विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा! तिरंगा भारत की पहचान है. भारत की आन और शान है. यह प्रत्येक देशवासी का गौरव है. जब तिरंगा ध्वज आसमान में फहरता है, तो लोग गर्व से भर उठते हैं. भारतीय ध्वज को जान से भी बढ़कर सम्मान दिया जाता है. लेकिन जब उसी राष्ट्रीय ध्वज को कचरे में, रास्ते में, सड़क पर इधर-उधर फेक दिया जाता है, तो कितना दुख होता है!
रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने एक नया ब्रांड पानी की बोतल को लांच किया है. इसका नाम इंडिपेंडेंस बोतल रखा गया है और बोतल पर राष्ट्रीय ध्वज का प्रतीक चिह्न दिया गया है. रिलायंस के इस नए ब्रांड बोतल का पानी पीने में कैसा है, सवाल यह नहीं है. बल्कि सवाल यह है कि लोग इंडिपेंडेंस बोतल का पानी पीकर खाली बोतल को सड़कों पर, कचरो में या इधर-उधर डाल देते हैं. इस तरह से राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा भी धूल धूसरित होती रहती है. क्या यह राष्ट्रीय ध्वज का अपमान नहीं है?
वर्तमान में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की इंडिपेंडेंस बोतल सुर्खियों में है. बोतल पर राष्ट्रीय ध्वज का निशान होने से लोगों का स्वाभिमान जागृत होने लगा है.अब लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर रिलायंस कंपनी ने इंडिपेंडेंस बोतल बनाकर और उस बोतल पर राष्ट्रीय ध्वज का रंग व लेवल लगाकर क्या साबित करने की कोशिश की है? क्योंकि किसी भी कंपनी की पानी की बोतल को पानी पीने के बाद उसे कचरे में ही डाल दिया जाता है.
ऐसी बोतल, जिस पर राष्ट्रीय ध्वज का निशान या र॔ग हो, अगर उसे कचरे में या सड़क पर या इधर-उधर जमीन पर डाल दी जाए तो कैसा लगेगा? आखिर रिलायंस कंपनी ने क्या सोच कर राष्ट्रीय ध्वज के निशान का इस्तेमाल किया है? इस पर देश भर के बुद्धिजीवियों की आलोचना भी शुरू हो गई है. असम जातीयतवादी छात्र युवा परिषद की केंद्रीय समिति के सदस्य जीतू फुकन ने कहा है कि बोतल बंद पानी इंडिपेंडेंस द्वारा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के तिरंगे का उपयोग उचित नहीं है.
उन्होंने कहा है कि बोतल बंद पानी का उत्पादन करना और उसे बाजार में बेचना कोई गलत बात नहीं है. लेकिन भारत के राष्ट्रीय ध्वज जैसे चिन्ह का उपयोग अनुचित है. लोग उन्हें खरीदेंगे और पानी पीने के बाद बोतलों को अपनी मर्जी के मुताबिक कहीं भी फेंक देंगे. इससे राष्ट्रीय ध्वज के रंगों का अपमान होगा. फूकन ने कहा है कि इस मामले पर जल्द से जल्द गौर किया जाना चाहिए.
आपको बताते चलें कि रिलायंस कंपनी ने गुवाहाटी में एक नया बॉटलिंग प्लांट खोला है, जो कैंपा कोला, कैंपा ऑरेंज, कैंपा लेमन, पावर अप, इंडिपेंडेंस तथा प्योर वाटर ब्रांड के तहत पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर का निर्माण कर रहा है. यह कोई पहला मौका नहीं है जब कंपनियां मार्केटिंग के लिए कभी राष्ट्रीय ध्वज तो कभी हिंदू देवी देवताओं के प्रतीक चिह्न या तस्वीर लगाकर अपना ब्रांड जारी करती है.
कुछ समय पहले ही देखा गया था कि एक कंपनी के द्वारा गुलाल, अगरबत्ती आदि के पैकेट पर देवी देवताओं के चित्र छपवाकर बाजार में उत्पादों को बिक्री के लिए उतारा गया था. वास्तव में कंपनी का मकसद मार्केटिंग करना होता है. अपने उत्पाद का ब्रांडिंग और व्यापक प्रचार करना होता है. लेकिन वे कंपनियां भूल जाती हैं कि ब्रांडिंग की आड़ में उपभोक्ताओं की धार्मिक आस्था का खिलवाड़ किया जाता है. अगरबत्ती हो अथवा पानी की बोतल, उपयोग के बाद उसे कचरे में ही फेंका जाता है.
ऐसे में भगवान की मूर्ति हो या राष्ट्रीय ध्वज, क्या उनका अपमान नहीं होता है? इसके लिए कौन जिम्मेवार है? आखिर कंपनियां अपना प्रोडक्ट लॉन्च करते हुए प्रतीक चिह्नों का इस्तेमाल करते समय लोगों की भावनाओं का ख्याल क्यों नहीं रखती? राष्ट्रीय ध्वज तो बहरहाल राष्ट्र का मसला है. ऐसे में भारत सरकार को जरूर इस पर गौर करना चाहिए और कंपनियों को स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि वह किसी भी प्रकार के उत्पाद को लॉन्च करते समय राष्ट्र और राष्ट्र के लोगों की भावनाओं और धर्म का सम्मान करें. जनता को भी ऐसे उत्पादों का बहिष्कार करना चाहिए, जिससे उनका धर्म, राष्ट्रीयता और संस्कृति का अपमान होता हो.