पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब तृणमूल कांग्रेस ने आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर से जुड़ा एक कथित गुप्त वीडियो जारी किया। इस वीडियो में दावा किया गया है कि कबीर ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के नाम पर भारतीय जनता पार्टी से ₹1000 करोड़ की डील की मांग की थी। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
तृणमूल कांग्रेस ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि हुमायूं कबीर ने न केवल बीजेपी से भारी रकम की मांग की, बल्कि मुस्लिम वोटों को प्रभावित करने के लिए एक रणनीति भी बनाई। पार्टी का दावा है कि वीडियो में कबीर खुद यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि उन्होंने ₹1000 करोड़ में से ₹300 करोड़ अग्रिम के रूप में मांगे थे।
वीडियो में कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि कबीर ने बाबरी मस्जिद जैसे संवेदनशील मुद्दे को उठाकर मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को प्रभावित करने की योजना बनाई। इसके साथ ही यह दावा भी सामने आया कि उनके संपर्क सीधे PMO तक हैं और इस पूरे मामले में कुछ बड़े राजनीतिक नाम जुड़े हो सकते हैं।
तृणमूल ने आरोप लगाया कि इस कथित नेटवर्क में पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का नाम भी सामने आया है। पार्टी ने इस पूरे मामले की गहन जांच की मांग करते हुए कहा कि यह केवल एक राजनीतिक मामला नहीं, बल्कि लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तृणमूल नेता फिरहाद हकीम ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को इस तरह ‘बेचना’ बेहद शर्मनाक है। क्या लोगों की आस्था सिर्फ सौदेबाजी का साधन बन गई है?” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि बीजेपी इस तरह के “गुप्त समझौते” कर लोकतंत्र को कमजोर कर रही है।
हालांकि, इन सभी आरोपों को हुमायूं कबीर ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी है और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है। कबीर ने चेतावनी दी कि अगर तृणमूल अपने आरोप साबित नहीं कर पाती, तो वे ₹2000 करोड़ का मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।
इस बीच, नरेंद्र मोदी ने भी उसी दिन हल्दिया की रैली में तृणमूल पर निशाना साधा, जिससे राज्य की राजनीतिक गर्मी और बढ़ गई। हालांकि, उन्होंने सीधे इस वीडियो विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं की।
पूरे मामले ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। एक तरफ जहां तृणमूल इसे बड़ा “घोटाला” बता रही है, वहीं विपक्ष इसे साजिश करार दे रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इस कथित वीडियो की सत्यता की जांच होगी और अगर हां, तो इससे क्या खुलासे सामने आएंगे।
फिलहाल, यह मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है, लेकिन PMO का नाम सामने आने से इसकी संवेदनशीलता और भी बढ़ गई है।
