April 1, 2026
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लॉकडाउन लगे या ना लगे, लेकिन आपके जीवन का ‘लॉकडाउन’ लगने वाला है!

आमतौर पर 1 अप्रैल को अप्रैल फूल मनाया जाता है.पर वर्तमान स्थितियों में अप्रैल फूल नहीं, बल्कि इन्फ्लेशन डे कहना ज्यादा अच्छा होगा. अप्रैल का महीना आपकी जेब पर भारी पड़ने लगा है. मई का महीना तो आपकी जान ही निकाल देगा. आप ऐसा महसूस करेंगे जैसे कि आपके जीवन का ‘लॉकडाउन’ लगने वाला है. इसी महीने से महंगाई का करंट धीरे-धीरे बढ़ रहा है और अगले कई महीनों तक आपको झटका देता रहेगा!

दवाइयां महंगी हो गई. इलाज महंगा हो गया. एलपीजी गैस महंगी हो गई. एटीएम से लेनदेन महंगा हो गया. शेयर बाजार में ट्रेडिंग महंगी हो गई. आज से कार खरीदना भी महंगा हो गया. हवाई यात्रा महंगी हो गई. इंडियन ऑयल ने एटीएफ की कीमतों में ऐतिहासिक वृद्धि कर दी. एक तरफ पूरी दुनिया में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में 35% से लेकर 50% तक की वृद्धि हो गई है, वहीं भारत में अब तक कोई वृद्धि नहीं हुई है. आखिर क्यों?

विशेषज्ञों और जानकार कहते हैं, चुनाव होने दीजिए. फिर देखिए पेट्रोल और डीजल में कैसी आग लगती है! एक तो पेट्रोल और डीजल मिलना ही दुर्लभ हो जाएगा. यह अमृत की तरह ही होगा. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड के सचिव अंजन कुमार मिश्रा बताते हैं कि भारत के पास कच्चे तेल के भंडार केवल 20 से 40 दिनों के लिए ही हैं और इसे कई महीनो तक बनाए नहीं रखा जा सकता है.

कहते हैं कि तूफान आने से पहले वातावरण में अजीब सी खामोशी छा जाती है. भारत में लॉकडाउन भले ही ना लगे, लेकिन लॉकडाउन से भी बदतर स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हो जाइए. भारत सरकार ने तो पहले ही कुछ इसी तरह का संकेत दे दिया था. आज अप्रैल महीने के पहले ही दिन दवाइयां महंगी हो गई. पैरासिटामोल जो घर-घर में बुखार कम करने की एक लोकप्रिय दवा है, उसका दाम आंशिक तौर पर बढ़ा दिया गया है. यह सब पेट्रो उत्पादों की किल्लत के कारण हुआ है.

क्योंकि दवाइयां बनाने के लिए कच्चा माल नहीं मिल रहा है. भारत दवाइयों के लिए जड़ी बूटियां खाड़ी देशों से मंगाता है. फिलहाल आयात बंद है. मेडिकल स्टोर्स और फार्मा कंपनियां पुराने स्टॉक ही निकाल रही है. जब नया स्टॉक आएगा, तब दवाइयों का दाम आपकी चीख निकालने वाला होगा. वैसे भी दवाइयों का दाम बढ़ाने को मंजूरी मिल चुकी है.

खाड़ी युद्ध कब रुकेगा, खुद ट्रंप भी नहीं जानते. ट्रंप के बयान भी अजीबो गरीब होते हैं. युद्ध समाप्त करने की बात शुरू होती है पर अगले पल ही जंग शुरू हो जाती है. खाड़ी युद्ध ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है. अमेरिका से लेकर सभी पश्चिम देश इस बड़े संकट का सामना कर रहे हैं. एशियाई देशों का तो और भी बुरा हाल है. पाकिस्तान में तो लॉकडाउन लगा है. बांग्लादेश से लेकर श्रीलंका, जापान सभी देशों में वर्क फ्रॉम होम से लेकर आवश्यकता को घटाने का सिलसिला काफी पहले से ही शुरू हो चुका है.

अमेरिका में पेट्रोल की कीमत प्रति गैलन 4 डॉलर के पार पहुंच चुकी है. वहां पेट्रोल की कीमत में कम से कम 35% से लेकर 50% की बढ़ोतरी हुई है. एक महीने पहले यह $3 से भी कम थी. पश्चिम बंगाल समेत देश के कई राज्यों में चुनाव चल रहा है. चुनाव के दौरान डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ा देने से मतदाताओं पर इसका विपरीत असर पड़ता है. चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और यह किसी भी सरकार के लिए नकारात्मक हो सकती है. यही कारण है कि तेल कंपनियां चुनाव तक इंतजार कर रही हैं. उसके बाद तो महंगाई का ऐसा झटका मिलेगा जो आपको चारों खाने चित कर सकता है.

आम जनता को भी इसका एहसास होने लगा है. आज से महंगाई का डोज मिलने लगा तो अगले महीने तक उनकी जेब की चिंता भी होने लगी है. कई लोग तो यह कहते भी नजर आते हैं कि काश! यह महीना बीते ही नहीं. कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि दो-चार महीने के लिए चुनाव ही टल जाए! जब तक चुनाव नहीं हो जाता है, तब तक लोगों को राहत है. लेकिन जैसे ही चुनाव होगा, महंगाई का एक बार एक साथ डबल डोज आपके जीवन को लॉकडाउन में लपेट ले तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी!

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