सोशल मीडिया से लेकर नेशनल मीडिया बंगाल चुनाव पर सर्वे कर चुके हैं. सर्वे का औसत नतीजा यह है कि अगर अभी चुनाव हुए तो भाजपा प्रदेश में अपनी सरकार नहीं बनाती नजर आ रही है. भाजपा के लिए 2 महीने का वक्त है. अगर 2 महीने में संगठन के स्तर पर भाजपा मजबूत होती है तो संभवतः अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को कड़ी टक्कर दे सकती है.
फरवरी महीना राजनीतिक दलों के लिए काफी महत्वपूर्ण है. बच्चों के एग्जाम वगैरह इसी महीने में होंगे. ऐसे में ना तो टीएमसी और ना ही बीजेपी के नेता जोर-शोर से प्रचार कर सकेंगे. मार्च महीना बीजेपी और टीएमसी के लिए आक्रामक होगा. क्योंकि इस महीने एक और बीजेपी टीएमसी के स्तर को छूने की कोशिश करेगी तो दूसरी तरफ टीएमसी बीजेपी को आगे बढ़ने से रोकने के लिए सभी तरह की रणनीति अपनाएगी. मार्च महीने में बीजेपी के द्वारा परिवर्तन यात्राएं निकालने की भी रणनीति है.
इस समय बीजेपी का पूरा फोकस संगठन पर है. गृह मंत्री अमित शाह सिलीगुड़ी के नजदीक गोसाईपुर में कार्यकर्ताओं की सभा कर चुके हैं. सभी को संगठन पर काम करने के लिए निर्देश मिला है. कोलकाता में भाजपा के द्वारा चुनावी एजेंडा तैयार किया जा रहा है. सूत्र बता रहे हैं कि आरएसएस और स्थानीय भाजपा समितियों के निर्देश पर इस बार चुनाव में बीजेपी के नेताओं के द्वारा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निजी हमले नहीं किए जाएंगे.
बीजेपी की चुनावी रणनीति के केंद्र में हिंदुत्व के साथ ही महिला सुरक्षा, घुसपैठ और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे शामिल होंगे. बीजेपी के पास वक्त कम है. इसलिए पार्टी के नेता एक साथ सभी मोर्चो पर काम कर रहे हैं. इस बार बीजेपी की रणनीति के तहत गुटबाजी को खत्म किया जाएगा और सभी को साथ मिलकर आगे बढ़ने की रणनीति पर फोकस होगा. पार्टी इस बार युद्ध स्तर पर काम करने और सत्ता तक पहुंचने की रणनीति बना रही है.
फरवरी महीने में बीजेपी के द्वारा बूथ कमेटियों के पुनर्गठन, कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय करने के साथ ही डोर टू-डोर कैंपेन, छोटी-मोटी बैठकें और संवाद जैसे प्रचार के पारंपरिक तरीकों पर काम किया जाएगा. टीएमसी की रणनीति भी कुछ ऐसी ही होगी. लेकिन उसका मकसद बीजेपी को उभरने से रोकने देना है और यह साबित करना होगा कि बीजेपी एक बाहरी पार्टी है. जनता में यह साबित करना होगा कि बंगाल के लोगों का हित केवल टीएमसी में ही निहित है.
बीजेपी और टीएमसी के द्वारा शह और मात का खेल भी खेला जाएगा. बीजेपी की रणनीति और उसकी आक्रामकता मार्च में ही दिखेगी और मार्च का महीना ही यह साबित करेगा कि अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता में आती है या नहीं. मिल रही जानकारी के अनुसार बीजेपी की ओर से पूरे राज्य में परिवर्तन यात्राएं निकाली जाएगी. इन परिवर्तन यात्राओं का लक्ष्य टीएमसी सरकार की नाकामियों को जनता के सामने रखना है और यह साबित करना है कि टीएमसी का एकमात्र विकल्प बीजेपी ही है.
भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के नेता मार्च में परिवर्तन यात्राओं को हरी झंडी दिखाने के साथ ही जगह-जगह जनसभाएं भी कर सकते हैं. इन बड़े नेताओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, नितिन नवीन, योगी आदित्यनाथ ,हेमंत विश्व शर्मा और बहुत से नेता शामिल होंगे. जबकि परिवर्तन यात्राओं की कमान प्रदेश भाजपा के नेताओं जैसे सुवेंदु अधिकारी, शमिक भट्टाचार्य, सुकांत मजूमदार, अग्निमित्र पॉल, लॉकेट चटर्जी, दिलीप घोष आदि के हाथ में हो सकती है.
विधानसभा चुनाव जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने पूरे राज्य को 6 जोन में बाटा है. हर जोन की जिम्मेदारी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को दी गई है. यानी पूरे परिदृश्य पर नजर डालें तो भाजपा पूरे दमखम और पूरी तैयारी के साथ टीएमसी से भिड़ने वाली है. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि मार्च महीने में ही यह पता चल जाएगा कि भाजपा की कमान में कितने तीर हैं और यह भी पता चल जाएगा कि टीएमसी अपनी सत्ता बचाने में सफल रहती है या नहीं. क्योंकि कभी-कभी खत का मजमून देखकर ही पूरा खत समझ में आ जाता है.
