सिलीगुड़ी नगर निगम का वार्ड नंबर 5 एक हिंदी भाषी वार्ड के रूप में ज्यादा चर्चित है. यहां हिंदी भाषी लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है. हालांकि इस वार्ड में सभी धर्म और वर्गों के लोग निवास करते हैं. यहां बांग्ला भाषी, नेपाली भाषी भी अच्छी तादाद में हैं. परंतु उत्तर प्रदेश और बिहार की यहां सबसे ज्यादा आबादी है. मिश्रित संस्कृति का यह इलाका इन दिनों नशा हंगामा, असामाजिक क्रियाकलाप, हिंसा, मारपीट, आदि के कारण सुर्खियों में है.
इसी पांच नंबर वार्ड में गंगानगर और संतोषी नगर भी आते हैं. इन दोनों ही इलाकों में हिंदी भाषियों की तादाद सर्वाधिक है. बिहार और उत्तर प्रदेश से रोजी रोटी कमाने आए लोग अब यही बस गए हैं और उन्होंने यहां की संस्कृति को अपना लिया है. छोटे मोटे काम करके अपना गुजारा करने वाले बहुसंख्यक लोग कच्चे पक्के मकानों में रहते हैं. लेकिन उनकी माली हालत अच्छी नहीं है. शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े इस समाज के बहुसंख्यक युवा इन दिनों नशे की गिरफ्त में आकर अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं.
इन दोनों ही इलाकों में सांझ ढलते ही युवाओं की एक बड़ी संख्या शराब और असामाजिक क्रियाकलापों में लग जाती है. नजदीक में ही महानंदा का विशाल खाली भूभाग है, जहां देर रात तक पीने और पिलाने का कार्यक्रम चलता है. कभी-कभी उनकी आपस में मारपीट भी हो जाती है. सूत्र बताते है कि इन इलाकों में सभी तरह के नशे का पान करना और नशे का व्यापार करना होता है. समय-समय पर पुलिस की रेड पड़ती है तो कुछ दिनों तक सब शांत रहता है.लेकिन उसके बाद फिर से उनका धंधा शुरू हो जाता है.
किसी समय सिलीगुड़ी नगर निगम के पांच नंबर वार्ड का यह इलाका महानंदा नदी में समाया हुआ था. यहां जंगल, झाड़ियां और नदी बहती थी. वाम मोर्चा शासन की कथित उदारता के चलते यहां आबादी बसी. बिहार, उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों से रोजी-रोटी की तलाश में आए लोगों ने यहां अस्थाई रूप से लकड़ी और काठ का घर बनाकर रहना शुरू कर दिया.
आज यह इलाका काफी विकसित हो चुका है. यहां बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें बन गई है. मंदिर और सामुदायिक भवन भी हैं. यहां कई क्लब भी हैं. सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से यह इलाका काफी समृद्ध हो गया है. इलाके में सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना बहा रहे श्री सालासर दरबार और खाटू श्याम मंदिर भी है. पर इन सबके बावजूद यहां के गुमराह होते युवाओं ने एक अपसंस्कृति को जन्म दिया है, जिसके चलते गंगानगर और संतोषी नगर की वास्तविक चमक फीकी पड़ती जा रही है.
आए दिन यहां नशेड़ी युवकों में मारपीट, दादागिरी और उसे नहीं रोकने के लिए मजबूर बुद्धिजीवी लोगों की खामोशी, पुलिस की घूमती गाड़ियां, बहुत कुछ कहती हैं. कई सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग दिनों दिन खराब होती जा रही अप संस्कृति को लेकर चिंतित जरूर है और उन्होंने प्रशासन से गुहार भी लगाई है. लेकिन अब तक कुछ हुआ ही नहीं. बाद में वे भी खामोश होकर बैठ गए. कुछ युवाओं के चलते यह पूरा इलाका बदनाम हो रहा है.
आपको याद होगा कि होली के दूसरे दिन इसी पांच नंबर वार्ड के कुछ युवा एक बाइक पर सवार होकर सिलीगुड़ी जंक्शन पहुंचे और वहां उन्होंने बीच सड़क पर अपनी गाड़ी खड़ी कर दी. जब ट्रैफिक कांस्टेबल ने उन्हें समझाने की कोशिश की तो उन्हीं में से एक लड़के ने उसकी बेल्ट से पिटाई कर दी. इस मामले में पुलिस ने दो लड़कों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल पहुंचा दिया है. वे सभी नशे में थे. इस तरह से संतोषी नगर से लेकर गंगानगर तक का इलाका अपराध और असामाजिक क्रियाकलापों के कारण ज्यादा चर्चा में रहता है. इसकी पृष्ठ भूमि में नशा मुख्य रूप से जिम्मेदार है.
युवाओं के बीच पीने का एक बहाना चाहिए और जब होली जैसे त्योहार आता है तो यहां दारू की नदियां बहने लगती है. शराब के नशे में गाली गलौज, मारपीट,हिंसा एक सामान्य घटना है. पिछले दिनों होली के दिन इसी तरह की घटना को कुछ नशेडी लड़कों ने अंजाम दिया था. बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को शांत कराया. अब समय आ गया है कि सिलीगुड़ी प्रशासन संतोषी नगर और गंगानगर की वास्तविक चमक को लुप्त होने से बचाए और सभी तरह के कदम उठाए, ताकि सिलीगुड़ी के मानचित्र में वार्ड नंबर 5 के ये इलाके अपनी नैसर्गिक और पुरातन अनुभूति को फिर से आत्मसात कर सके. नशेडी लड़कों को जेल भेजने से बेहतर है कि उन्हें नशे से अलग करने के लिए उपाय किए जाएं और गुमराह लड़कों के मार्गदर्शन के लिए पुलिस प्रशासन को काउंसलिंग का विकल्प भी अपनाना चाहिए.
