February 4, 2026
Sevoke Road, Siliguri
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धर्म नगरी सिलीगुड़ी हुई शर्मसार! पुलिस ने शुरू की मृत नवजात के वारिस की तलाश!

जब पुलिस नवजात के शव को बरामद करके पोस्टमार्टम के लिए ले जा रही थी तो उस समय नवजात की आत्मा जरूर पूछ रही होगी कि उसका क्या कसूर था, जो उसे इतनी बड़ी सजा मिली! सजा तो उन्हें मिलनी चाहिए जिसने उसे मौत के घाट पहुंचाया था. क्या माता विमाता हो गई? नवजात की आत्मा उस खूनी पिता से भी यही सवाल कर रही थी… अगर मारना ही था तो उसने जन्म क्यों दिया?

सुबह का समय था. कुछ बच्चे नदी में खेलने गए थे. तभी उन्होंने देखा कि नदी के पानी में बहता हुआ एक शिशु आ रहा था. शिशु को देखकर बच्चे घबरा गए. उन्होंने आवाज देकर आसपास के लोगों को बुला लिया. उन्होंने देखा कि एक नवजात नदी की धारा में बहता जा रहा था. पुलिस का मामला समझकर कुछ लोगों ने स्थानीय थाना प्रधान नगर को इसकी सूचना दी.

जिसने भी सुना, वही नदी में दौड़ता हुआ चला आया. आपस में लोग चर्चा भी कर रहे थे. आखिर इस नवजात को यहां कौन फेंक कर गया होगा, यही कयास लगाया जा रहा था. कुछ देर में प्रधान नगर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने कुछ नौजवान लड़कों की मदद से पानी में बहते हुए नवजात को बरामद किया. जब नवजात शिशु की धड़कन देखी गई तो उसकी धड़कन बंद हो चुकी थी. पुलिस ने खानापूरी करने के बाद नवजात के शव को पोस्टमार्टम के लिए उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया.

यह घटना सिलीगुड़ी नगर निगम के 46 नंबर वार्ड, डागापुर स्थित प॔चनई नदी की है. यहीं से नवजात शिशु का पुलिस ने शव बरामद किया था. पुलिस ने इस घटना को लेकर आसपास के लोगों से पूछताछ करनी शुरू कर दी है. क्योंकि पुलिस को लगता है कि आसपास के इलाकों से ही किसी ने नवजात को यहां फेंका होगा. आखिर वह कौन सा कारण था, जब नवजात के घर वालों ने उसे यहां फेंका. क्या नवजात मरा हुआ पैदा हुआ था? या फिर उसे मार दिया गया? आखिर नवजात को किसने मारा होगा? क्यों मारा? इत्यादि बहुत सी बातों पर पुलिस ने खोजबीन शुरू कर दी है. नवजात के वारिस का पता लगाने के लिए पुलिस ने स्थानीय लोगों से संपर्क और पूछताछ शुरू कर दी है. इसके साथ ही नवजात के पोस्टमार्टम रिपोर्ट की भी प्रतीक्षा की जा रही है.

सिलीगुड़ी को धर्म नगरी भी कहा जाता है. यहां लगभग हर महीने धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन चलता रहता है. उस धर्म नगरी में इस तरह की घटना का होना मानवता, ममता और इंसानियत को शर्मसार करता है. उस मां को लोग कोस रहे हैं, जिसकी गोद में नवजात खेलना चाहिए था, लेकिन वह उस मां से हमेशा के लिए दूर हो चुका था. क्या शिशु की मां ही हत्यारिन है? लेकिन उसने उसकी हत्या क्यों की? क्या इसके लिए शिशु का पिता जिम्मेवार है या फिर यह किसी की नाजायज संतान थी? सवाल अनेक हैं. लेकिन जवाब किसी के पास नहीं है.

हालांकि यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी महानंदा नदी में नवजात का शव बरामद होने की घटना घट चुकी है. स्थानीय लोग इस घटना से इस कदर उद्वेलित हो गए हैं कि उन्होंने अपने स्तर पर नवजात के वारिस का पता लगाना शुरू कर दिया है. बहरहाल ममता और मानवता को शर्मसार करने वाली ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो, प्रशासन के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी बनती है. ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना भी प्रशासन के लिए बडी चुनौती है. इसके लिए जरूरी है जन जागरण और अंधेरे में जी रहे लोगों को प्रकाश में लाना.

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