April 3, 2025
Sevoke Road, Siliguri
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बागडोगरा हवाई अड्डे का नाम ‘चिला राय’ या ‘सुवास घीसिंग’ किसके नाम पर होगा?

बागडोगरा हवाई अड्डे के नामकरण को लेकर पहाड़ से लेकर समतल और Dooars तक चर्चा शुरू हो गई है. वर्तमान में बागडोगरा हवाई अड्डे को आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है. जब यह संपूर्ण रूप से नवनिर्मित होगा, तब यह अंतरराष्ट्रीय बागडोगरा हवाई अड्डे के रूप में परिणत होगा. उस स्थिति में इसका कोई ना कोई नामकरण तो होगा ही. केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए पहाड़ से लेकर समतल और Dooars तक के नामचीन स्वर्गीय नेताओं के नाम पर बागडोगरा हवाई अड्डे का नामकरण करने की मांग की जा रही है.

आपको याद होगा कि कुछ समय पहले पहाड़ के विभिन्न क्षेत्रीय संगठनों के नेताओं के द्वारा बागडोगरा हवाई अड्डे का नाम सुभाष घीसिंग के नाम पर करने की मांग की गई थी. आज भी पहाड़ के नेता अपनी मांग पर अड़े हुए हैं. उन्होंने नागरिक विमानन मंत्रालय और केंद्र सरकार से बागडोगरा हवाई अड्डे का नाम सुभाष घीसिंग के नाम पर करने की मांग कर रखी है और इस संबंध में ज्ञापन भी दे रखा है. केंद्र सरकार और नागरिक विमानन मंत्रालय ने पहाड़ के नेताओं को आश्वासन भी दिया है.ठीक इसी तरह का आश्वासन मंत्रालय ने सिलीगुड़ी के भाजपा विधायक शंकर घोष और उनकी टीम को दिया है.

शंकर घोष ने बागडोगरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम बदलकर विश्व महाबीर चिला राय के नाम पर करने की मांग की है. उन्होंने केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्री को एक पत्र लिखा लिखा है. अपने पत्र में विधायक शंकर घोष ने लिखा है कि बागडोगरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा का नाम बदलकर विश्व महाबीर चिला राय अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा किया जाए. उन्होंने अपने पत्र में Dooars और समतल के विभिन्न सामाजिक संगठनों, जिनमें तराई राजवंशी चेतना मंच, वीर चिला राय सेना, राजवंशी जागरण मंच आदि का उल्लेख करते हुए कहा है कि इन संगठनों की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए.

इसमें कोई शक नहीं है कि बागडोगरा में आधुनिक रूप से जो हवाई अड्डा बन रहा है, हवाई अड्डे की भूमि का अधिकांश हिस्सा राजवंशी समुदाय के द्वारा दान में दिया गया है. इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि बागडोगरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के निर्माण में राजवंशी समुदाय का भारी योगदान है. इसलिए वे भी सम्मान के हकदार हैं. नागरिक विमानन मंत्रालय और केंद्र सरकार उनकी उपेक्षा नहीं कर सकती.

दूसरी तरफ चिल्ला राय और सुभाष घीसिंग की बात करते हैं. पहाड़ में सुभाष घीसिंग गोरखालैंड के प्रतीक माने जाते हैं. उन्होंने गोरखालैंड के लिए लंबी लड़ाई लड़ी. गोरखा लैंड का सपना साकार करने के लिए उन्होंने अपनी जान तक की बाजी लगा दी थी. लेकिन उनके जीते जी यह सपना पूरा नहीं हो सका. आज पहाड़ की जितनी भी क्षेत्रीय पार्टियां हैं, उन सभी पार्टियों का सिद्धांत सुभाष घीसिंग के सिद्धांत और सपनों पर आधारित है. पहाड़ की क्षेत्रीय पार्टियां चाहती हैं कि भले ही बदले हालात में गोरखालैंड नहीं हो सकता, परंतु अगर बागडोगरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम सुभाष घीसिंग के नाम पर रखा जाए, तो यह उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. इसके साथ ही पहाड़ के मतदाताओं का उनकी पार्टी में भरोसा बढ़ेगा. पहाड़ के नेता समझते हैं कि सुभाष घीसिंग का नाम लेने से गोरखाओं का उनके प्रति विश्वास बढ़ेगा.

दूसरी तरफ वीर चिला राय एक महान हस्ती थे. उनका संबंध पश्चिम बंगाल और असम से भी जुड़ा है. उनका जन्म 1510 के लगभग हुआ था. वे एक पराक्रमी सेनापति थे. इतना ही नहीं वे विद्वान और संस्कृत भाषा के जानकार भी थे. उन्होंने कई ग्रन्थों की रचना भी की. कभी उत्तर पूर्व के अधिकांश क्षेत्रों में चिला राय का दबदबा था और कोच राजवंश की रक्षा और उसे समृद्ध बनाने में उनके योगदान को याद किया जाता है. चिला राय के त्याग और योगदान को देखते हुए केंद्र सरकार निश्चित रूप से उनका सम्मान करना चाहेगी.

बहरहाल बागडोगरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नामकरण का मामला आसान नहीं है. केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन मंत्रालय ना तो गोरखाओं की नाराजगी मोल ले सकती है और ना ही उत्तर बंगाल में फैले विशाल आबादी के राजवंशी समुदाय की भावनाओं को ठुकरा सकती है. ऐसे में केंद्र सरकार को क्या करना चाहिए? बागडोगरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नामकरण चिला राय के नाम पर करना चाहिए या फिर सुभाष घीसिंग के नाम पर? आपकी क्या राय है?

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