काफी समय से मीडिया की सुर्ख़ियों से दूर रहे आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक तथा विधायक हुमायूं कबीर के 6 दिसंबर को बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखने तथा 30 किलोमीटर तक लंबा हाइवे जाम करने की धमकी भरे बयान को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.
हुमायूं कबीर ने कहा है कि वह 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की न केवल नींव रखेंगे बल्कि इसके साथ ही रेजी नगर से लेकर बरहमपुर तक 30 किलोमीटर तक लंबा हाईवे जाम करेंगे. अगर किसी में या पश्चिम बंगाल सरकार में हिम्मत है तो रोक कर दिखाए. मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए हुमायूं कबीर ने यह बयान दिया था. उनके बयान के जवाब में प्रदेश भाजपा ने कहा है कि अगर हुमायूं कबीर ने नेशनल हाईवे छूने की कोशिश की तो अंजाम बुरा होगा.
प्रदेश भाजपा नेता और केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने हुमायूं कबीर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर हुमायूं कबीर ने अराजकता फैलाने की कोशिश की या फिर नेशनल हाईवे जाम करने की कोशिश की तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने इशारा किया है कि इसके लिए हुमायूं कबीर को गिरफ्तार किया जा सकता है और उनकी जमानत भी नहीं होगी.
साफ संकेत है कि हुमायूं कबीर शक्ति प्रदर्शन करना चाहते हैं. उनके इस बयान से राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है. वे सरकार को अपनी और अपने समर्थकों की ताकत दिखाना चाहते हैं. अपने बयानों से हुमायूं कबीर मुस्लिम भावना को भड़काना चाहते हैं वे मुस्लिम युवाओं को 1992 की याद दिलाना चाहते हैं जब अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ध्वस्त किया गया था.
हुमायूं कबीर के बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. हुमायूं कबीर बताना चाहते हैं कि कई मुस्लिम देश बाबरी मस्जिद की स्थापना में उनका समर्थन कर रहे हैं. हुमायूं कबीर ने ऐलान किया है कि बेलडांगा में बनने वाली नई बाबरी मस्जिद के निर्माण में 87 करोड रुपए खर्च किए जाएंगे. उन्होंने कहा है कि वे पीछे मुड़ने वालों में से नहीं है. वे प्रशासन को चेतावनी देते हैं कि अगर उन्हें रोकने की कोशिश की गई तो अंजाम अच्छा नहीं होगा.
हुमायूं कबीर ने अपने एक बयान में कहा है कि 6 दिसंबर 2026 को बेलडांगा में 5 लाख लोगों को जुटाया जाएगा. अगर प्रशासन ने उन्हें रोकने या किसी तरह की सख्ती करने की कोशिश की तो वे और उनके समर्थक नेशनल हाईवे को जाम कर देंगे. हुमायूं कबीर स्थानीय प्रशासन के बहाने उस मुख्यमंत्री तथा उनकी सरकार को चैलेंज कर रहे हैं, जो पहले भी बाबरी मस्जिद के नाम पर कोई अन्य मस्जिद बनाने का पुर जोर विरोध कर चुकी है.
आपको बताते चलें कि यह वही हुमायूं कबीर हैं, जो कुछ समय पहले राजनीति से संन्यास लेने का संकेत दे चुके हैं. जब रेजी नगर में उपचुनाव हो रहा था, तब हुमायूं कबीर की पुलिस के साथ काफी नोक झोंक हुई थी. उसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. हालांकि चुनाव समाप्त होने के बाद उन्हें रिहा भी कर दिया गया.
हुमायूं कबीर कभी तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी का विश्वसनीय चेहरा माने जाते थे. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने ममता बनर्जी से दूरी बना ली और अपनी खुद की पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा और दो सीटों पर जीत हासिल की. उनमें से हुमायूं कबीर ने नौदा सीट बरकरार रखी जबकि रेजीनगर सीट खाली करके अपने बेटे को उम्मीदवार बनाया था. लेकिन इस उप चुनाव में उनका बेटा जीत नहीं सका. यहां भी भाजपा उम्मीदवार विजयी रहा.
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद रेजी नगर सीट भाजपा के हाथों गवाने का हुमायूं कबीर को काफी मलाल रहा. वह मीडिया के समक्ष रो पड़े और उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने और विदेश में बस जाने का संकेत दिया था. उन्होंने यह भी कहा था कि जब तक सुबेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद पर रहेंगे, तब तक वे विधानसभा नहीं जाएंगे.
अब देखना होगा कि क्या हुमायूं कबीर अपने बयान पर कायम रहते हैं या फिर समय बीतने के साथ उनका एक और ताजा बयान सामने आ सकता है. क्योंकि हुमायूं कबीर भी जानते हैं कि भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के रहते उनका यह स्वप्न कभी साकार नहीं हो सकता है. शुभेंदु अधिकारी समेत भाजपा के कई शीर्ष नेता पहले भी कह चुके हैं कि अगर हुमायूं कबीर को मस्जिद बनाने का इतना ही शौक है तो बाबर के नाम पर नहीं बल्कि मौलाना आजाद या राष्ट्रपति एपीजे कलाम के नाम पर मस्जिद बनाएं.
