दिल्ली में हाल ही में संपन्न हुए कथित त्रिपक्षीय वार्ता को लेकर पहाड़ में राजनीतिक नफा नुकसान की बात नेता करने लगे हैं. कुछ नेताओं की माने तो यह कोई त्रिपक्षीय वार्ता ही नहीं थी,बल्कि गोरखाओं की आंखों में धूल झोंकने का काम किया गया. कुछ लोगों ने इसे एक तमाशा माना है. हालांकि कई क्षेत्रीय नेता भविष्य में होने वाली त्रिपक्षीय वार्ता को लेकर उम्मीद से भरे हैं.
अगली त्रिपक्षीय वार्ता कुछ बड़े स्तर पर होने वाली है. इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भाग ले सकते हैं. इसलिए कई लोगों को लगता है कि अगली त्रिपक्षीय वार्ता में कुछ ठोस परिणाम सामने आ सकते हैं. वर्तमान वार्ता में केंद्र सरकार और पहाड़ के क्षेत्रीय दलों के कुछ नेताओं ने ही भाग लिया था. राज्य सरकार का इसमें कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ था.
पहाड़ का ऐसा कोई क्षेत्रीय दल नहीं है, जिसने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया न दी हो. भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के केंद्रीय उपाध्यक्ष सतीश पोखरेल ने केंद्र पर आरोप लगाया है कि भाजपा की सरकार गोरखाओं को बेवकूफ बना रही है. उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार गोरखाओं को पहचान देने के लिए तैयार नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि 2026 में होने वाले बंगाल विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर यह वार्ता बुलाई गई थी जो बुरी तरह फ्लॉप हो गई.
भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा कर्सियांग महकमा कमेटी के प्रवक्ता अनूप रामू दामू ने आरोप लगाया है कि पहाड़ की जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा यह नाटक था. उन्होंने कहा है कि एक बार फिर केंद्र सरकार ने पहाड़, तराई और Dooars में रहने वाले गोरखा समुदाय की आंखों में धूल झोंकी है. दिल्ली में दरअसल एक राजनीतिक सभा हुई थी. इसके अलावा कुछ नहीं था.
इंडियन गोरखा जनशक्ति फ्रंट के संयोजक अजय एडवर्ड ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि हर-चार साल में केंद्र में एक भव्य खेल आयोजित किया जाता है. यह फुटबॉल के मैदान पर नहीं बल्कि गोरखाओं और केंद्र सरकार के बीच खेला जाता है. उन्होंने कहा कि यह पहाड़ का राजनीतिक विश्व कप है, जहां सपने बह रहे हैं. मांगे आगे पीछे हो रही है. लेकिन कोई गोल नहीं हो रहा है. हालांकि भाजपा और सहयोगी दलों की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया सामने आ रही है.
दार्जिलिंग विधानसभा क्षेत्र के विधायक नीरज जिंबा ने कहा है कि गोरखाओं की समस्या के समाधान को लेकर नई दिल्ली में त्रिपक्षीय वार्ता उत्साह पूर्ण वातावरण में संपन्न हुई है. उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनका कोई प्रतिनिधि इस बैठक में भाग नहीं ले सका. नीरज जिंबा ने कहा कि बैठक में दो मुख्य मांगों पर विचार किया गया. पहली मांग थी कि दार्जिलिंग तराई और Dooars क्षेत्र के लिए एक स्थाई राजनीतिक समाधान हो तथा दूसरी मांग थी कि पश्चिम बंगाल की 11 जनजातियां और सिक्किम की 12 जनजाति को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल की जाए.
राजू बिष्ट और उनके सहयोगी दलों के कुछ नेता राज्य सरकार पर ठीकरा फोड़ रहे हैं. अगली बैठक की रणनीति तैयार की जा रही है. यह बैठक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हो सकती है. इसकी तैयारी के लिए सभी तरह के प्रयास किये जा रहे हैं. बैठक में राज्य सरकार का प्रतिनिधि शामिल हो, इसके लिए भी बात हो रही है. इसके साथ ही पहाड़ के विभिन्न क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधि भी बैठक में भाग ले सकें, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा. लेकिन अगली बैठक कब होगी, इसकी रणनीति और तारीख केन्द्र स्तर पर ही बनाई जाने वाली है.