पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के मामले में इडी की जांच चल रही है. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, अधिकारियों को नई-नई जानकारियां हाथ लग रही हैं. यहां विभिन्न क्षेत्रों में जो भ्रष्टाचार उजागर हुआ है, उसकी जांच करते हुए इडी ने पाया है कि राजनेता बड़े होशियार हैं. उन्होंने व्यापारियों और उद्योगपतियों को निशाना बनाया और उनके माध्यम से कमाई की है. मजे की बात तो यह है कि उन्होंने अपनी सारी कमाई उनके पास ही जमा करा दी है, ताकि जांच एजेंसियों की नजर में वे बेदाग साबित हो सकें.
इडी ने भ्रष्टाचार के जरिए अर्जित की गई बेहिसाब संपत्ति के मामले में अपनी जांच कार्रवाई तेज करते हुए 25 ऐसे बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों की सूची बनाई है, जिनके संबंध प्रभावशाली राजनेताओं से है. आरोप है कि पिछले 10 वर्षों में इन कारोबारियों की संपत्ति में 500% तक की जबरदस्त वृद्धि हुई है. आयकर विभाग की प्राथमिक जांच और इडी की ईसीआईआर रिपोर्ट के आधार पर यह कहा जा रहा है कि इस धन का प्रयोग आगामी बंगाल विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है.
इडी की सूची में बंगाल के जिन 25 बड़े व्यापारियों और उद्योगपतियों को शामिल किया गया है, उनमें से सिलीगुड़ी के कितने उद्योगपति और व्यापारी हैं, हालांकि अभी इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है, परंतु यह समझा जाता है कि इस सूची में सिलीगुड़ी के कुछ व्यापारी भी शामिल हो सकते हैं. यह संदेह इसलिए भी हो रहा है कि पिछले दिनों इडी ने यहां के कुछ शॉपिंग मॉल, रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारी ठिकानों पर रेड डाला था.
वर्तमान में इडी की जांच का मुख्य केंद्र भी यही है. हाल ही में एक प्रमुख शॉपिंग मॉल के मालिक के आवास पर 24 घंटे से अधिक समय तक चली छापेमारी में इडी ने भारी मात्रा में बेनामी संपत्ति के दस्तावेज और अवैध लेनदेन के सबूत बरामद किए थे. इससे पूर्व कोयला तस्करी के एक मामले की नए सिरे से जांच शुरू होने पर 12 अन्य व्यापारियों के नाम भी सामने आए थे. अधिकारी मान रहे हैं कि भ्रष्ट तरीकों से करोड़ों रुपए कमाए गए और उन्हें इन व्यापारियों और उद्योगपतियों को दे दिया गया, ताकि वे इस काली कमाई को सफेद बना सकें!
