July 23, 2026
Sevoke Road, Siliguri
प्रमुख हेडलाइंस और अपडेट्स

क्यों हुई बंगाल सफारी में हिरण समेत 3 दुर्लभ जानवरों की मौत?

चिड़ियाघर और बंगाल सफारी के इतिहास में शायद यह पहला मौका है, जब एक सप्ताह के भीतर ही तीन दुर्लभ जानवरों की मौत हो गई. इससे कई तरह के सवाल उठने लगे हैं. सिलीगुड़ी का बंगाल सफारी प्रबंधन सवालों के घेरे में है. आखिर ऐसा क्या हो गया कि महज एक हफ्ते में ही बंगाल सफारी में सांभर हिरण समेत तीन दुर्लभ वन्य जीव खत्म हो गए?

सिलीगुड़ी का बंगाल सफारी सिलीगुड़ी और आसपास के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. तीज त्यौहार और उत्सव के समय यहां सफारी में दर्शकों की काफी भीड़ जुट जाती है. दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बंगाल सफारी के दुर्लभ वन्य जीव हैं, जिन्हें देखने और उनकी गतिविधियों से मनोरंजन और ज्ञान प्राप्त करने के लिए लोग आते हैं. 26 जनवरी 15 अगस्त और ऐसे कई त्यौहारों पर बंगाल सफारी में पर्यटकों की काफी भीड़ लग जाती है.

जनवरी महीने में तो रोजाना ही यहां लोग पिकनिक मनाने आते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल सफारी पार्क को एक महीने में ही पूरे 12 महीने की कमाई हो जाती है. यह इसलिए होता है कि बंगाल सफारी का प्रबंधन, जानवरों की देखरेख और प्राकृतिक वातावरण से दर्शक काफी प्रभावित होते हैं. कुछ समय पहले ही बंगाल सफारी का कायाकल्प भी किया गया था. और प्रबंधन की तारीफ भी की गई थी.

फिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि सफारी में उदासीनता और स्तब्धता देखी जा रही है. क्या बंगाल सफारी प्रबंधन लापरवाह हो गया है? क्या सफारी के जंतुओं की उचित देखरेख नहीं हो रही है? सवाल उठता है कि बंगाल सफारी में पशु ही नहीं रहेंगे तो इसका वजूद कितना मजबूत रह पाएगा? इससे न केवल प्रबंधन पर सवाल उठेंगे बल्कि बंगाल सफारी की विश्वसनीयता और सफारी की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा.

वन विभाग और बंगाल सफारी प्रबंधन भी ऐसी घटनाओं को हल्के में नहीं ले रहा है. आखिर एक सप्ताह में तीन-तीन जानवरों की मौत कैसे हो गयी? सांभर हिरण सफारी का एक प्रमुख आकर्षण था. लेकिन अब इस दुनिया में नहीं है. जिन वन्य जीवों की मौत हुई है उनकी आधिकारिक सूचना वन्य जीव संरक्षण व वन विभाग को दे दी गई है. यहां अधिकारी सफारी की देखरेख, चिकित्सा व्यवस्था और जानवरों की सुरक्षा का मुआयना कर रहे हैं.

कई लोगों का कहना है कि बरसात के समय यहां जानवरों में एक रहस्यमय बीमारी फैली हुई है. हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है. पिछले हफ्ते एक सांभर हिरण की बीमारी में मौत हुई थी. इसके 24 घंटे के भीतर एक नवजात शेर के बच्चे ने भी दम तोड़ दिया. इसके बाद त्रिपुरा से लाए गए दुर्लभ प्रजाति के लंगूर या विशेष बंदर की भी मौत हो गई. इससे यह आशंका बढ़ जाती है कि जानवरों में कहीं संक्रामक व जानलेवा रोग तो नहीं फैल रहा है?

सूत्रों ने बताया कि बंगाल सफारी में विशेषज्ञ और डॉक्टर भी आकर जा चुके हैं. लेकिन अभी तक पता नहीं चला है कि जानवरों की मौत कैसे हुई? इसलिए वन विभाग पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है. हालांकि यहां आए चिकित्सकों ने अपने प्राथमिक अनुमान में बताया है कि लगभग 7 वर्ष उम्र के विशेष लंगूर की अचानक अंगों के काम करना बंद कर देने से उनकी मृत्यु हुई होगी.

आपको बताते चलें कि सिलीगुड़ी के बंगाल सफारी को आबाद करने में पूर्ववर्ती ममता बनर्जी की सरकार ने काफी योगदान दिया था. यहां जानवर अधिकतर त्रिपुरा से लाए गए हैं. विशेषज्ञों के अनुसार त्रिपुरा के सिपाहीजला चिड़ियाघर से 18 जानवर बंगाल सफारी लाए गए थे. उनमें शेरों की एक जोड़ी सूरज और तान्या भी शामिल थी.

त्रिपुरा से ही विशेष लंगूर की जोड़ी भी लाई गई थी. जहां तक बंगाल सफारी के वातावरण की बात है तो विशेषज्ञ भी बता चुके हैं कि यहां का वातावरण जानवरों के पोषण अनुकूल है. लगभग इसी समय पिछले साल शेरनी तान्या ने तीन बच्चों को जन्म दिया था. सब कुछ ठीक रहने के बावजूद एक हफ्ते में तीन-तीन जानवरों की रहस्यमय मृत्यु ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. इनका जवाब या तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिलेगा या फिर जांच अधिकारी देंगे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *