सिलीगुड़ी में पैकेट का दूध सब जगह मिल जाता है. सिलीगुड़ी के विभिन्न बाजारों में, गली मोहल्ले में, दुकानों पर सब जगह विभिन्न कंपनियों के पैकेट में दूध बिकता है. उन्हीं कंपनियों के पनीर और घी भी मिल जाते हैं. अलग-अलग दूध कंपनियों के दूध के दाम भी अलग-अलग होते हैं. सस्ता दूध और महंगा दूध भी बिकता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन प्लास्टिक की पन्नियों में बिकने वाला दूध कितना जानलेवा है!
नदिया में नकली दूध की फैक्ट्री का भंडाफोड़ हो जाने के बाद आप इसे आसानी से हजम नहीं कर पाएंगे. मीडिया खबरों के अनुसार इस फैक्ट्री में 20 लीटर दूध से 100 लीटर नकली दूध तैयार किया जाता था. फिलहाल बंगाल पुलिस ने दूध की फैक्ट्री को सील कर दिया है. लेकिन जो खबर मिल रही है, उसके अनुसार 20 लीटर शुद्ध दूध से 100 लीटर दूध बनाने के लिए हानिकारक रसायन मिलाए जाते थे.
ये हानिकारक रसायन स्वास्थ्य के लिए कितने खतरनाक थे, हालांकि यह जांच के बाद ही पता चलेगा. परंतु नकली दूध की फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद दूध की थैली लेने वाले लोग जरूर सावधान हो जाएंगे. दूध शरीर को हेल्दी बनाता है. दूध में पानी मिलाए जाने की बात कोई नई नहीं है. लेकिन जब दूध में हानिकारक रसायन मिलाए जाने लगे तो चिंता होनी स्वाभाविक है.
दूध में पानी मिला हो, चलेगा. क्योंकि कम से कम ऐसा दूध शरीर को नुकसान तो नहीं करेगा. लेकिन एक ऐसा दूध जिसे पीने के बाद आदमी की सेहत खराब हो जाए तो लोग दूध क्यों पियेंगे! चलिए पूरा मामला बताते हैं. पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के नवदीप थाना क्षेत्र के अंतर्गत दूध की एक फैक्ट्री काफी दिनों से चल रही थी.
फैक्ट्री के आसपास के लोग यहां से दूध लेते थे. लेकिन दूध का स्वाद और उसकी पौष्टिकता को लेकर हमेशा उनके मन में संशय रहता था. लोग आपस में चर्चा भी करते रहते थे. यह इलाका महिशुडा घोषपारा कहलाता है. यहीं कारखाना स्थित था. आरोप है कि यहां से दूध बंगाल के विभिन्न जिलों में बिक्री के लिए भेजा जाता था. लेकिन सिलीगुड़ी में इस कंपनी का पैकेट आता था या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है.
एक दिन एक ग्रामीण ने इस कारखाने के दूध का सेवन किया और वह बीमार हो गया. पता चला कि कारखाने में नकली दूध तैयार किया जाता है. कुछ दिनों में यह भी पता चल गया कि 20 लीटर दूध में छेना का पानी, हानिकारक रसायन, दवाइयां, एसिड आदि मिलाकर लगभग 100 लीटर तरल दूध बनाया जाता था. धीरे-धीरे यह बात आसपास में फैल गई. उधर कथित रूप से फैक्ट्री के उत्पाद तैयार करके पैकेट में भरकर नदिया जिले समेत बंगाल के अन्य जिलों में आपूर्ति किए जाते रहे.
धीरे-धीरे स्थानीय भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस बात का पता चला, तो उन्होंने पुलिस को इसकी जानकारी दी. भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने एक दिन इस नकली दूध फैक्ट्री में मिलावट को रंगे हाथों पकड़ने का निश्चय किया. योजना बनाकर एक दिन कुछ भाजपा कार्यकर्ता, नेता और ग्रामीण सभी कारखाने में पहुंचे. पुलिस को पहले ही इसकी जानकारी दे दी गई थी. पुलिस ने कारखाने में पहुंचकर छापेमारी की तो मौके से बड़ी मात्रा में पाउडर, दवाएं, रसायन और दूसरे तरल पदार्थ बरामद किए गए.
नवदीप थाने की पुलिस ने इन सभी संदिग्ध सामग्रियों को बरामद कर कारखाने को सील कर दिया है. फैक्ट्री से पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. पुलिस उससे पूछताछ कर रही है. व्यक्ति ने बताया है कि वह इस बारे में कुछ नहीं जानता है. फैक्ट्री मालिक का रिश्तेदार खुद को बता रहा है. उधर स्थानीय भाजपा नेता शशधर न॔दी ने कहा है कि दूध की नकली फैक्ट्री लंबे समय से यहां चल रही थी.
पुलिस ने फैक्ट्री के बाहर जिस साइन बोर्ड को लगा देखा, उसे देखकर तो पुलिस भी हैरान रह गई. क्योंकि साइन बोर्ड पर नवदीप घोषपारा दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड और द किसान कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर यूनिट लिमिटेड का बोर्ड लगा हुआ था. इस पर पंजीकरण संख्या भी अंकित थी. हालांकि इन सरकारी संस्थाओं का दूध की फैक्ट्री से क्या संबंध है, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है.. पुलिस ने पूरे मामले की छानबीन शुरू कर दी है.
पुलिस इस पूरे मामले को विभिन्न एंगल से देख रही है. सर्वप्रथम रासायनिक उत्पादों को जांच के लिए भेज दिया गया है. रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा कि दूध में जो मिलावटी सामान डाले जाते थे, वह स्वास्थ्य के लिए कितने खतरनाक थे. जो भी हो, इस घटना के उजागर हो जाने के बाद भविष्य में दूध का पैकेट खरीदते समय पूरी सावधानी बरतें.
