी के पूजा पंडालों का भ्रमण करना चाहते हैं तो ट्रैफिक पुलिस और सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस की विशेष गाइडलाइंस का पालन करें. स्वयं के साथ-साथ दूसरों की भी सुरक्षा की चिंता करें. किसी भी तरह की परेशानी या संकट के समय पुलिस हेल्पलाइन या पुलिस सहायता केंद्र से संपर्क करें. अनजानी वस्तु या अनजान लोगों से दूरी बनाकर रखें. कोशिश करें कि घर से निकलते समय घर की देखभाल के लिए किसी न किसी सदस्य को घर पर रखें. यह व्यक्ति आपके बाद भी पूजा घूम सकता है. इस समय सतर्कता बहुत जरूरी है. हालांकि पुलिस आपकी सुरक्षा के लिए है लेकिन उससे ज्यादा महत्वपूर्ण स्वयं के प्रति आपकी सतर्कता और संवेदनशीलता है.
