कई दिनों तक पुलिस की नाक में दम कर रखे सिलीगुड़ी के गुरुंग बस्ती कांड का मास्टरमाइंड और फरार मुख्य आरोपी आमिर अली को पकड़ कर पुलिस ने अंततः कानून की चौखट पर पहुंचा दिया, जहां से उसे सात दिनों के पुलिस रिमांड में भेज दिया गया. पुलिस आरोपी से विस्तृत पूछताछ करने के लिए उसे पुलिस हिरासत में देने की अदालत से मांग कर रही थी, जिसे न्यायाधीश ने मंजूर कर लिया. आमिर अली के साथ ही पुलिस ने उसके भाई समीर अली को भी कोर्ट में पेश किया था. समीर अली को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया.
पिछले कई दिनों से इस कांड को लेकर सियासी पारा गरम था. आमिर अली की शीघ्र गिरफ्तारी और उसे फांसी देने की मांग लगातार जोर पकड़ रही थी. हिंदू संगठनों और राजनीतिक दलों के नेताओं ने इसे एक मुद्दा बना लिया. भारतीय जनता पार्टी के नेता और सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष धरने पर बैठे थे. तृणमूल कांग्रेस के नेता भी पुलिस पर दबाव बना रहे थे. रविवार को आमिर अली की गिरफ्तारी की खबर सिलीगुड़ी में जैसे ही पहुंची, पूरे शहर में एक उत्तेजना फैल गई. आमिर अली को फांसी देने की मांग कोने-कोने से होने लगी.
सिलीगुड़ी के लोगों के गुस्से और आक्रोश का अंदाज़ा पुलिस को पहले से ही हो गया था. इसलिए पुलिस ने आमिर अली को कोर्ट में पेश करने की एक सोच समझकर योजना बनाई. आमिर अली को कोर्ट में पेश करने का जो समय निर्धारित किया गया था, उससे पहले ही पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर दिया. हालांकि उस समय भी कोर्ट प्रांगण में भीड़ मौजूद थी और आमिर अली को फांसी देने की मांग में नारे लगा रही थी. जब आमिर अली को पुलिस वैन से नीचे उतार कर अपनी कस्टडी में कोर्ट ले जा रही थी, तभी आमिर अली को देखकर भीड़ में उत्तेजना फैल गई. लेकिन इससे पहले कि कोई अप्रिय घटना घटती, मौके की नजाकत को देखते हुए पुलिस आरोपी को लेकर लगभग दौड़ते हुए कोर्ट परिसर में दाखिल हो गई.
इस कांड का मुख्य आरोपी शिक्षक आमिर अली तथा उसका भाई समीर अली जब तक कोर्ट में मौजूद रहे, कोर्ट के बाहर उनके खिलाफ लोगों का आक्रोश और गुस्सा उबल रहा था. कोर्ट परिसर में स्त्री पुरुषों की काफी भीड़ थी. पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे. भीड़ को संभालने के लिए पुलिस और सुरक्षा बल के जवान तैनात थे. भीड़ आरोपी को फांसी देने की मांग करते हुए नारे लगा रही थी. काफी देर तक यह सब चलता रहा.
गुरुंग बस्ती कांड एक ऐसा कांड है, जिसने सामाजिक और राजनीतिक घटनाक्रम को काफी प्रभावित किया. इस कांड का मुख्य आरोपी आमिर अली शादीशुदा व्यक्ति है. पेशे से एक शिक्षक है, जो कुलीपाड़ा की एक नाबालिग लड़की को अपने घर पर ट्यूशन पढ़ाता था. आरोप है कि उसके यहां सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्ड 1 से कम से कम 100 बच्चियां ट्यूशन पढ़ने जाती थीं. ट्यूशन की आड़ में कुलीपाड़ा की एक नाबालिग बच्ची के साथ उसके नाजायज रिश्ते बन गए थे. लोगों का गुस्सा इसलिए है कि एक शिक्षक होकर उसने ऐसे कृत्य को अंजाम दिया. आमिर अली को फांसी देने की मांग कर रहे लोगों का कहना है कि गुरु शिष्य का रिश्ता पवित्र होता है. लेकिन आमिर अली जैसे लोग जब ऐसे पवित्र रिश्ते को कलंकित करते हैं, तो उन्हें जीने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए.
यही बात राजनीतिक गलियारों में भी नेताओं के मुंह से सुनी जा रही है.आखिर एक शिक्षक व्यक्ति जब ऐसे कांड को अंजाम देगा तो फिर छात्र शिक्षा और शिक्षक पर क्या भरोसा करेंगे! एक नंबर वार्ड के पार्षद संजय पाठक हो या फिर भारतीय जनता पार्टी के शंकर घोष से लेकर राजू विष्ट या फिर टीएमसी के नेता हो, सभी इस घटना की कडी निंदा कर रहे हैं और आरोपी शिक्षक को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं.
सिलीगुड़ी मेट्रो पोलिटन पुलिस ने जिस आरोपी को रिमांड पर लिया है , उसकी पृष्ठभूमि भी अपराध पर आधारित बताई जा रही है. आरोप है कि उसके खिलाफ पहले से ही दो केसे चल रहे हैं. घटना के दिन से ही यह व्यक्ति फरार हो चुका था. पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में आमिर अली ने जो जानकारी दी है, वह और चौंकाने वाला है तथा इस बात का संकेत है कि यह व्यक्ति किसी भी अपराधिक घटना में पुलिस से बचने और सबूत को गायब करने के लिए क्या-क्या स्वांग रच सकता है. यह व्यक्ति आपराधिक फिल्मों से प्रेरणा लेता था. उसने कई क्राइम शो और वेब सीरीज से आइडिया हासिल किया कि किस तरह से आपराधिक मामलों में पुलिस की आंखों में धूल झोंका जा सकता है.
यह एक ऐसा मास्टरमाइंड है जिसने घटना के बाद से अपने मोबाइल के सिम कार्ड का इस्तेमाल तक नहीं किया और केवल वाई-फाई तथा दूसरे लोगों के हॉटस्पॉट का इस्तेमाल करते हुए इंटरनेट कॉलिंग से परिवार और रिश्तेदारों से जुड़ा रहा. यह घटना 22 मार्च की रात हुई थी, जब नाबालिग लड़की और आमिर अली के बीच आपसी संबंध को लेकर बड़ा विवाद हुआ था. उसी रात नाबालिग लड़की ने फंदे से लटक कर अपनी जान दे दी थी. अपने खिलाफ माहौल गर्म होते देखकर आमिर अली ने अपना घर छोड़ दिया और सीधे एनजेपी स्टेशन पहुंचा. वहां से वह बिहार के बेगूसराय पहुंचा और बेगूसराय से पटना पहुंच गया.
आमिर अली का एक चचेरा भाई चेन्नई में रहता है. उसने अपने भाई से इंटरनेट कॉलिंग के जरिए बात की और जब उसने आने के लिए कहा तो वह विमान से चेन्नई जाने के लिए पटना एयरपोर्ट पहुंचा. लेकिन कुछ तकनीकी कारण से वह विमान से चेन्नई नहीं जा सका. बाद में उसने ट्रेन से ही चेन्नई की यात्रा की. यह व्यक्ति इतना शातिर है कि उसने सिलीगुड़ी से चेन्नई तक की अपनी यात्रा में एक बार भी सिम कार्ड का इस्तेमाल नहीं किया. पुलिस को चकमा देने के लिए इस व्यक्ति ने अपने मोबाइल के इंटरनेट से नहीं, बल्कि स्टेशन, होटल अथवा दूसरे लोगों के वाई-फाई तथा हॉटस्पॉट का इस्तेमाल किया.
डीसीपी काजी समसुद्दीन अहमद, एसीपी हरदीप और थाना प्रभारी वासुदेव सरकार की टीम ने ऐसे लोगों से अपने बच्चों को बचाने की सिलीगुड़ी के लोगों से अपील की है और कहा है कि किसी से कोई गिफ्ट लेते हुए पूरी सावधानी बरतें. अपने बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान रखें. यह पहली ऐसी घटना है जहां आरोपी आमिर अली तक पहुंचने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी. आरोपी आमिर अली तक पहुंचने के लिए पुलिस ने उसके परिवार के सदस्यों से आरोपी के व्हाट्सएप और इंटरनेट मीडिया अकाउंट्स के आईडी लिए थे. इनकी निगरानी के दौरान इंटरनेट कॉलिंग का आईपी एड्रेस ट्रेस किया गया. इसके आधार पर पुलिस ने तीन अलग-अलग टीमों का गठन किया. बिहार, दिल्ली तथा चेन्नई में टीम को रवाना किया गया, जहां आरोपी की तलाश शुरू हुई. अंततः रविवार की सुबह पुलिस ने आमिर अली को उसके चचेरे भाई के घर से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस और कानून से आंख मिचौली करने वाला यह शातिर अब अपने किए का अंजाम भुगतेगा.
