January 8, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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सिलीगुड़ी विधानसभा सीट पर किसकी होगी जीत? डॉक्टर शंकर घोष या गौतम देव? सिलीगुड़ी का नेता कैसा होना चाहिए? किसे पसंद करती है सिलीगुड़ी की जनता? जानिए इस रिपोर्ट में!

Who will win the Siliguri assembly seat? Dr. Shankar Ghosh or Gautam Deb? What kind of leader does Siliguri need? Who is the people of Siliguri rooting for? Find out in this report!

2026 बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों की ओर से चुनाव प्रचार शुरू हो चुका है. मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच है. तृणमूल कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अलावा अभिषेक बनर्जी राज्य में जगह-जगह जनसभाएं कर रहे हैं तो भाजपा की ओर से प्रदेश भाजपा के बड़े नेताओं के अलावा केंद्रीय नेता और मंत्री बंगाल का दौरा कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की यहां जनसभाएं संपन्न हो चुकी हैं. प्रधानमंत्री एक बार फिर से 17-18 जनवरी को बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं.

पूरे प्रदेश में विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं. उत्तर बंगाल में विधानसभा की कुल 54 सीटों में से सबसे महत्वपूर्ण सीट सिलीगुड़ी सीट है. सिलीगुड़ी से वर्तमान विधायक भाजपा के डॉक्टर शंकर घोष हैं. जानकार मानते हैं कि सिलीगुड़ी सीट पर पार्टी की जीत हार का प्रभाव सिलीगुड़ी के आसपास की चार सीटों के अलावा उत्तर बंगाल की शेष 50 सीटों पर भी कमोबेश असर पड़ता है. इसलिए यह सीट न केवल भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है. बल्कि टीएमसी के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है. टीएमसी इस बार सिलीगुड़ी विधानसभा सीट भाजपा से छीन लेना चाहती है. जबकि भाजपा पूरे प्रदेश से ही टीएमसी को सत्ता से बेदखल कर देना चाहती है.

दोनों ही पार्टियों की ओर से चुनावी रणनीति बनाई जा रही है. भाजपा और टीएमसी की ओर से चुनावी बैठकों का दौर भी शुरू हो चुका है. सिलीगुड़ी में टीएमसी की कमान सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर गौतम देव संभाल रहे हैं. जबकि भाजपा की ओर से राजू बिष्ट के अलावा अन्य भाजपा सांसद तथा केंद्र की ओर से नियुक्त चुनाव प्रभारी और मंत्री संगठनात्मक बैठक कर रहे हैं. माना जा रहा है कि इस बार शंकर घोष का मुकाबला गौतम देव से हो सकता है. शंकर घोष भाजपा के कद्दावर नेताओं में से गिने जाते हैं तथा राज्य विधानसभा में मुख्य सचेतक के पद पर भी आसीन हैं. इसलिए इस बात की पूरी संभावना है कि भाजपा शंकर घोष को ही यहां से उम्मीदवार बनाएगी.

सिलीगुड़ी के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि टीएमसी की ओर से शंकर घोष का मुकाबला करने के लिए गौतम देव को उम्मीदवार बनाया जा सकता है. कुछ समय पहले यह खबर सुर्खियों में थी कि गौतम देव सिलीगुड़ी से चुनाव लड़ सकते हैं. हालांकि गौतम देव की परंपरागत सीट फुलवारी डाब ग्राम क्षेत्र है. लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा नेत्री शिखा चटर्जी के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा था. मगर इस बार स्थितियां कुछ अलग है. गौतम देव ने इस बीच खुद को सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर के तौर पर सिलीगुड़ी के लोगों के बीच अपनी स्थिति मजबूत की है. इसलिए कयास लगाया जा रहा है कि शंकर घोष का मुकाबला करने के लिए टीएमसी गौतम देव को मैदान में उतार सकती है. बहर हाल यह तो आने वाले समय में पता चलेगा कि दोनों ही दलों की ओर से किस नेता को उम्मीदवार बनाया जा रहा है.

परंतु सिलीगुड़ी के लोगों का सवाल एक ही है कि उनका नेता कैसा होना चाहिए? सवाल यह महत्वपूर्ण नहीं है कि डॉक्टर शंकर घोष अथवा गौतम देव यहां से चुनाव जीतें. सवाल यह भी महत्वपूर्ण नहीं है कि सिलीगुड़ी से टीएमसी चुनाव जीतती है या फिर से भाजपा आती है. सिलीगुड़ी के लोग पहले से काफी जागरूक हो गए हैं और वे अपना कीमती वोट उसी नेता को देना चाहते हैं, जो उनके सुख-दुख में बराबर का भागीदार रहता है. सिलीगुड़ी में समस्याएं कम नहीं हैं. आने वाले समय में सिलीगुड़ी को आधुनिक शहर के रूप में विकसित भी करना है.

इसलिए सिलीगुड़ी का प्रतिनिधि ऐसा होना चाहिए जो सिलीगुड़ी के लोगों की समस्याओं को कम से कम करने का प्रयास करे. इसके साथ ही सिलीगुड़ी शहर का संपूर्ण विकास करे. सवाल यह है कि डॉ शंकर घोष ने पिछले 5 साल के कार्यकाल में सिलीगुड़ी के लोगों की उम्मीद पर खरा उतरने का कितना प्रयास किया है? और क्या उन्हें एक और मौका दिया जाना चाहिए? सवाल यह भी है कि अगर गौतम देव यहां से चुनाव जीतते हैं, तो क्या वे यहां के लोगों की आशा और आकांक्षाओं की कसौटी पर खरे उतर सकेंगे? सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर के रूप में गौतम देव ने यहां के लोगों की कितनी सेवा की है? यह आत्म चिंतन का समय है.

इस बार सिलीगुड़ी की जनता अपना नेता चुनते समय निश्चित रूप से उम्मीदवार के चाल, चरित्र, सेवा, कार्य और त्याग का मूल्यांकन करते हुए अपना वोट देगी. वह चाहे टीएमसी का उम्मीदवार हो या फिर भाजपा का या फिर वाममोर्चा कांग्रेस का ही नेता क्यों ना हो. क्योंकि बदले समय में अब सिलीगुड़ी की जनता को बरगलाया नहीं जा सकता है. जनता को लोक लुभावन नारों के जाल में फंसाया नहीं जा सकता है. सिलीगुड़ी की जनता कह रही है, नहीं चाहिए वादे! हमें तो चाहिए नेता की नीयत और इरादे!

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