शीतलहर और कड़ाके की ठंड के बावजूद सिलीगुड़ी से लेकर दार्जिलिंग तक चुनावी सरगर्मी तेज है. सिलीगुड़ी में राजनीतिक दल 2026 के चुनाव को लेकर रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं तो पहाड़ में विभिन्न क्षेत्रीय संगठन आगामी विधानसभा चुनाव में अपना राजनीतिक भविष्य तलाश रहे हैं.
पहाड़ के क्षेत्रीय संगठनों के नेता बड़ी पार्टियों के साथ जाना चाहते हैं या फिर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने के लिए प्रयासरत हैं. पहाड़ के क्षेत्रीय दलों में गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा, भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा और इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट प्रमुख हैं. पहाड़ में तीन विधानसभा क्षेत्र हैं. दार्जिलिंग, कर्सियांग और कालिमपोंग.
अभी से ही विभिन्न छोटे संगठनों की ओर से रणनीतिक योजनाएं बननी शुरू हो गई हैं. जबकि भारतीय जनता पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, वाममोर्चा और कांग्रेस जैसे बड़े-बड़े दलों की ओर से इन तीन सीटों के लिए उम्मीदवारों की तलाश का काम भी शुरू हो चुका है. इसमें कोई शक नहीं है कि भाजपा इन तीनों ही सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. इसमें भी कोई शक नहीं है कि दार्जिलिंग सीट के लिए नीरज जिंबा भाजपा के उम्मीदवार होंगे. यहां भाजपा के उम्मीदवारों के चयन के लिए राजू बिष्ट के नेतृत्व में पूरा बीजेपी पैनल काम कर रहा है.
गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा भाजपा उम्मीदवार का समर्थन करेगा. पार्टी की ओर से पहले ही स्पष्ट कर दिया गया है कि गोरामुमो भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगा. नीरज जिंबा दार्जिलिंग से भाजपा के उम्मीदवार हो सकते हैं. गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा की ओर से पहाड़ में राजनीतिक कार्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं. लोकसभा में भाजपा का एक अन्य सहयोगी दल गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने हालांकि अभी तक अपना पत्ता नहीं खोला है, परंतु यह कयास लगाया जा रहा है कि गोरखा जन मुक्ति मोर्चा भी भाजपा का समर्थन करेगा. विमल गुरुंग के शब्दों में भी ऐसा संकेत मिल रहा है.
देखा जाए तो उम्मीदवारों को लेकर भाजपा की पहले से चली आ रही रणनीति यथावत रहने वाली है. लेकिन पहाड़ में सबसे बड़ी समस्या तृणमूल कांग्रेस की हो सकती है. तृणमूल कांग्रेस और अनित थापा की पार्टी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा ने अपना रुख साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी पहाड़ की तीनों विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी. सूत्रों ने बताया कि भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा की ओर से तीनों ही सीटों के लिए अपने उम्मीदवार के नाम भी तय कर लिए गए हैं. GTA के चीफ पीआरओ शक्ति प्रसाद शर्मा ने कहा है कि बीजेपीएम का किसी दल के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा. ऐसे में टीएमसी के लिए चिंता की बात जरूर है.
हालांकि भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा अपने पुराने सिद्धांत पर चल रहा है कि राज्य सरकार का सहयोग जीटीए क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए जरूरी है. वाम मोर्चा और कांग्रेस के बीच गठबंधन होगा या नहीं, यह तो आने वाला समय बताएगा. पर समझा जा रहा है कि दोनों ही दल मिलकर पहाड़ में संयुक्त उम्मीदवार उतार सकते हैं. कांग्रेस और वाममोर्चा के पदाधिकारी और प्रदेश नेताओं की इस संबंध में एक बैठक भी पहाड़ में चल रही है. इसमें कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर लोकसभा में दार्जिलिंग के पूर्व प्रत्याशी मनीष तमांग भी शामिल हैं.
पहाड़ के क्षेत्रीय दलों में भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के बाद इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट दूसरी प्रमुख पार्टी है, जिसके नेता अजय एडवर्ड हैं. पहाड़ में अजय एडवर्ड का विकास कार्य दिखता जरूर है. उन्हें पुल नेता के रूप में भी जाना जाता है. अजय एडवर्ड की पार्टी इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट ने आगामी विधानसभा चुनाव में पहाड़ की तीनों विधानसभा सीटों के अलावा तराई Dooars की अन्य 7 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है. अजय एडवर्ड चाहते हैं कि गोरखा, आदिवासी और राजवंशी सभी को एक साथ लेकर चुनाव लड़ा जाए.
इस तरह से पहाड़ में विभिन्न क्षेत्रीय दलों की ओर से चुनावी रणनीति बनाई जा रही है. हालांकि झंकार मानते हैं कि चुनाव से ठीक पूर्व क्षेत्रीय दल अपना नफा नुकसान देखकर पाला भी बदल सकते हैं और वे बड़े दलों के उम्मीदवारों का समर्थन कर सकते हैं. पूर्व का इतिहास भी कुछ इसी बात की ओर इशारा करता है. जैसे-जैसे चुनाव करीब आता जाएगा, क्षेत्रीय दलों की ओर से विकल्प की तलाश भी शुरू हो जाएगी. अगर कुछ क्षेत्रीय संगठनों की बात ना करें तो इतना तो पक्का है कि छोटे उभर रहे दल किसी न किसी बड़े दल का दामन थाम लेंगे.

