सिलीगुड़ी के किरणचंद श्मशान घाट में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक मृतक का दाह संस्कार करने आए परिजनों को प्रधान नगर पुलिस ने आकर रोक दिया और लाश को अपने कब्जे में ले लिया. पुलिस ने कहा कि हमें शक है. इसलिए लाश का पोस्टमार्टम कराना होगा. तब तक आप शव का दाह संस्कार नहीं कर सकते… क्या है यह घटना, जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे!
पुलिस ने सिलीगुड़ी पुलिस और जयगांव पुलिस के बीच गौतम चौधरी की मौत का मामला झूल रहा है. जयगांव पुलिस को 5 मार्च तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली थी. इसलिए जय गांव पुलिस कुछ बताने की स्थिति में नहीं है कि गौतम चौधरी की मौत कैसे हुई. सिलीगुड़ी पुलिस को तो सिर्फ इतना पता है कि युवक की आग में झुलसकर मृत्यु हुई है.
लेकिन सच्चाई क्या है, यह तो जांच का विषय है और जयगांव पुलिस ही इस पर विस्तार से जानकारी जुटा सकती है. क्योंकि मृतक यही का रहने वाला था. सिलीगुड़ी पुलिस ने मृतक की एक बहन की शिकायत के आधार पर मृतक की लाश को किरण चंद श्मशानघाट में फूंकने आए परिजनों से बरामद करके उसे जयगांव के लिए रवाना कर दिया. मृतक की बहन मौसम चौधरी ने आरोप लगाया है कि उसके भाई की हत्या की गई है.
वस्तु स्थिति को समझने के लिए मृतक की पारिवारिक पृष्ठभूमि पर एक नजर डालना जरूरी है. मृतक का नाम गौतम चौधरी है. उसकी उम्र 22 साल थी. वह जयगांव के भगत सिंह नगर का रहने वाला था. मृतक की दो बहने भी हैं. एक का नाम मौसम चौधरी है. जबकि दूसरी बहन सबसे बड़ी है. गौतम चौधरी की मां का देहांत बचपन में हो गया था. मरने से पहले मां ने अपनी संपत्ति गौतम चौधरी के नाम कर दी थी. गौतम चौधरी के पिता का नाम रामनाथ चौधरी है.
उन्होंने पहली पत्नी के देहांत के बाद बिहार में दूसरी शादी की. ताकि उनके बच्चों का पालन पोषण ठीक तरह से हो सके,यह सोच कर उन्होंने दूसरी शादी की थी. उनकी दूसरी पत्नी का नाम मीना चौधरी है. सौतेली मां मीना चौधरी ने पहली पत्नी के तीन बच्चों का पालन पोषण किया और समय के अनुसार दोनों सौतेली बेटियों का विवाह भी किया.
बहनों के ससुराल चले जाने के बाद गौतम नितांत अकेला हो गया था. जय गांव के प्रारंभिक सूत्रों से ऐसी जानकारी मिल रही है कि मीना चौधरी गौतम चौधरी की संपत्ति को हड़पना चाहती थी. लेकिन गौतम चौधरी जीते जी अपनी संपत्ति सौतेली मां के नाम करना नहीं चाहता था. वह अपनी संपत्ति को अपनी सगी बहनों में भी बराबर बराबर बांटना चाहता था. मीना चौधरी को यह मंजूर नहीं था.
गौतम चौधरी को तोड़ने के लिए सौतेली मां ने उस पर साम, दाम, दंड, भेद, नीति अपनाई. लेकिन वह नहीं टूटा. इसके बाद उस पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया गया. हालांकि सौतेली मां मीना चौधरी ने इस आरोप का खंडन किया और कहा है कि इसमें जरा भी सच्चाई नहीं है. मृतक की एक और बहन जो अपनी ससुराल में रहती है, उसने भी मृतक के साथ सौतेली मां के अत्याचार के मौसम चौधरी के लगाए आरोप को गलत बताया है.
टेलीफोन पर खबर समय से बात करते हुए उसने कहा है कि इस आरोप में कोई सच्चाई नहीं है कि संपत्ति के लालच में सौतेली मां ने गौतम को साजिश करके मार डाला. जबकि शिकायतकर्ता मौसम चौधरी के अनुसार गौतम चौधरी को जमीन के मामले में लगातार परेशान किया जा रहा था. मौसम चौधरी के आरोप को इस घटना से बल मिलता है कि एक दिन अचानक गौतम चौधरी के कमरे में आग लग गई, जिसमें वह बुरी तरह झुलस गया.
बुरी तरह घायल अवस्था में गौतम चौधरी को जय गांव से लाकर सिलीगुड़ी स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा था. लेकिन इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई. सौतेली मां और परिजनों ने मृतक का दाह संस्कार करने के लिए उसकी लाश को किरणचंद श्मशान घाट लाया, जहां सिलीगुड़ी पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद लाश का दाह संस्कार करने से रोक दिया और उसे अपनी कस्टडी में ले लिया. यह आग कैसे लगी, इसकी कोई तथ्य परक जानकारी नहीं मिली है. इससे पुलिस का संदेह बढ़ जाता है.
सूत्र बता रहे हैं कि पुलिस मृतक की पोस्टमार्टम कराएगी जिसमें दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. कौन सही और कौन गलत है, गौतम चौधरी की मृत्यु कैसे हुई, क्या उसके साथ सौतेली मां ने जोर जुल्म किया था या फिर उसकी अस्वाभाविक मौत हुई है, ऐसे बहुत से सवाल हैं जिनकी पुलिस छानबीन कर रही है. सभी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है. यह मामला जयगांव पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है.
