बैंकिंग व्यवस्था के चरमराने की आहट ने आम जनता से लेकर बाजार को डराना शुरू कर दिया है. इस महीने तो तीन दिनों की बैंक हड़ताल है.लेकिन अगर सरकार नहीं झुकी तो, अक्टूबर महीने में तो स्थिति और ज्यादा भयंकर हो सकती है. जब आप बैंकों में अनिश्चितकालीन हड़ताल देख सकेंगे. ऐसे में आम, खास और सरकार को कई तरह के झटके लग सकते हैं.
रूस यूक्रेन युद्ध के बाद वैसे भी पूरे विश्व में महंगाई और आर्थिक मंदी की स्थिति उत्पन्न हो गई है. इस वैश्विक स्थिति में भी भारत अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने का प्रयास कर रहा है. लेकिन इसी बीच बैंक यूनियन संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस के द्वारा 28 सितंबर से तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान सरकार के प्रयास को जरूर झटका दे सकता है.
ऐसा लगता है कि यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस सरकार पर दबाव डालने और उसे झुकाने के लिए सभी तरह की तैयारी कर चुकी है. संकेत तो ऐसा है कि सरकार चाहे जैसे भी माने, लेकिन सरकार को उनकी मांगे माननी ही होगी. 11 सितंबर को एकदिवसीय हड़ताल के बाद ही बैंक यूनियंस की भावी रणनीति तेज हो गई. 14 सितंबर को यूनियंस की बैठक में इसी महीने तीन दिनों की बैंक हड़ताल का फैसला किया गया.
लेकिन बात यहीं तक खत्म नहीं हो जाती. अगर सरकार ने अब भी ध्यान नहीं दिया तो बैंक यूनियंस की लड़ाई इससे भी ज्यादा खतरनाक मोड़ पर जा सकती है. अभी तो तीन दिनों की बैंक हड़ताल होगी. लेकिन अगले महीने यानी अक्टूबर में बैंक यूनियन कर्मियों के द्वारा अनिश्चितकालीन बैंक हड़ताल की जा सकती है. यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस ने अपने आंदोलन की रूपरेखा भी स्पष्ट कर दी है. उन्होंने पहले ही घोषणा कर दी है कि अगर सरकार नहीं चेती तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकाल हड़ताल होगी.
जो भी हो, समस्या गंभीर है. बैंक वाले जैसे अब किसी की सुनने वाले नहीं है. इसका असर कितना होगा, यह तो बाद की बात है. लेकिन एक व्यापारी से लेकर आम आदमी के जीवन और व्यवहार पर इसका भारी असर हो सकता है. व्यापारी हो या आम आदमी बैंक से उसका रोजमर्रा का जीवन संचालित होता है. हालांकि आम आदमी पर बैंक हड़ताल का कुछ ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. लेकिन एक कारोबारी और व्यापारी का वित्तीय लेनदेन रुक सकता है, जिससे उसका कारोबार प्रभावित होगा.
लिहाजा यही सलाह है कि अगर आपका बैंक का कोई भी काम हो तो 28 सितंबर से पहले ही करा लें. अगर पार्टी से चेक लेना हो अथवा देना हो तो फटाफट करवा ले. अगर सितंबर महीने में ही बैंक संबंधित कागजात या वित्तीय लेनदेन को बाधा रहित निपटाना हो तो याद रखें आपके पास 27 सितंबर तक समय है. उसके बाद सितंबर महीने में आपका काम नहीं होगा. कुछ इसी तरह के संकेत स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के यूनियन संगठनों के द्वारा दिया गया है. लगभग सभी बैंकों की यूनियन इकाइयों ने जनता को सचेत करना शुरू कर दिया है.
बैंकों की हड़ताल पूर्व में भी होती रही है. लेकिन यह पहला मौका है जब बैंक यूनियन करो या मरो की तरह आंदोलन की राह पर आ गए हैं. यूनियन सरकार से अपनी मांग मनवाने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार दिख रही है. इससे पहले 11 सितंबर को उनकी एकदिवसीय हड़ताल जैसे ट्रेलर के रूप में थी. इस हड़ताल के जरिए बैंक कर्मचारियों ने अपनी यूनिटी का प्रदर्शन किया था और सरकार को एक तरह से चेतावनी दे डाली थी कि यह एक शुरुआत है. अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो आंदोलन होगा और सरकार को इसका अंजाम भुगतना होगा.
बैंक यूनियनों की तैयारी किस तरह से है, इसकी झलक 11 सितंबर को ही मिल गई थी. लेकिन सरकार की ओर से कोई आश्वासन अथवा यथोचित प्रतिक्रिया नहीं मिलने से उनका धैर्य जैसे जवाब दे रहा है. आपको बता दें कि भारतीय बैंक संघ और वित्तीय सेवा विभाग की ओर से पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने और यूनियन की अन्य लंबित मांगों पर विचार के साथ ही उसे कार्य प्रणाली में लाने के मुद्दे पर बैंक यूनियन सरकार के दरवाजे खटखटाती आ रही है. लेकिन अब तक सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किया है.
28 सितंबर से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय बैंक हड़ताल को सफल बनाने के लिए यूनियनों की ओर से संपूर्ण तैयारी कर ली गई है. कल हड़ताल में शामिल बैंक कर्मी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे. इससे पहले 18 सितंबर को बैंक यूनियनों की ओर से सरकार को जगाने के लिए दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन किया गया. उसके बाद 20 सितंबर को बैंक यूनियन कर्मचारी के द्वारा इंटरनेट मीडिया अभियान शुरू किया गया.
हड़ताल से पहले 24 सितंबर को बैंक कर्मी अपने अपने राज्य की राजधानियों और प्रमुख केन्द्रों पर धरना प्रदर्शन करेंगे. 26 और 27 सितंबर को उनके द्वारा हड़ताल की तैयारी और हड़ताल के बीच जनता की असुविधा को कम से कम करने के लिए के लिए सभी तरह के कार्यक्रम बनाए जाएंगे. अगर आप कारोबारी हैं, नौकरी पेशा है या किसी भी वर्ग से आते हैं तो हड़ताल को ध्यान में रखते हुए पूर्व व्यवस्था कर लें.
